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कभी यूपी की सियासत में बोलती थी अमर सिंह की तूती, राजनीति के साथ बिजनेस, फिल्मों में था दखल
Sat, 01 Aug 2020 10:45 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sat, 01 Aug 2020 10:45 PM IST
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अमर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
समाजवादी पार्टी से चार बार राज्य सभा सदस्य चुने गए अमर सिंह लंबे समय तक यूपी की सियासत का केंद्र बिंदु रहे। वह लंबे वक्त तक मुलायम सिंह यादव के भरोसेमंद व पार्टी में दूसरे नंबर की हैसियत वाले नेता रहे।
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करीब छह साल तक सपा से अलग रहने के बाद वर्ष 2016 में वह फिर सपा उम्मीदवार के रूप में राज्य सभा पहुंचे थे। राजनीति के साथ ही बिजनेस और फिल्मों में उनका खासा दखल था। समाजवादी पार्टी में ग्लैमर का तड़का लगाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। उन्होंने देश के जाने-माने उद्योगपतियों व फिल्म स्टारों को तत्कालीन मुख्यमंत्री व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से रूबरू कराया। उनके रहते सैफई महोत्सव में बॉलीवुड के तमाम कलाकार जुड़े थे।
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आजमगढ़ में जन्मे अमर सिंह बेबाक टिप्पणी करते थे। एक जमाने में उन्हें राजनीति का चाणक्य तक कहा गया। उन्हें तुकबंदी और शेर-ओ-शायरी के माध्यम से अपनी बात कहने में महारत हासिल थी। वह लंबे समय तक सपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे। पहली बार वह 1996 में सपा से राज्य सभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद वह आगे बढ़ते ही गए। इसके बाद 2002 और 2008 में राज्य सभा पहुंचे। वर्ष 2010 में उन्होंने सपा के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
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मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हे मंत्री का दर्जा देकर प्रदेश में औद्योगिक निवेश की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौर में प्रदेश की राजनीति में उनकी तूती बोलती थी। मुलायम और अमर सिंह की नजदीकियों के चलते आजम खां भी कुछ समय के लिए सपा से अलग रहे।
अमर सिंह और आजम खां के रिश्तों में तल्खी फिल्म अभिनेत्री जयप्रदा को लेकर शुरू हुई। अमर सिंह की सिफारिश पर जयप्रदा 2004 में रामपुर से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ी और विजयी रहीं। इसके बाद अमर सिंह और आजम के रिश्तों में खटास शुरू हो गई। इसी के चलते 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले आजम खां सपा से अलग हो गए। उनके विरोध के बावजूद अमर सिंह ने जयप्रदा को रामपुर से चुनाव लड़ाया और दूसरी बार सांसद चुनी गईं।
2016 में वापसी लेकिन जल्द हुआ मोहभंग
वर्ष 2010 में कुछ विवादों के चलते अमर सिंह से सपा के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद मुलायम सिंह ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद अमर सिंह ने राष्ट्रीय लोकमंच नाम से राजनीतिक पार्टी भी बनाई। विधानसभा चुनाव भी लड़ा। लेकिन पार्टी को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली। उन्होंने पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग उठाई।
साल 2014 में उन्होंने आगरा से राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर भी लोक सभा चुनाव लड़ा लेकिन करारी हार हुई। वर्ष 2016 में अमर सिंह फिर सपा में आए राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। यह वह दौर था जब अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। पार्टी में तवज्जो नहीं मिलने से अमर सिंह एक बार फिर सपा से दूर होते चले गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा की तारीफ शुरू की। पिछले दो साल से भाजपा के पक्ष में बयानबाजी कर रहे थे।
मुलायम परिवार को तोड़ने के भी आरोप लगे
समाजवादी पार्टी में आजम खां के साथ ही रामगोपाल यादव से अमर सिंह के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे। उन पर मुलायम परिवार में मतभेद पैदा करने के भी आरोप लगे। एक समय था जब उनकी सिफारिश पर सपा ने उद्योगपति अनिल अंबानी को राज्य सभा भेजा लेकिन उन्होंने बाद में इस्तीफा दे दिया। अमर सिंह का नाम यूपीए-1 समय अविश्वास प्रस्ताव में सांसदों को कथित रूप से घूस देने के मामले में भी आया। हालांकि, बाद में वह इन आरोपों से बरी हो गए।
सभी दलों के नेताओं से रहे रिश्ते
अमर सिंह के सभी दलों के नेताओं से अच्छे रिश्ते रहे। वह मेजबानी के लिए मशहूर थे। सपा ही नहीं कांग्रेस, भाजपा, वामपंथी व क्षेत्रीय दलों के कई नेताओं से उनकी निजी दोस्ती रही। वह इसे छिपाते नहीं थे। उन्हें गर्मजोशी से मेजबानी के लिए जाना जाता है। उन्हीं की वजह से जया बच्चन सपा से जुड़ीं और अभी भी राज्य सभा सदस्य हैं। उन्होंने फिल्म अभिनेता संजय दत्त को लखनऊ से लोकसभा चुनाव भी लड़वाया। 90 के दशक में जब अमिताभ बच्चन बुरे दौर से गुजर रहे थे तब अमर सिंह ने उनकी मदद की थी। बाद में उनसे रिश्तों में कड़वाहट भी आई। उन्होंने उनके खिलाफ कुछ टिप्पणियां भी की और बाद में उनसे माफी भी मांगी।