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हाईकोर्ट का अहम फैसला: घरेलू हिंसा के मुकदमे दायर करने की समयसीमा नहीं
Wed, 27 Oct 2021 10:04 AM IST
ishwar ashish
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 27 Oct 2021 10:04 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने घरेलू हिंसा से जुड़े मामले में एक अहम फैसला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों को दायर करने की कोई समयसीमा नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मुकदमों को दायर करने की समयसीमा को लेकर अहम फैसला दिया है। इसमें कहा गया है कि ये मुकदमे सिविल प्रकृति के होते हैं। लिहाजा कभी भी दाखिल किए जा सकते हैं। इनके दायर करने के तर्क संगत समय के मुद्दे पर संबंधित अदालत निर्णय ले सकेगी। मियाद अधिनियम, घरेलू हिंसा अधिनियम के मामलों में लागू नहीं होता क्योंकि ये केस आपराधिक प्रकृति के नहीं होते हैं।
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न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने यह फैसला त्रिलोचन सिंह की याचिका पर सुनवाई कर एकल पीठ की ओर से संदर्भित प्रश्नों के जवाब देते हुए पारित किया। एकल पीठ ने दो कानूनी सवालों को तय करने के लिए मामला संदर्भित किया था।
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पहला सवाल था कि काफी समय बीतने के बाद घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत दाखिल मुकदमा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 468 के तहत कालातीत माना जाएगा अथवा नहीं। खंडपीठ ने इसका उत्तर देते हुए कहा कि चूंकि अधिनियम की धारा 12 के तहत दाखिल मुकदमा अनुतोष की प्राप्ति के लिए होता है। इसलिए यह सिविल प्रकृति का मुकदमा होता है। ऐसे मुकदमे पर दंड प्रक्रिया संहिता लागू नहीं होती।
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वहीं, दूसरा प्रश्न था कि अगर इसे सिविल प्रकृति का माना जाए तो क्या मियाद अधिनियम के तहत तीन वर्ष के भीतर ही मुकदमा दाखिल होना चाहिए अथवा किसी भी समय इसे दाखिल किया जा सकता है। इसका उत्तर देते हुए कोर्ट ने कहा कि विधायिका ने ऐसे मुकदमों पर कोई मियाद तय नहीं की है। इसलिए मियाद अधिनियम इन मुकदमों पर लागू नहीं होगा।