कोरोना इलाज के बुनियादी ढांचे में सुधार पर हाईकोर्ट ने यूपी सरकार की सराहना की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच जिलों की मांगी गई रिपोर्ट को देखने के बाद कहा कि हम इसकी सराहना करते हैं कि यूपी में इलाज की आधारभूत सुविधाओं में सुधार संबंधी कुछ कार्य किया गया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना इलाज के बुनियादी ढांचे में सुधार करने पर बृहस्पतिवार को यूपी सरकार की सराहना की। कोर्ट ने पहले आदेश के तहत पांच जिलों की मांगी गई रिपोर्ट को देखने के बाद कहा कि हम इसकी सराहना करते हैं कि इलाज की आधारभूत सुविधाओं में सुधार संबंधी कुछ कार्य किया गया है। अदालत ने उम्मीद जताई कि इसी तरह से प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रयास किए जाएंगें। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर पांच और जिलों भदोही, गाजीपुर, बलिया, देवरिया व शामली में चिकित्सकीय सुविधाओं में सुधार की रिपोर्ट राज्य सरकार से तलब की है। कोर्ट ने यह भी पाया कि शुल्क तय करने में संतोषजनक कार्य किया गया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश कोरोना मरीजों के इलाज संबंधी वर्ष 2020 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। इस मामले में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत ने बहराइच, श्रावस्ती, बिजनौर, बाराबंकी और जौनपुर के अस्पतालों में इलाज की सुविधाएं बढ़ाए जाने की रिपोर्ट तलब की थी, जो सुनवाई के दौरान पेश की गई। साथ ही स्व. न्यायमूर्ति वीके श्रीवास्तव के इलाज की जांच मामले में वांछित रिपोर्ट भी संबंधित समिति ने पेश की। इस मामले में हरि प्रसाद गुप्ता की दायर जनहित याचिका को राज्य सरकार की तरफ से मुल्तवी किए जाने के आग्रह पर, इस पर सुनवाई नहीं हो सकी और कोर्ट ने सरकार को याचिका पर अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने जनहित याचिका को 7 जून से शुरु होने वाले हफ्ते में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
केंद्र से कहा- दिव्यांगों को वैक्सीन लगाने पर अपना रुख स्पष्ट करें
कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कहा है कि दिव्यांगों को वैक्सीन लगाए जाने को लेकर केंद्र की गाइडलाइन का पालन करेगी। कोर्ट ने कहा कि जो दिव्यांग वैक्सीन लगवाने के लिए केंद्र तक जाने में असमर्थ हैं, उन्हें वैक्सीन लगाने के लिए केंद्र सरकार अगली सुनवाई पर अपना रुख स्पष्ट करें।