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Lucknow News: सारी जिम्मेदारी दरोगा व सिपाही पर, बाकी इंटेलिजेंस फेल
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बेहटा में विस्फोट के बाद पुलिस ने चलाया सर्च अभियान।
लखनऊ। गुडंबा के बेहटा व सेमरा गांव में अवैध पटाखों का कारोबार चल रहा था। विस्फोट हुआ, दो लोगों की जान गई तो चौकी इंचार्ज व एक सिपाही को निलंबित कर खानापूर्ति कर दी गई। सवाल उठता है कि कमिश्नरेट पुलिस के पास अलग से खुफिया विभाग है। डीसीपी से लेकर तमाम अधिकारी इस विभाग में तैनात हैं। शहर में कहां, क्या हो रहा है, इसकी जानकारी रखना उनका काम है, मगर खुफिया विभाग को अवैध पटाखों के कारोबार की भनक तक नहीं लग सकी और नतीजा हादसे के रूप में सामने आया।
अब हादसे के बाद अफसर रटा रटाया जवाब दे रहे हैं कि सभी पहलुओं पर जांच हो रही है, कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। यह कोई पहली बार नहीं है। शहर में अवैध रूप से संचालित होने वाले पटाखों के कारोबार और उससे विस्फोट की पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है, मगर कार्रवाई के नाम पर कभी दरोगा तो कभी सिपाही पर गाज गिरी और बड़ी-बड़ी कुर्सियों पर बैठे अधिकारी बच गए।
पटाखे के कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि लाइसेंसधारक भी नियमों और शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं करते। अक्सर भंडारण की तय सीमा से कई गुना अधिक पटाखे व बारूद स्टोर किया जाता है। लाइसेंस जारी होने के बाद सही से जांच नहीं होती है। इस बीच जरा सी लापरवाही बड़े हादसे का सबब बन जाती है।
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कागजी कार्रवाई तक सीमित है खुफिया विभाग
पुलिस कमिश्नरेट का खुफिया विभाग सिर्फ कागजी रिपोर्ट बनाने तक सीमित है। गुडंबा में हुए हादसे के बाद खुफिया एजेंसी के लोग भी पहुंचे। मृतकों और घायलों का नाम नोट किया। आसपास के कुछ लोगों से बातचीत की। इसके बाद चुपचाप चले गए। दफ्तर पहुंचकर रिपोर्ट बनाई और अधिकारियों को भेज दी, जबकि खुफिया विभाग का असल काम हादसे से पहले पुलिस व प्रशासन को सचेत करना है, न की हादसे के बाद रिपोर्ट बनाना।
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अब हादसे के बाद अफसर रटा रटाया जवाब दे रहे हैं कि सभी पहलुओं पर जांच हो रही है, कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। यह कोई पहली बार नहीं है। शहर में अवैध रूप से संचालित होने वाले पटाखों के कारोबार और उससे विस्फोट की पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है, मगर कार्रवाई के नाम पर कभी दरोगा तो कभी सिपाही पर गाज गिरी और बड़ी-बड़ी कुर्सियों पर बैठे अधिकारी बच गए।
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पटाखे के कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि लाइसेंसधारक भी नियमों और शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं करते। अक्सर भंडारण की तय सीमा से कई गुना अधिक पटाखे व बारूद स्टोर किया जाता है। लाइसेंस जारी होने के बाद सही से जांच नहीं होती है। इस बीच जरा सी लापरवाही बड़े हादसे का सबब बन जाती है।
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कागजी कार्रवाई तक सीमित है खुफिया विभाग
पुलिस कमिश्नरेट का खुफिया विभाग सिर्फ कागजी रिपोर्ट बनाने तक सीमित है। गुडंबा में हुए हादसे के बाद खुफिया एजेंसी के लोग भी पहुंचे। मृतकों और घायलों का नाम नोट किया। आसपास के कुछ लोगों से बातचीत की। इसके बाद चुपचाप चले गए। दफ्तर पहुंचकर रिपोर्ट बनाई और अधिकारियों को भेज दी, जबकि खुफिया विभाग का असल काम हादसे से पहले पुलिस व प्रशासन को सचेत करना है, न की हादसे के बाद रिपोर्ट बनाना।

बेहटा में विस्फोट के बाद पुलिस ने चलाया सर्च अभियान।

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