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कैंडिडा आरिस फंगस : सभी अस्पतालों को अलर्ट जारी, सीएमओ ने जारी किया पत्र
Tue, 21 May 2019 01:14 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Tue, 21 May 2019 01:14 AM IST
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एसजीपीजीआई में भर्ती होने वाले मरीजों मेंकैंडिडा आरिस फंगस के लक्षण मिलने के बाद राजधानी के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। केजीएमयू ने भी सभी विभागों को आईसीयू वाले मरीजों की विशेष निगरानी रखने के लिए कहा गया है।
आईसीयू में लंबे समय तक भर्ती होने वाले मरीजों में कैंडिडा आरिस नामक फंगस पाया जा रहा है। इससे मरीजों की कुछ दिन बाद मौत हो जाती है। सोमवार को सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की है।
इसमें कहा गया हैकि कैंडिडा आरिस फंगस के लक्षण मिलते ही एसजीपीजीआई या केजीएमयू में उसका सैंपल भेज कर जांच कराई जाए। साथ ही उस मरीज को अन्य मरीजों से अलग रखा जाए। इतना ही नहीं आईसीयू में कार्य करने वाले चिकित्सक, चिकित्साकर्मी आदि भी सावधानी बरतें।
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केजीएमयू के सीएमएस प्रोफेसर एसएन शंखवार ने बताया कि संस्थान के आईसीयू में भर्ती होने वाले सभी मरीजों के ब्लड सैंपल में कैंडिडा आरिस फंगस की जांच पहले से ही कराई जा रही है।
अमर उजाला ने किया खुलासा
अमर उजाला ने रविवार के अंक में ‘अस्पतालों की आईसीयू में कैंडिडा आरिस फंगस का खतरा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पूरी स्थिति का खुलासा किया था।इस खबर के छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।
क्या हैं लक्षण
यह फंगस कमजोर इम्युन वाले मरीजों, लंबे समय से आईसीयू में भर्ती करने वाले मरीजों पर हमला करता है। मरीजों के साथ ही उनके संपर्क में आने वाले चिकित्साकर्मियों को भी प्रभावित होने अथवा उनके जरिए दूसरे मरीज में पहुंचने का डर रहता है। इस वजह से आईसीयू के कर्मचारियों को खासतौर से अलर्ट किया गया है। इसका असर होने पर मरीज पर शरीर पर दाने निकल आते हैं। उसे बार-बार बुखार, पेशाब में संक्रमण आदि होने लगता है।
बचाव में क्या करें
इससे बचाव के लिए मरीज के डिस्चार्ज होने पर पूरे कक्ष को आईसूलेट किया जाता है। आईसीयू में कार्य करने वाले रेजीडेंट, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ को एक मरीज देखने के बाद दूसरे मरीज के पास जाने से पहले हैंसवाश अनिवार्य कर दिया जाता है। हैंसवास के लिए पानी के बाद एंटी बैक्टीरियल लिक्लिड का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।
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आईसीयू में लंबे समय तक भर्ती होने वाले मरीजों में कैंडिडा आरिस नामक फंगस पाया जा रहा है। इससे मरीजों की कुछ दिन बाद मौत हो जाती है। सोमवार को सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की है।
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इसमें कहा गया हैकि कैंडिडा आरिस फंगस के लक्षण मिलते ही एसजीपीजीआई या केजीएमयू में उसका सैंपल भेज कर जांच कराई जाए। साथ ही उस मरीज को अन्य मरीजों से अलग रखा जाए। इतना ही नहीं आईसीयू में कार्य करने वाले चिकित्सक, चिकित्साकर्मी आदि भी सावधानी बरतें।
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केजीएमयू के सीएमएस प्रोफेसर एसएन शंखवार ने बताया कि संस्थान के आईसीयू में भर्ती होने वाले सभी मरीजों के ब्लड सैंपल में कैंडिडा आरिस फंगस की जांच पहले से ही कराई जा रही है।
अमर उजाला ने किया खुलासा
अमर उजाला ने रविवार के अंक में ‘अस्पतालों की आईसीयू में कैंडिडा आरिस फंगस का खतरा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पूरी स्थिति का खुलासा किया था।इस खबर के छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।
क्या हैं लक्षण
यह फंगस कमजोर इम्युन वाले मरीजों, लंबे समय से आईसीयू में भर्ती करने वाले मरीजों पर हमला करता है। मरीजों के साथ ही उनके संपर्क में आने वाले चिकित्साकर्मियों को भी प्रभावित होने अथवा उनके जरिए दूसरे मरीज में पहुंचने का डर रहता है। इस वजह से आईसीयू के कर्मचारियों को खासतौर से अलर्ट किया गया है। इसका असर होने पर मरीज पर शरीर पर दाने निकल आते हैं। उसे बार-बार बुखार, पेशाब में संक्रमण आदि होने लगता है।
बचाव में क्या करें
इससे बचाव के लिए मरीज के डिस्चार्ज होने पर पूरे कक्ष को आईसूलेट किया जाता है। आईसीयू में कार्य करने वाले रेजीडेंट, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ को एक मरीज देखने के बाद दूसरे मरीज के पास जाने से पहले हैंसवाश अनिवार्य कर दिया जाता है। हैंसवास के लिए पानी के बाद एंटी बैक्टीरियल लिक्लिड का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।