{"_id":"e4afa7f70690631bd7c210b9635c7eca","slug":"all-about-sp-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपाइयों के सपने तो देखिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपाइयों के सपने तो देखिए
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 03 Dec 2013 10:29 AM IST
विज्ञापन
बड़े सपना देखना समाजवादियों का संस्कार है। वैसे भी नेताजी हमेशा से ही कहते आए हैं कि बडे़ सपने देखो।
विज्ञापन
पर यह सपने अगर सवाल खड़ा करने लगें तो उत्सुकता बढ़ना भी स्वाभाविक है और दिमाग का चकराना भी।
नेताजी कहते हैं, ‘मैं मुख्यमंत्री होता तो पंद्रह दिनों में कानून-व्यवस्था सुधार देता।’ प्रोफेसर साहब ऐलान करते हैं, ‘मैं मुख्यमंत्री होता तो राज्य कर्मचारियों को ठीक कर देता।’
सपा के बड़े नेताओं के यह सपने आम लोगों को सवाल बनकर चुभ रहे हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि सूबे में वे अपनी व्यथा-कथा किससे कहें।
नेताजी और प्रोफेसर साहब पर बड़ा भरोसा था। सोचते थे कि इन लोगों से पीड़ा कह देंगे तो वह दूर हो जाएगी।
पर यहां तो यही दोनों लाचारी दिखा रहे हैं तो उनकी कौन सुनेगा।
(इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेट करें, शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर बटन पर क्लिक करें)