यूपी: सरकारी बंगलों का गजब खेल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी में नेता से अफसर तक, सभी की नजरें सरकारी आवासों पर लगी रहती हैं। एक बार आवास आवंटित होने के बाद खाली कराना मुश्किल होता है।
तबादलों और सेवानिवृत्ति के बाद भी 50 अफसर सरकारी आवासों में जमे हुए हैं। वहीं कुछ की मृत्यु के बाद उनके परिवार के लोग काबिज हैं।
गैर सरकारी संस्थाएं, संगठन और पत्रकार भी आवासों पर कब्जे में पीछे नहीं हैं। हाईकोर्ट की ओर से सरकार से इन आवासों को लेकर जवाब मांगे जाने के बाद इनके आवंटन की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
राजधानी में राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रण वाली 52 सरकारी आवासीय कॉलोनियां हैं। इनके अलावा चार गेस्ट हाउस और विधायक एवं मंत्री निवास हैं।
इनमें पसंदीदा आवास पाने के लिए मंत्रियों से विधायकों और अफसरों से कर्मचारियों तक में मारामारी रहती है। पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, गैर सरकारी संस्थाएं, कर्मचारी संगठन और राजनीतिक दल भी बैकडोर से आवास आवंटन के लिए प्रयासरत रहते हैं। कोई ट्रस्ट बनाकर कोठी लेना चाहता है तो कोई पंजीकृत संस्था के नाम पर।
माल एवेन्यू में चार ट्रस्टों के नाम पर बंगले आवंटित किए गए हैं। इनके पीछे राजनीतिक समीकरणों ने काम किया। माल एवेन्यू में वीर बहादुर सिंह जनसंस्थान का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। फिलहाल इस पर स्थगनादेश है।
पूर्व मुख्यमंत्री के आवास आवंटन के लिए नियमावली बनी है लेकिन गैर सरकारी संस्थाओं, ट्रस्टों, गैर सरकारी व्यक्तियों और कर्मचारी संगठनों के राज्य संपत्ति विभाग के शासनादेश के मुताबिक आवास आवंटन किया जाता है। यह शासनादेश जुलाई 2005 में जारी किया गया था।
इसमें आवंटन की पात्रता निर्धारित है लेकिन सरकार का विवेक भी काम करता है। एक बार सरकारी आवास आवंटित हुआ तो खाली कराना आसान नहीं है। मौजूदा समय में 50 सरकारी अफसर आवासों पर अवैध कब्जे किए हुए हैं।
इनमें 18 अफसरों के तबादले हो चुके हैं, 17 सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 11 मामले ऐसे हैं जहां अफसर की मृत्यु के बाद भी उनके परिवार के लोग काबिज हैं। चार मामलों में बेदखली के आदेश के बाद भी कब्जा नहीं लिया जा सका है।
यह स्थिति केवल आफसरों के साथ ही नहीं है। अन्य श्रेणी के आवंटी भी आवंटन निरस्त होने के बाद आवास खाली नहीं कर रहे हैं। कई मामले ऐसे हैं जहां नोटिस देने के तीन से पांच साल बाद तक भी आवास खाली नहीं हो सके हैं।
सियासी दलों के लिए नियम ताक पर
राजनीतिक दलों को दफ्तर के लिए भवन आवंटन की नीति 1982 में बनी थी लेकिन उन्हें मानकों के मुताबिक आवास आवंटित नहीं किए जाते।
आवंटन नीति के मुताबिक यदि विधानसभा में किसी राजनीतिक दल के सदस्यों की संख्या 50 या उससे अधिक है तो उसे टाइप-5 का आवास आवंटित किया जाएगा।
उपलब्धता होने पर सौ सदस्यों वाले दल को एक बंगला आवंटित किया जा सकेगा। यदि किसी दल के सदस्यों की संख्या 50 से कम है तो उसे टाइप-5 का आवास या बंगला न देकर किसी सरकारी कॉलोनी में आवासीय फ्लैट आवंटित किया जाएगा।
यदि किसी दल का विधानसभा में प्रतिनिधित्व पांच से कम हो तो उसे आवास आवंटित नहीं किया जाएगा। मौजूदा समय में सपा और बसपा को छोड़कर किसी भी दल के विधानसभा में 50 सदस्य नहीं हैं। वहीं, पांच से कम विधायकों वाले कई दलों को भी आवास आवंटित किए गए हैं।
12 पार्टियों को आवंटित हैं आवास
राज्य संपत्ति विभाग ने कुल 12 पार्टियों को आवास आवंटित कर रखे हैं। इनमें राजनीतिक दलों के दफ्तर चल रहे हैं। सभी प्राइम लोकेशन में हैं।
जिन दलों को आवास आवंटित हैं, उनमें समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, समाजवादी युवजन सभा, महिला मोर्चा भाजपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, जनता दल, राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, जनता दल सेकुलर, अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी शामिल हैं।
इनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस और अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस के अनधिकृत कब्जे माने गए थे। लालबाग स्थित लोकतांत्रिक कांग्रेस का दफ्तर खाली कराया जा चुका है। यहां बहुमंजिला इमारत बनना प्रस्तावित है।
इन संस्थाओं के भी अवैध कब्जे
राज्य संपत्ति विभाग ने आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर को दी जानकारी में बताया है कि विभिन्न सरकारी कॉलोनियों में 89 गैर सरकारी संस्थाओं, संघ, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर सरकारी व्यक्तियों को आवंटित 89 आवासों में 27 पर पूर्व आवंटी का अनधिकृत कब्जा है।
इनमें मुख्य रूप से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, यूपी बार काउंसिल, युवा उद्योग व्यापार मंडल, यूपी जर्नलिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट, माइनोरिटी फोरम ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय गौड महासभा, उत्तर प्रदेश संसदीय संस्थान, शोषित दल, पुष्पा लि. संस्थान, ऑल इंडिया कैफी आजमी एकेडमी आदि शामिल हैं। गैर सरकारी लोगों में रानी मौर्य और विद्यावती का कब्जा है।