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बस...अब बहुत हुआ
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 16 Sep 2013 10:32 AM IST
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चचा फिर रूठ गए थे। आगरा पंचायत में नहीं गए। भाई-भतीजा करें भी तो क्या! चचा का मान रखने के लिए यह सोचकर टोपी पहनी थी कि मुसलमानों के मुद्दे पर जब-तब सरकार को टोपी पहना देने वाले चचा शायद इससे बाज आ जाएं।
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इसके लिए तमाम सोशल साइट्स पर अच्छे-बुरे कमेंट भी झेले। मीडिया की आलोचनाओं का भी सामना किया।
किसी ने मुजफ्फरनगर पर बोलने के लिए एक पक्ष का पैरोकार ठहराया, तो किसी की दिलचस्पी उनसे इस सवाल का जवाब लेने में दिखी कि क्या टोपी पहनना ही धर्मनिरपेक्षता है?
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इतना सब झेलने के बाद भी चचा फिर नहीं चूके। पंचायत में लक्ष्य-2014 पर कम, चचा के न आने पर ज्यादा चर्चा हुई।
अंदर की बात है, आलाकमान ने तय कर लिया है कि अल्पसंख्यकों के नाम पर चचा अब ज्यादा ब्लैकमेल नहीं कर पाएंगे। इस बार तो भतीजे इसलिए मनाने पहुंच गए कि मुजफ्फरनगर के कारण सरकार थोड़ा रक्षात्मक है।
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