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ऑनलाइन प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो जरूर पढ़े ये खबर

Wed, 29 Apr 2015 03:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Wed, 29 Apr 2015 03:31 PM IST
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Alert from property related websites

टीवी और वेबसाइट्स पर कई कंस्ट्रक्शन कंपनियां आपके आशियाने की तलाश उनके पास पूरा होने का जो दावा करती हैं, वह इतना सीधा-सादा भी नहीं है। असलियत यह है कि वेबसाइट्स की प्रतिष्ठा को जरिया बनाकर इंटरनेट के माध्यम से राजधानी में अवैध प्लॉटिंग का धंधा फलफूल रहा है।

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प्रॉपर्टी से जुड़ी नामी वेबसाइट पर लुभावने विज्ञापनों के झांसे में आकर हजारों लोग ठगे जा रहे हैं। पिछले एक महीने में जिन पांच बड़ी अवैध प्लॉटिंग को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सील किया, उनके काले धंधे का खेल ऐसी ही प्रॉपर्टी वेबसाइट के जरिये खेला गया।
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जबकि इसी तरह कम से कम 300 अवैध सोसाइटी संचालित की जा रही हैं, जिनका धंधा सबसे ज्यादा इंटरनेट केजरिये ही चल रहा है।इन प्रॉपर्टी वेबसाइट्स पर जब लोग अपने इच्छुक इलाके में प्रॉपर्टी खोजते हैं तो उनसे उनका मोबाइल नंबर दर्ज करवाया जाता है।
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इसी मोबाइल नंबर पर बाद में कॉल कर रीयल एस्टेट एजेंट लोगों को अवैध भूखंडों के जाल में फंसा लेते हैं। ये गोरखधंधा तेजी से बढ़ता जा रहा है। मगर इन वेबसाइट्स की प्रतिष्ठा को देखते हुए लोग आसानी से अवैध सोसाइटी के प्लॉटों पर भरोसा कर लेते हैं।

इन वेबसाइट्स पर चल रही है अवैध प्लॉटिंग

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मैजिक ब्रिक्स, मकान डॉट कॉम, इंडिया प्रॉपर्टी, 99 एकर्स, कॉमनफ्लोर, रीयल एस्टेट इंडिया और हाउसिंग डॉट कॉम सहित करीब एक दर्जन प्रतिष्ठित प्रॉपर्टी वेबसाइट के जरिये राजधानी में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार तेजी से चल रहा है।

इन वेबसाइट पर प्लॉटिंग के एड अपलोड कर के लोगों को खींचा जाता है। इसके बाद में जो भी लोग इच्छुक होते हैं, उनको टेलीकॉलिंग के जरिये साइट तक लाकर खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।

इन वेबसाइट ने अभी तक प्रापर्टी की वैधता को लेकर कोई भी मानक तय नहीं किए हैं। बड़े आराम से इन साइट पर विज्ञापन पोस्ट कर के लोग प्रॉपर्टी का प्रचार करते हैं।

मगर वेबसाइट इन टाउनशिप के अनुमोदन संबंधित कोई भी प्रमाणपत्र नहीं मांगती है। ऐसे में ये वेबसाइट लोगों को लाखों रुपये निवेश करने के लिए प्रेरित तो करते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं करते हैं कि इसके जरिये वे फंसने से कैसे बच सकते हैं।

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