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अखिलेश की पहली पसंद यूपी के गांव व किसान

Tue, 13 Jan 2015 01:51 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 13 Jan 2015 01:51 AM IST
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Akhilesh Yadav supports to farmers of Uttar Pradesh.

किसान सरकारें तो बनाते हैं लेकिन उन्हें सहूलियतें नहीं मिलती। चुनाव के समय वे जाति और धर्म में बंट जाते हैं। ऐसा करने से संसद में उनकी ताकत नहीं पहुंचती। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को अखिल भारतीय किसान प्रतिनिधि सम्मेलन में ये बातें कहीं। उन्होंने प्रदेश के गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया।

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सीएम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गन्ना समितियों के अध्यक्ष संघ की ओर से आयोजित सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, आजादी के इतने साल बाद भी देश का किसान गरीब और पिछड़ा है। कभी उसे बीज की चिंता रहती है तो कभी मौसम की। फसल तैयार होने पर सही कीमत मिलने की चिंता रहती है।
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दुनिया के दूसरे देशों ने किसानों को मदद देकर खुशहाल बनाया है लेकिन हमारे यहां इतनी सरकारें बनने के बाद भी किसानों की हालत नहीं सुधरी। यह स्थिति तब है जब आबादी का अधिकतम हिस्सा किसान हैं।
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किसान सरकारें बनाते, बिगाड़ते हैं लेकिन उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पातीं। किसान नेताओं द्वारा ‘दिल्ली चलो’ का नारा देने पर उन्होंने कहा, दिल्ली जरूर जाओ लेकिन ‘सदन में किसानों को चुनें’ नारे पर भी विचार करें। किसान जाति-धर्म के नाम पर बंटते रहेंगे तो लोकसभा में उनकी ताकत नहीं पहुंच पाएगी।

गुजरात में खेती के लिए आठ घंटे बिजली

Akhilesh Yadav supports to farmers of Uttar Pradesh.

मुख्यमंत्री ने कहा, खेत में किसान की फसल सस्ती होती है और बाजार में जाते ही महंगी हो जाती है। इस असंतुलन को मुलायम सिंह यादव और समाजवादी ही दूर सकते हैं। पिछली केंद्र सरकार ने रॉ शुगर का आयात किया। इससे चीनी का मार्केट बिगड़ गया। उन पर बहुत दबाव था कि गन्ना मूल्य घटाया जाए लेकिन उन्होंने पिछले साल की तरह 280 रुपये रेट तय किया।


पिछले सीजन का बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराया। केवल तीन-चार समूह हैं, जिन्होंने पिछले साल का पैसा नहीं चुकाया। उन्होंने पुराना और चालू पेराई सत्र का समय से मूल्य भुगतान कराने का आश्वासन दिया।

उन्होंने किसानों को मुफ्त सिंचाई, कर्जमाफी, मेरठ व शाहजहांपुर में बंद चीनी मिलों को चलाने और आजमगढ़ में मिल लगाने जैसे फैसलों की जानकारी दी।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के लोग यूपी में 24 घंटे बिजली देने की घोषणा कर रहे थे। गुजरात में खेती के लिए केवल आठ घंटे बिजली मिलती है।

यूपी के लोगों को यह बात मालूम नहीं थी। कहा, 2016 में सरकार सिंचाई के लिए निर्बाध आठ घंटे और घरेलू उपयोग के लिए 14 से 16 घंटे बिजली देने लगेगी। सोलर पंपों का प्रयोग सफल रहा है। इनका बजट और बढ़ाया जाएगा।

डीजल के दाम घटे लेकिन नहीं मिली ज्यादा राहत

Akhilesh Yadav supports to farmers of Uttar Pradesh.

सीएम ने किसानों को ज्यादा सब्सिडी देने की वकालत की और कहा, दुनिया भर के देश किसानों को सब्सिडी देते हैं लेकिन भारत में उन्हें पर्याप्त सब्सिडी नहीं दी जा रही। उन्होंने पूछा, क्या डीजल उतना सस्ता हो गया है जितनी गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई है। उन्होंने प्रदेश के अगले बजट में किसानों और गांवों के लिए ज्यादा धन की व्यवस्था करने की बात कही।

किसान आयोग के गठन की मांग
सम्मेलन के संयोजक और अध्यक्ष संघ, सहकारी समितियां के अध्यक्ष अवधेश मिश्र ने मुख्यमंत्री से किसान आयोग का गठन, गन्ना मूल्य का समयबद्ध भुगतान और फसलों के लागत मूल्य पर 25 से 50 फीसदी मुनाफा दिलाने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि सहकारी गन्ना समितियों में संयुक्त हस्ताक्षर का प्रावधान किया जाए और हर समिति को  प्रति वर्ष 10 लाख रुपये की मदद दी जाए।

किसान विधेयक पर मांगा समर्थन
राजस्थान से आए किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि 2014 में कर्मचारियों का डीए 17 फीसदी बढ़ा है जबकि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य शून्य से पांच फीसदी तक बढ़ा है। उन्होंने किसानों की खुशहाली के लिए तैयार किए गए किसान विधेयक की जानकारी दी और सीएम अखिलेश यादव से इस पर समर्थन मांगा।

भूमि अधिग्रहण को लेकर निशाने पर मोदी

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सम्मेलन में भूमि अधिग्रहण के संशोधन विधेयक को लेकर कई राज्यों के किसान प्रतिनिधियों के निशाने पर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार रही।

अधिकतर वक्ताओं ने भाजपा पर खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। कर्नाटक के शांता कुमार, महाराष्ट्र के रघुनाथ पाटिल, जम्मू कश्मीर के देवराज चौधरी और पंजाब के सतनाम सिंह बीरू ने कहा कि भाजपा की कृषि नीति किसान विरोधी है।

पूर्व विधायक साहब सिंह ने कहा कि मोदी से बड़ा जादूगर उन्होंने नहीं देखा। मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव में झूठ को बेचा। सात माह में भाजपा सरकार ने किसानों के हित में एक भी फैसला नहीं किया है।

मार्च में दिल्ली में प्रदर्शन
कई राज्यों के किसान नेताओं ने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर मार्च में प्रदर्शन करने का ऐलान किया। इसमें लाखों किसान भाग लेंगे और केंद्र सरकार पर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू करने का दबाव बनाएंगे।

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