'योग पर अपना ठप्पा लगाना चाहते हैं कुछ लोग'
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि देश में योग पर बेवजह विवाद खड़ा करने की कोशिश हो रही है। यह कोशिश सियासी है। देश में सदियों से योग चल रहा है,योग हमारी विरासत और परंपरा है। कहीं विरोध नहीं है।
लेकिन,मीडिया और मार्केटिंग के मौजूदा दौर में योग पर भी अपना ठप्पा लगाने की कोशिश हो रही है। विवाद का सबब यही है। आरक्षण को लेकर हाल में हुए उग्र निषाद आंदोलन को अखिलेश ने चुनावी राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा,सपा ने सब जातियों का सम्मान किया है।
तेरह पिछड़ी जातियों को आरक्षण के दायरे में लाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को केंद्र ने बेवजह अटका रखा है।मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को‘अमर उजाला’से खास बातचीत में कहा कि ऋषि-मुनियों के युग में मार्केटिंग नहीं होती थी,मौजूदा दौर में भी बीकेएस अयंगर जैसे गुरु ने योग पर कभी अपना ठप्पा लगाने की कोशिश नहीं की।
लिहाजा,कभी विवाद हुआ ही नहीं। अब कुछ लोग योग पर अपना ठप्पा लगाना चाहते हैं,सवाल और आपत्तियां इसी कारण से है।
निषाद आंदोलन की जड़ चुनावी राजनीति
अखिलेश का कहना है कि आरक्षण को लेकर निषादों के उग्र आंदोलन केपीछे चुनावी सियासत है। विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे,ऐसी साजिशें और बढ़ेंगी। सरकार की ऐसे तत्वों से निपटने की पूरी तैयारी है।
उन्होंने कहा,ये वही तत्व हैं,जिन्होंने पिछले चुनाव से पहले अयोध्या में बेमौसम परिक्रमा निकलवा दी थी। उन्होंने कहा,सपा और सरकार सभी जातियों को सम्मान करती है और उन्हें संवैधानिक दायरे में उनका हक देना चाहती है।
तेरह अति-पिछड़ी जातियों को आरक्षण का प्रस्ताव सरकार ने काफी पहले केंद्र सरकार को भेजा हुआ है, जिसे वहां बेवजह अटकाया हुआ है।
मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि एमएलसी मनोनयन के मामले में राज्यपाल राम नाईक सरकार के पक्ष में ही फैसला करेंगे। उन्होंने कहा, राज्यपाल अभी सरकार की लिस्ट का परीक्षण करवा रहे हैं,विश्वास है कि उसका नतीजा हमारे पक्ष में ही देंगे।