सीएम का अहम फैसला, दूर होगी बिजली किल्लत
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प्रदेश में छोटे सोलर पावर प्लांट लगाने का रास्ता साफ हो गया है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अब छोटे निवेशक भी निवेश कर सकेंगे।
सरकार ने सौर ऊर्जा नीति-2013 में संशोधन करके कम से कम एक मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट लगाने की अनुमति देने का प्रावधान कर दिया है।
इसके लिए यूपीनेडा को नोडल एजेंसी बनाया गया है। अभी तक कम से कम पांच मेगावाट क्षमता की इकाइयों को ही मंजूरी दी जाती थी।
पूंजी निवेश को बढ़ावा देने की कवायद
प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार ने सौर ऊर्जा नीति के तहत कम से कम एक मेगावाट क्षमता की सोलर परियोजनाओं को भी प्रोत्साहन देने का फैसला किया है।
पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में सौर ऊर्जा नीति में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग ने मंगलवार को इस सबंध में आदेश जारी कर दिया।
अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग के प्रमुख सचिव जीवेश नंदन ने बताया कि पांच मेगावाट से कम क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना के डेवलपर्स को चयन के लिए अलग से आमंत्रित प्रतिस्पर्धात्मक टैरिफ आधारित बिडिंग में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेना होगा।
इस बिडिंग के फलस्वरूप सौर ऊर्जा परियोजना की बिजली दर तय की जाएगी, जिस पर 12 वर्ष के लिए विद्युत क्रय अनुबंध (पीपीए) हस्ताक्षरित किए जाएंगे।
राज्य सरकार करेगी मदद
पावर कॉर्पोरेशन की बिडिंग में प्राप्त होने वाली बिजली दर और सौर ऊर्जा के लिए निर्धारित बिजली दर के अंतर की राशि राज्य सरकार वहन करेगी।
पांच मेगावाट से कम तथा पांच मेगावाट से अधिक क्षमता की परियोजनाओं के लिए अलग-अलग बिडिंग की जाएगी। पांच मेगावाट से कम क्षमता की उन्हीं परियोजनाओं को राज्य सरकार सहायता देगी, जो व्यावहारिक होंगी।
थर्ड पार्टी को बिजली की बिक्री तथा अपने प्लांट में इस्तेमाल की जाने वाली बिजली के लिए कोई सहायता नहीं दी जाएगी। सोलर पावर की दरों का निर्धारण टेंडर के जरिये किया जाएगा।
निर्माण खर्च वहन करेगी राज्य सरकार
बुंदेलखंड और पूर्वांचल में लगाई जाने वाली सभी परियोजनाओं की ट्रांसमिशन लाइन व सब स्टेशन के निर्माण पर होने वाले खर्च भी राज्य सरकार ही वहन करेगी।
नोडल एजेंसी इन परियोजनाओं की बिडिंग से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी कराएगी। ऊर्जा विभाग के अलावा अन्य विभाग अगर अपनी भूमि/स्थान पर तथा सिंचाई विभाग की नहरों पर सोलर पावर परियोजना स्थापित करते हैं, तो ऐसी परियोजना की बिडिंग भी संबंधित विभाग के अनुरोध पर यूपीनेडा कराएगा।
इनकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार किए जाने तथा बिड प्रक्रिया प्रबंधन से जुड़ी लागत संबंधित विभाग वहन करेगा। नोडल एजेंसी की ओर से यह सुविधा प्रदान किए जाने पर इसके एवज में शुल्क लिया जा सकता है।