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मुलायम की रियायतों का फैसला अखिलेश के हाथ
लखनऊ/महेंद्र तिवारी
Updated Sun, 25 Aug 2013 10:01 AM IST
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उत्तर प्रदेश में उद्यमियों को रियायत से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के जिस निर्णय पर मायावती सरकार ने 2011 में रोक लगा दी थी, अब उस पर फैसला मुख्यमंत्री अखिलेश यादव करेंगे।
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हाईकोर्ट ने माया सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंचे उद्यमियों की याचिका का निस्तारण कर दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह मंत्रिसमूह की रिपोर्ट पाते ही इस मामले में नए सिरे से निर्णय ले।
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100 करोड़ या इससे अधिक निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के समय में दी गई रियायत को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 2011 में पूरी तरह खत्म कर दिया था।
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इस प्रोत्साहन स्कीम के आधार पर उद्यम लगाने वाले 11 में से सात उद्यमियों ने हाईकोर्ट में बसपा सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट को सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामले में मंत्रिपरिषद के पांच सदस्यों की एक उपसमिति विचार कर रही है जो जल्द इस संबंध में अपनी संस्तुतियां देने वाली है।
मंत्रिसमूह में स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, कृषि मंत्री आनंद सिंह, रेशम एवं वस्त्रोद्योग मंत्री शिव कुमार बेरिया, पंचायतीराज मंत्री बलराम यादव व कारागार मंत्री राजेंद्र चौधरी शामिल हैं।
उद्यमियों में बढ़ी निराशा
प्रकरण सपा मुखिया के कार्यकाल से जुड़ा होने की वजह से उद्यमियों को उम्मीद थी कि अखिलेश के नेतृत्व वाली सरकार ज्यादा वक्त नहीं लगाएगी। पर हालात उससे हटकर नजर आ रहे हैं।
सरकार इस मामले में एक मंत्रिसमूह की रिपोर्ट को अस्वीकार कर चुकी है और बृहद् मंत्रिसमूह कई बैठकों के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। इससे उद्यमियों में निराशा बढ़ती जा रही है।
क्या-क्या दी गई थीं रियायतें
- 100 करोड़ निवेश करने वाले प्रोजेक्ट पर 10 प्रतिशत की कैपिटल सब्सिडी।
- 200 करोड़ से अधिक के निवेश पर 20 प्रतिशत की कैपिटल सब्सिडी।
- ऐसी कंपनियों को अधिग्रहीत भूमि का केवल वास्तविक मूल्य ही अदा करना था। भूमि अधिग्रहण चार्ज, ओवरहेड चार्ज व लीज रेंट आदि से छूट दी गई थी।
- यदि कंपनी आंतरिक व वाह्य कार्य स्वयं कराती है तो मेंटेनेंस चार्ज, पेरीफेरल डवलपमेंट चार्ज व अन्य आंतरिक चार्ज से भी छूट थी।
- 200 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली कंपनियों को टैक्स फ्री लोन लौटाने का समय 15 वर्ष की जगह 17 वर्ष दिया गया था।
- 10 प्रतिशत अवस्थापना उपादान, यातायात उपादान व ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा उपलब्ध थी।