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अखिलेश-जयंत की मुलाकात : बसपा के ब्राह्मण सम्मेलन की ढूंढे़ंगे काट, बसपा की रणनीति से अन्य दलों में बढ़ी बेचैनी

Sun, 25 Jul 2021 10:28 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 25 Jul 2021 10:28 PM IST
सार

चर्चा में तय हुआ कि आगामी दिनों में विभिन्न सम्मेलन के जरिए पकड़ मजबूत की जाएगी। इसी रणनीति के तहत रालोद भाईचारा सम्मेलन के माध्यम से 27 जुलाई को मुजफ्फरनगर के खतौली से अपना अभियान शुरू करेगा।

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Akhilesh-Jayant meeting: BSP's Brahmin conference will be cut, BSP's strategy increases uneasiness among other parties
दिल्ली में चौधरी अजित सिंह को श्रद्धांजलि देते अखिलेश यादव साथ में जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बसपा के ब्राह्मण सम्मेलनों से सभी दलों में बेचैनी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव एवं रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी की रविवार को दिल्ली में हुई मुलाकात में इसकी काट ढूंढ़ने पर मंथन हुुआ। चर्चा में तय हुआ कि आगामी दिनों में विभिन्न सम्मेलन के जरिए पकड़ मजबूत की जाएगी। इसी रणनीति के तहत रालोद भाईचारा सम्मेलन के माध्यम से 27 जुलाई को मुजफ्फरनगर के खतौली से अपना अभियान शुरू करेगा।

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अखिलेश ने जयंत से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच काफी देर तक मंथन हुआ। बताया जा रहा है कि चर्चा का मुख्य केंद्र विधानसभा चुनाव ही रहा, लेकिन बसपा की ओर से शुरू किए गए ब्राह्मण सम्मेलनों का मुद्दा हावी रहा। पश्चिमी यूपी में रालोद नया समीकरण तैयार कर रहा है। वह जाट, मुस्लिम, गुर्जर, सैनी, कश्यप समाज के साथ ब्राह्मणों को जोड़ने की पूरी कोशिश में है। उधर, सपा भी इस पर फोकस कर रही है।
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पंचायत चुनाव सपा-रालोद ने मिलकर लड़ा था। माना जा रहा है कि यह गठबंधन विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा। दोनों नेताओं की मुलाकात के यही सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। इसमें सबसे बसपा के ब्राह्मण सम्मेलनों की काट तैयार करना है। इसी कड़ी में रालोद ने सम्मेलन शुरू करने की घोषणा भी कर दी है। सबसे पहले 27 जुलाई को खतौली में भाईचारा सम्मेलन की शुरुआत होगी। मुजफ्फरनगर वैसे भी रालोद के लिए चुनौती है। ऐसे में सम्मेलन की सफलता के लिए पूरी तैयारी की जा रही है। कोशिश रहेगी कि इसमें सभी वर्गों को जोड़ा जाए और ज्यादा लोगों को जुटाया जाए।
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मैनिफेस्टो कमेटी की तैयारी
रालोद ने मैनिफेस्टो कमेटी तैयार कर ली है। इसी सप्ताह इसकी घोषणा होनी है। यह कमेटी पहले लोगों से रायशुमारी करेगी उसके बाद घोषणा पत्र तैयार करेगी। योजना है कि  चुनाव से लगभग पांच छह माह पहले घोषणापत्र जारी कर दिया जाए। इस कमेटी में शिक्षक, चिकित्सक जैसे प्रबद्ध वर्ग से लोगों को शामिल किया गया है। कमेटी लोगों के बीच जाकर मुद्दों पर बात करेगी। इसके लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जाएगा।

ब्राह्मणों के उत्पीड़न की घटनाओं को मुद्दा बनाएगी सपा
बहुजन समाज पार्टी के प्रबुद्ध सम्मेलन के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी ब्राह्मणों के उत्पीड़न को सियासी हथियार बनाने का फैसला लिया है। इसके लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। यह कमेटी ब्राह्मणों के साथ होने वाली घटनाओं को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी। इतना ही नहीं विभिन्न अभियानों के जरिए उनके बीच पैठ बनाने का भी प्रयास होगा।


बसपा की ओर से शुरू किए गए प्रबुद्ध सम्मेलन के बीच समाजवादी पार्टी के ब्राह्मण नेता भी सक्रिय हो गए हैं। हालांकि पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा के नेतृत्व में भगवान परशुराम की मूर्ति स्थापना का अभियान पहले से चल रहा है लेकिन बसपा की सक्रियता के बाद सपा ने नए सिरे से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। रविवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पार्टी से जुड़े ब्राह्मण नेताओं की बैठक हुई। पांच नेताओं की कमेटी भी बनाई गई।  कमेटी में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, पूर्व मंत्री मनोज पांडेय, अभिषेक मिश्रा, सनातन पांडेय और पवन पांडेय को शामिल किया गया है। सूत्र बताते हैं कि बैठक में तय किया गया कि पार्टी की ओर से 1857 क्रांति के नायक मंगल पांडेय की जन्मभूमि बलिया से ब्राह्मण सम्मेलन की शुरुआत की जाएगी। इन सम्मेलनों के जरिए सपा शासनकाल में ब्राह्मणों के लिए किए गए कार्यों को भी गिनाया जाएगा।

 

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