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सपने दिखाकर निवेशकों को झटका दे गए अखिलेश

Sat, 10 Jan 2015 01:30 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 10 Jan 2015 01:30 AM IST
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Akhilesh is not showing attention for investment in UP.

सूबे में निवेश का माहौल बनाने के लिए लंबे-चौड़े दावों के  नतीजे आखिर क्यों नहीं नजर आते हैं? सरकार की कार्यशैली इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं है। तमाम अच्छे कदम उठाने के बावजूद ऐसे कई मौके आए जिसने निवेश के माहौल को पलीता लगाने का काम किया।

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सीएम के गुजरात के गांधीनगर में प्रवासी भारतीय दिवस समारोह में न जाकर सैफई महोत्सव को महत्व देने से यह सवाल फिर खड़ा हो गया है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सूबे में निवेश का माहौल बनाने के लिए कई बार पहल की। प्राय: हर बार शुरुआती दौर में सरकार की बड़ी गंभीरता नजर आई, मगर बाद में मुख्यमंत्री की किनाराकशी से नतीजे उम्मीद के हिसाब से नहीं आए।
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ई-यूपी के आयोजन से लेकर प्रवासी भारतीय दिवस समारोह तक कई बार ऐसी नौबत आ चुकी है। प्रदेश में ई-यूपी का आयोजन हुआ था। मुख्यमंत्री का आना पहले से तय था। निवेशक ताकते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री उनका कार्यक्रम छोड़कर चुनाव प्रचार करने चले गए थे।

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निवेश नहीं सैफई महोत्सव है जरूरी

Akhilesh is not showing attention for investment in UP.

प्रवासी भारतीय दिवस समारोह भी ऐसी ही कार्यशैली का शिकार हुआ। 26 दिसंबर 2014 से 08 जनवरी 2015 तक सैफई महोत्सव का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री लगभग सभी छोटे-बड़े कार्यक्रमों में शामिल हुए। सैफई महोत्सव के समापन के एक दिन बाद शुक्रवार को गांधीनगर के प्रवासी दिवस समारोह में यूपी सत्र का आयोजन था।

मुख्यमंत्री को पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार इसकी अध्यक्षता करनी थी, लेकिन सीएम ने गांधीनगर के स्थान पर सैफई को तवज्जो दी। उद्यमी कहते हैं कि सीएम के गांधीनगर न जाने से अच्छा संदेश नहीं गया।

पहले भी किया किनारा
हॉवर्ड से खाली हाथ लौटे: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पिछले महाकुंभ मेले के ऐतिहासिक आयोजन की उपलब्धियां बताने अमेरिका (हॉवर्ड) गए थे। उनके साथ नगर विकास मंत्री आजम खां भी थे।

आजम की तलाशी को सरकार ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया और मुख्यमंत्री उपलब्धियां साझा किए बिना ही लौट आए। सरकार ने अंतररराष्ट्रीय स्तर पर सूबे की छवि बनाने का बड़ा मौका गंवा दिया।

इन मौकों पर चूके सीएम अखिलेश

Akhilesh is not showing attention for investment in UP.

अमेरिका-इंडिया बिजनेस कांउसिल (यूएसआईबीसी) का एक बड़ा डेलीगेशन 2013 में राजधानी आया था। मुख्यमंत्री की मेहमाननवाजी ने काफी चर्चा बटोरी थी। बाद में काउंसिल ने अपने वार्षिक अधिवेशन में सीएम को आमंत्रित किया। उनका रोड शो भी कराने की बात कही, मगर इसके पहले एक कार्यक्रम में अमेरिका जाने पर संसदीय कार्यमंत्री आजम खां की तलाशी हुई तो मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम से दूरी बना ली।

ई-यूपी: सरकार ने 2013 में ‘ई-यूपी’ का आयोजन किया था। देश भर से सैकड़ों निवेशकों को यह कहकर बुलाया गया था कि इसमें मुख्यमंत्री स्वयं उपस्थित रहेंगे, पर वे नहीं पहुंचे। वे चुनाव प्रचार में चले गए थे। इस पर निवेशकों ने निराशा जताई थी।
 
इन्वेस्ट नॉर्थ: सीआईआई हर साल ‘इन्वेस्ट नॉर्थ’ का आयोजन करती है। इसमें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के  निवेशक जुटते हैं। इसमें उत्तर भारत के राज्यों के सीएम बुलाए जाते हैं। वर्ष 2012-13 में यह आयोजन गुड़गांव में और 2013-14 में दिल्ली में हुआ, लेकिन मुख्यमंत्री इनमें नहीं पहुंचे।
 
सीआईआई एआरएम: सीआईआई हर साल वार्षिक कार्यक्रमों (एआरएम) का आयोजन करती है। इसमें नौ राज्यों के सीआईआई प्रतिनिधि जुटते हैं। उद्यमियों से मुलाकात व निवेश संबंधी चर्चा के लिए यह अहम मौका होता है। इस सरकार के कार्यकाल में दो एआरएम हुई लेकिन एक में भी सीएम नहीं पहुंचे।

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