200 करोड़ के लिए भिड़ गए अखिलेश के दो मंत्री
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प्रदेश के प्राविधिक शिक्षामंत्री शिवाकांत ओझा ने मुख्यमंत्री से लघु सिंचाई मंडल इलाहाबाद में चेकडैमों के निर्माण में 200 करोड़ रुपये के घपले की शिकायत की है। उन्होंने 2013-14 व 2014-15 में बनाए गए या निर्माणाधीन सभी चेकडैमों के टेंडर, निर्माण व भुगतान की जांच की मांग की है।
चूंकि चेकडैमों का निर्माण लघु सिंचाई विभाग कराता है, लिहाजा ओझा की शिकायतों के बाद लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह सीधे निशाने पर आ गए हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ओझा की शिकायतों पर जांच का आदेश दिया है। चेकडैमों के निर्माण से जुड़ी शिकायतों की टीएसी (टेक्निकल ऑडिट सेल) से जांच होगी।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री ओझा ने कुछ दिन पहले अपने जिले प्रतापगढ़ में चेकडैमों के निर्माण में अनियमितताओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इसमें शिकायत की कि प्रतापगढ़ के संडवा चंद्रिका ब्लॉक में 22 चेकडैमों का घटिया निर्माण हो रहा है।
इसमें मैनघाट बाबू का पुरवा (जलालपुर), उड़वा (उमरी) व सहरेवा बरगद बनने के बाद बह गए। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में बनने वाले 40 चेकडैमों के निर्माण में मानक व गुणवत्ता का ध्यान न देने शिकायत की।
सीएम को भेज दी बदहाली की तस्वीरें
मोहनगंज गांव के पास बकुलाही नदी पर व जलालपुर, लीलापुरवा सहित कई चेकडैमों के बह जाने का हवाला दिया। ओझा ने अपनी शिकायतों के समर्थन में कई चेकडैमों की बर्बादी बयां करती फोटो भी सीएम को भेजी।
ओझा की सीएम से गंभीर शिकायत यह भी है कि कई चेकडैम बह गए या अधूरे रहे लेकिन भुगतान पूरा कर दिया गया। उन्होंने प्रतापगढ़ के 148 चेकडैमों के साथ-साथ लघु सिंचाई मंडल इलाहाबाद के अन्य जिलों में बने करीब 500 चेकडैमों के निर्माण में 200 करोड़ रुपये की अनियमितता का भी आरोप लगाया।
शिकायतों में वित्तीय नियमों की अनदेखी कर मनचाहे ठेकेदारों को चेकडैमों का कार्य आवंटित करने की बात भी शामिल है। मुख्यमंत्री के जांच के आदेश से मामला अचानक गरमा गया है।
सूत्रों का कहना है कि ओझा की शिकायत को मुख्यमंत्री ने बेहद गंभीरता से लिया। सीएम के निर्देश पर प्रमुख सचिव राकेश बहादुर ने ओझा के पत्र का हवाला देकर शिकायतों की जांच करवाकर कार्रवाई का आदेश कर दिया।
इसके बाद मुख्य सचिव आलोक रंजन ने प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए मंत्री के पत्र में दिए गए तथ्यों की टीएसी से जांच कराने का आदेश किया। जांच लटकाई न जाए इसके लिए मुख्य सचिव ने 15 दिन की समय सीमा भी तय कर दी।
आलोक रंजन ने दिए भुगतान रोकने के आदेश
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा की शिकायतों के मामले में प्रकरण के अंतिम निस्तारण तक भुगतान की कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया है। लघु सिंचाई खंड इलाहाबाद के एक इंजीनियर ने भुगतान पर रोक लगाए जाने की पुष्टि की है।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा कहते हैं कि चेकडैमों का निर्माण बहुत ही खराब हुआ है। कई जगह तो स्थान ही बदल दिया गया। जहां चेकडैम बने वहां के ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत प्रमुख और स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक को विश्वास में नहीं लिया गया।
ठेकेदारों ने निर्माण के नाम पर जबर्दस्त अनियमितता की। पहले क्षेत्र के प्रमुख ने मुझसे शिकायत की। बाद में जब क्षेत्र में गया तो पूरा खेल देखा। इसके बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पूरे तथ्यों की जानकारी देते हुए जांच कराने की मांग की। दोनों ही स्तर से शिकायतों की जांच पर आदेश हो गया है। जांच में सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।
वहीं लघु सिंचाई मंत्री राजकिशोर सिंह कहते हैं कि पूर्व की सरकारों में चेकडैम निर्माण में मनमानी होती रही है। मगर, मैं चाहता हूं कि चेकडैमों के निर्माण में किसी को उंगली उठाने का मौका न मिले। प्राविधिक शिक्षा मंत्री की शिकायत लोकल स्तर की है। उन्हें आशंका है कि निर्माण में कहीं गड़बड़ी तो नहीं हो रही। उसके जांच के आदेश हुए हैं। मैंने भी उनकी शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया।
बुंदेलखंड से लेकर पूरे प्रदेश में बन रहे चेकडैमों के निर्माण की जांच का निर्देश दे दिया है। जांच पर कोई उंगली न उठा सके इसलिए विभागीय जांच का आदेश न कर डीएम के जरिये जांच रिपोर्ट मांगी है। लेखपालों से डीएम सर्वे कराकर रिपोर्ट मंगाएंगे। निर्माण कार्यों में कहीं भी गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।