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Lucknow News: वायु प्रदूषण और आदतें बना रहीं बीमार, हर तीसरा बच्चा प्रभावित
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लखनऊ। वायु प्रदूषण और खराब जीवनशैली बीमारी की सबसे बड़ी वजह बन रही हैं। वायु प्रदूषण से फेफड़े समेत अन्य अंग प्रभावित हो रहे हैं। देश का हर तीसरा बच्चा इसकी चपेट में आ रहा है। खराब जीवनशैली बेहद कम उम्र में बीपी और शुगर की बीमारी दे रही है।
केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. सूर्यकांत के अनुसार वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। दिल्ली और लखनऊ जैसे शहर विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में हैं, जहां पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित मानकों से कई गुना अधिक है। हवा की यह खराब गुणवत्ता जहर के समान है।
लंग केयर फाउंडेशन के अध्ययन में पाया गया कि अधिक प्रदूषित शहरों में रहने वाले किशोरों में अस्थमा की व्यापकता 21.7 फीसदी से बढ़कर 29.4 प्रतिशत हो गई है। इससे साफ है कि हर तीन में से एक बच्चा फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी से प्रभावित है। प्रदूषित वातावरण में बच्चों में खांसी, सांस फूलना, एलर्जिक राइनाइटिस, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याएं अधिक हैं। सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) शरीर में प्रवेश कर रक्त प्रवाह के माध्यम से हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, कैंसर और तंत्रिका तंत्र संबंधी विकारों का जोखिम बढ़ाते हैं। प्रदूषित हवा शरीर की कोशिकाओं को समय से पहले बूढ़ा कर रही है।
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गर्भ में भी प्रभावित करती है दूषित हवा
प्रो. सूर्यकांत के अनुसार वायु प्रदूषण का प्रभाव जन्म से पहले शुरू हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान प्रदूषित वायु के संपर्क में आने से भ्रूण के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे कम जन्म वजन, समय से पूर्व जन्म और फेफड़ों के अधूरे विकास का खतरा बढ़ जाता है। भविष्य में श्वसन रोगों की आशंका भी बढ़ती है। लंग केयर फाउंडेशन के अध्ययन में पाया गया कि अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त बच्चों में अस्थमा का खतरा लगभग 1.8 गुना अधिक होता है।
पौधे लगाएं, स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
केजीएमयू में मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु के अनुसार पौधे लगाकर हम स्वच्छ हवा पा सकते हैं। हमें स्वस्थ जीवन शैली अपनानी चाहिए। नियमित रूप से व्यायाम करें और खानपान दुरुस्त रखें। साथ ही जंक फूड से बचें, धूम्रपान और शराब से दूर रहें, तनाव से बचें, पर्याप्त नींद लें, नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच कराएं, स्क्रीन टाइम कम करें, परिवार और मित्रों के साथ समय बिताएं।
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केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. सूर्यकांत के अनुसार वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। दिल्ली और लखनऊ जैसे शहर विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में हैं, जहां पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षित मानकों से कई गुना अधिक है। हवा की यह खराब गुणवत्ता जहर के समान है।
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लंग केयर फाउंडेशन के अध्ययन में पाया गया कि अधिक प्रदूषित शहरों में रहने वाले किशोरों में अस्थमा की व्यापकता 21.7 फीसदी से बढ़कर 29.4 प्रतिशत हो गई है। इससे साफ है कि हर तीन में से एक बच्चा फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी से प्रभावित है। प्रदूषित वातावरण में बच्चों में खांसी, सांस फूलना, एलर्जिक राइनाइटिस, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याएं अधिक हैं। सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) शरीर में प्रवेश कर रक्त प्रवाह के माध्यम से हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, कैंसर और तंत्रिका तंत्र संबंधी विकारों का जोखिम बढ़ाते हैं। प्रदूषित हवा शरीर की कोशिकाओं को समय से पहले बूढ़ा कर रही है।
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गर्भ में भी प्रभावित करती है दूषित हवा
प्रो. सूर्यकांत के अनुसार वायु प्रदूषण का प्रभाव जन्म से पहले शुरू हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान प्रदूषित वायु के संपर्क में आने से भ्रूण के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे कम जन्म वजन, समय से पूर्व जन्म और फेफड़ों के अधूरे विकास का खतरा बढ़ जाता है। भविष्य में श्वसन रोगों की आशंका भी बढ़ती है। लंग केयर फाउंडेशन के अध्ययन में पाया गया कि अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त बच्चों में अस्थमा का खतरा लगभग 1.8 गुना अधिक होता है।
पौधे लगाएं, स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
केजीएमयू में मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु के अनुसार पौधे लगाकर हम स्वच्छ हवा पा सकते हैं। हमें स्वस्थ जीवन शैली अपनानी चाहिए। नियमित रूप से व्यायाम करें और खानपान दुरुस्त रखें। साथ ही जंक फूड से बचें, धूम्रपान और शराब से दूर रहें, तनाव से बचें, पर्याप्त नींद लें, नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच कराएं, स्क्रीन टाइम कम करें, परिवार और मित्रों के साथ समय बिताएं।