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मस्जिद में निकाह करेंगे व दहेज का होगा बहिष्कार, पर्सनल लॉ बोर्ड ने शरीयत के मुताबिक जारी किया संकल्पपत्र

Thu, 01 Apr 2021 12:05 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 01 Apr 2021 12:05 PM IST
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AIPLB issued a resolution letter to prevent dowry in marriages.
- फोटो : अमर उजाला

मुस्लिम समाज में निकाह में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने और दहेज प्रथा का बहिष्कार करने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने संकल्प पत्र जारी किया। 11 बिंदुओं वाले संकल्पपत्र में मैरिज हॉल के बजाय मस्जिदों में सादगी से निकाह करने की अपील की गई है।

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इकरारनामे में सिर्फ बाहर से आने वाले मेहमानों व घरवालों के लिए ही दावत का इंतजाम किए जाने का संकल्प लेने को कहा गया है। निकाह में गलत रस्मों को खत्म करने के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड ने प्रदेश में 10 दिवसीय अभियान शुरू किया है। अभियान छह अप्रैल तक चलेगा। बोर्ड के अध्यक्ष सय्यद राबे हसनी नदवी व महासचिव मौलाना वली रहमानी के दिशा निर्देश में देश भर में इन 11 बिंदुओं को लेकर अभियान चलाया जाएगा।
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दहेज मांगने वालों की निंदा और विरोध का आह्वान
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड निकाह में गलत रस्मों को खत्म करने के लिए देशव्यापी अभियान के तहत सोशल मीडिया का सहारा ले रहा है। अभियान में लोगों को समझाया जा रहा है कि निकाह को मुश्किल न बनाए, शादियों में गैर जरूरी रस्म ओ रिवाज से परहेज करें। दहेज की मांग करने वालों की निंदा करते हुए उनका विरोध भी किया जाए।
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बोर्ड ने अपनी इस्लाहे मआशरा कमेटी को निकाह का इकरारनामा तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। यह कमेटी पहले से ही महंगी शादियों, दहेज, जुआ, शराब जैसी बुराइयों से मुस्लिम समाज को दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है।

इस्लाहे मुआशरा कमेटी के इकरारनामे के 11 संकल्प

हम सब इक़रार करते हैं कि...
(1) निकाह को सादा और आसान बनाएंगे। बेकार रस्म रिवाजों, खासतौर पर दहेज की मांग, हल्दी, रतजगा से परहेज करेंगे।
(2) बरात की रस्म को खत्मकर मस्जिद में सादगी के साथ निकाह का तरीका।
(3) निकाह की दावत की व्यवस्था सिर्फ शहर के बाहर के मेहमानों और घर के लोगों के लिए करेंगे।
(4) निकाह में शिरकत करेंगे लेकिन निकाह की तकरीब वाली खाने की दावत से बचेंगे।

(5) वलीमा की दावत सादगी के साथ, दौलत की नुमाइश के बग़ैर गरीबों और जरूरतमंदों का ख्याल रखते हुए करेंगे।
(6) दावत-ए-वलीमा/निकाह की जिस महफिल में सुन्नत व शरीयत का ख्याल रखा जाएगा उसमें शामिल होंगे। इसके खिलाफ अमल पर भरपूर और साफ अंदाज में नापसन्दगी करेंगे।

(7) निकाह या दावत-ए-वलीमा की महफिल में आतिशबाजी, गाना बजाना, वीडियोग्राफी और खेल तमाशे से बचते हुए निकाह के लिए क़ीमती शामियाना और कीमती स्टेज का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
(8) नौजवान अपने निकाह को सादगी के साथ कम खर्च में अंजाम देंगे। इसके खिलाफ किसी अंदरूनी दबाव को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।

(9) निकाह के तय वक्त की सख्ती से पाबंदी करेंगे।
(10) निकाह के बाद सुन्नत व शरीयत के मुताबिक खुशगवार शादीशुदा जिंदगी गुजारेंगे और अपनी बीवी के साथ बेहतर सुलूक करेंगे।
(11) औलाद होने पर उसकी बेहतरीन तालीम व तरबियत की व्यवस्था करेंगे और सुन्नत व शरीयत का पाबन्द बनाने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे।

इन उलमा ने की संकल्प लेने की अपील

(1)  मौलाना सय्यद मुहम्मद राबेअ  हसनी नदवी
(अध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड)
(2) मौलाना सय्यद मुहम्मद वली रहमानी
(महासचिव ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड)
(3) मौलाना सय्यद अरशद मदनी
(अध्यक्ष जमीयत उलेमा हिन्द)
(4) हजरत मौलाना फ़ख़रुद्दीन जीलानी
(सज्जादानशीन किछौछा शरीफ़)
(5) मौलाना असग़र अली इमाम मेहदी सलफ़ी
(जमीयत अहले हदीस हिन्द)
(6) सआदतउल्लाह हुसैनी
(अमीर जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द)
(7) मौलाना कल्बे जव्वाद नक़वी
(महासचिव मजलिस उलेमा-ए-हिन्द इमाम-ए-जुमा लखनऊ)
(8) मौलाना उबैदुल्लाह ख़ान आजमी
(सदस्य ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड)
(9) अल्लामा निसार हुसैन आग़ा
(अध्यक्ष अखिल भारतीय मजलिस शिया उलमा व जाकिरिन)

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