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Lucknow News: अब दांत, हड्डियों के एक्सरे से उम्र का पता लगाएगा एआई
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लखनऊ। दांत और हड्डियों के एक्सरे से किसी व्यक्ति की उम्र का पता लगाना अब आसान हो सकता है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित तकनीक का खाका तैयार करने वाली केजीएमयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की संयुक्त टीम को राष्ट्रीय स्तर पर एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला है।
मोहाली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह सम्मान दिया।
शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक का खाका तैयार किया है, जो दांत और हड्डियों के एक्सरे को देखकर व्यक्ति की उम्र का अनुमान लगाने में मदद करेगी। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से एक्सरे में दिखाई देने वाले संकेतों का अध्ययन किया जाएगा। तकनीक के पूरी तरह तैयार होने के बाद बिना किसी जटिल जांच के बेहद कम समय में व्यक्ति की उम्र का अनुमान लगाया जा सकेगा।
भविष्य में उपयोगी साबित हो सकती है तकनीक
यह तकनीक भविष्य में पुलिस जांच, पहचान से जुड़े मामलों और कानूनी मामलों में उपयोगी हो सकती है। कई बार ऐसे मामलों में व्यक्ति की सही उम्र का पता लगाना जरूरी होता है, जहां जन्म से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते या उनकी सत्यता पर सवाल होता है। ऐसे मामलों में दांत और हड्डियों के एक्सरे का अध्ययन कर उम्र का वैज्ञानिक अनुमान लगाने में तकनीक मददगार होगी। हालांकि, फिलहाल इसका खाका तैयार किया गया है। पूरी तकनीक विकसित होने और जांच के बाद ही इसका व्यापक इस्तेमाल संभव होगा।
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केजीएमयू और जामिया के विशेषज्ञ शामिल
पुरस्कार पाने वाली टीम में डॉ. विक्रम खन्ना, केजीएमयू के ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. अनुराग त्रिपाठी और डॉ. ऐमन खान थे। इनके साथ ही केजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनित परिहार तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कंप्यूटर विज्ञान विभाग की कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशेषज्ञ डॉ. सुरैया जबीन भी शामिल रहे।
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मोहाली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह सम्मान दिया।
शोधकर्ताओं ने ऐसी तकनीक का खाका तैयार किया है, जो दांत और हड्डियों के एक्सरे को देखकर व्यक्ति की उम्र का अनुमान लगाने में मदद करेगी। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से एक्सरे में दिखाई देने वाले संकेतों का अध्ययन किया जाएगा। तकनीक के पूरी तरह तैयार होने के बाद बिना किसी जटिल जांच के बेहद कम समय में व्यक्ति की उम्र का अनुमान लगाया जा सकेगा।
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भविष्य में उपयोगी साबित हो सकती है तकनीक
यह तकनीक भविष्य में पुलिस जांच, पहचान से जुड़े मामलों और कानूनी मामलों में उपयोगी हो सकती है। कई बार ऐसे मामलों में व्यक्ति की सही उम्र का पता लगाना जरूरी होता है, जहां जन्म से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं होते या उनकी सत्यता पर सवाल होता है। ऐसे मामलों में दांत और हड्डियों के एक्सरे का अध्ययन कर उम्र का वैज्ञानिक अनुमान लगाने में तकनीक मददगार होगी। हालांकि, फिलहाल इसका खाका तैयार किया गया है। पूरी तकनीक विकसित होने और जांच के बाद ही इसका व्यापक इस्तेमाल संभव होगा।
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केजीएमयू और जामिया के विशेषज्ञ शामिल
पुरस्कार पाने वाली टीम में डॉ. विक्रम खन्ना, केजीएमयू के ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. अनुराग त्रिपाठी और डॉ. ऐमन खान थे। इनके साथ ही केजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनित परिहार तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कंप्यूटर विज्ञान विभाग की कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशेषज्ञ डॉ. सुरैया जबीन भी शामिल रहे।