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Lucknow News: नए सिरे से डॉक्टर की भूमिका तय करेगा एआई

Sat, 01 Feb 2025 01:53 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2025 01:53 AM IST
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AI will decide the role of doctor afresh

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लखनऊ। एसजीपीजीआई में पैथोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज जैन के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आने के बाद डॉक्टर की भूमिका खत्म नहीं होगी, बल्कि नए सिरे से तय होगी। वे शुक्रवार को केजीएमयू के सेल्बी हॉल में आयोजित पैथालॉजी विभाग के 113वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे।

पैथालॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. उमाशंकर सिंह ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए विभाग ने इसे पाठ्यक्रम में भी शामिल किया है। हालांकि, अब भी चर्चा का विषय है कि यह किस तरह से इस्तेमाल में आने वाला है।
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एआई की वजह से डिजिटल पैथोलॉजी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। रिपोर्ट तैयार करने में गड़बड़ियों पर भी लगाम कसी जा सकती है। मौके पर केजीएमयू में 1981 बैच के डॉ. पीके गुप्ता ने पूर्व छात्र परिषद को 51 हजार रुपये का चेक दिया। एल्यूमिनी एसोसिएशन के प्रो. सुधीर सिंह ने इसे स्वीकार किया।
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शुगर की जांच के लिए नमूने देने में बरतें सावधानी

पैथोलॉजी विभाग के डॉ. वाहिद अली ने कहा, शुगर की जांच कराते समय बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। भोजन और नमूना देने के बीच का अंतर आठ से 10 घंटे होना चाहिए। व्यक्ति शुगर की दवा खा रहा है तो उसे लेकर ही सैंपल देना चाहिए। 70 से 80 प्रतिशत लोग शर्बत, चाय, केला आदि खाकर जांच करा लेते हैं, जो गलत है। फास्टिंग के दौरान पानी ही पीना चाहिए। इसी तरह खून का नमूना लेने व उसे लैब तक लाने में सावधानी बरतनी चाहिए। इसके ज्यादा हिलने से भी जांच में अंतर आ सकता है।




लेड के प्रभाव से एनीमिया का खतरा



बंगलूरू में फाउंडेशन फॉर क्वालिटी इंडिया के निदेशक डॉ. टी वेंकटेश ने कहा, लेड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। खिलौने, पेंसिल आदि में लेड वाले रंगों का इस्तेमाल होता है। इससे व्यक्ति एनीमिया की चपेट में आ सकता है। शरीर में लेड की मात्रा अधिक होने से बच्चों के दिमाग का विकास प्रभावित होने के साथ जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है।
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