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आगरा बस हादसा: रोते हुए दादा को समझाती रही पोती, पापा शाम तक आ जाएंगे

Tue, 09 Jul 2019 10:40 AM IST
Amulya Rastogi काविश अजीज लेनिन, अमर उजाला, लखनऊ
काविश अजीज लेनिन, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 09 Jul 2019 10:40 AM IST
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agra bus accident : daughter swipe grandfathers tears says dad will be back in evening
मृतक आफताब की फोटो दिखाते पिता - फोटो : amar ujala
यमुना एक्सप्रेस वे पर बस दुर्घटना में लखनऊ के सात घरों के चिराग बुझ गए, हर घर मे सन्नाटा पसरा हुआ है। इंतज़ार था तो सिर्फ खमोश बेज़ुबान जिस्म का जिसकी रूह अब उसका साथ छोड़ चुकी थी। 
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इंदिरानगर के ही आफताब अहमद ने अपने 45 साल के बेटे इंतखाब को यमुना एक्सप्रेस वे हादसे में हमेशा के लिए खो दिया। घर मे तीन बुज़ुर्ग सफेद कुर्ते पाजामे में बैठे थे। बेटे इंतखाब की तस्वीर को निहारते हुए आफताब कुछ कहने ही जा रहे थे कि इंतखाब की 10 साल की बेटी वहां आ पहुंची। आफताब ने इशारा किया कि बच्ची को कुछ पता नहीं है इसलिए अभी सवाल न करें।
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बच्ची का नाम इस्मा है, बातों बातों में बताया कि पापा आज सुबह फीस जमा करने दिल्ली गए थे। शायद उन्हे चोट आ गयी है इसलिए वापस आ रहे हैं। इतने में दादा फफक पड़े और बच्ची ने समझाया, दादा रो नहीं, पापा को चोट ही तो लगी है, शाम तक आ जाएंगे", फिर मां बाप की फैमिली फ़ोटो दिखाया और चली गयी।
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बच्ची के जाने में बाद आफ़ताब ने बोलना शुरू किया । बताया कि वह मेरा बड़ा बेटा था। दिल्ली में एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता था, उसकी बीवी और एक बेटी है। आज बेटी की फीस जमा की थी और दिल्ली के लिए रवाना हुआ था। सुबह टीवी पर खबर देखी तो उसे फ़ोन करना शुरू किया, लेकिन फोन का कोई जवाब नहीं आया। बार-बार फोन मिलाता रहा लेकिन नतीजा सिफ़र रहा। दोपहर तक मरने वालों की एक लिस्ट आ गई। इसमें मेरे बेटे का भी नाम शामिल था, इतना कहते कहते वो रो पड़े। कहा कि 10.30 बजे तक उसकी बॉडी आएगी। 

यमुना एक्सप्रेस वे हादसे में इंदिरानगर के रहने वाले 29 साल के आकाश श्रीवास्तव के घर में बूढ़े पिता बेटे का इंतजार करते ही रह गए। आकाश के चाचा शशिकांत श्रीवास्तव लॉन में कुछ लोगों के साथ मायूस बैठे थे। फिर धीरे उन्होंने भतीजे आकाश के बारे में बताना शुरू किया। कहा कि आकाश हमारे परिवार का सबसे बड़ा बेटा था, उसकी शादी के लिए लड़की ढूंढ रहे थे। बहुत हंसमुख था, खुश रहता था, उसके कुछ दोस्त भी साथ में सफर कर रहे थे। उनमें से किसी एक ने फोन करके आकाश के बारे में बताया। ये कहते ही उनका गला भर आया।
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