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Azamgarh: आजमगढ़ उपचुनाव में मिली हार से धर्मेंद्र यादव के भविष्य पर उठे सवाल, शीर्ष नेतृत्व के दबाव में उतरे थे मैदान में
Tue, 28 Jun 2022 05:43 PM IST
ishwar ashish
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 28 Jun 2022 05:43 PM IST
सार
सपा के धर्मेंद्र यादव शीर्ष नेतृत्व के दबाव में आजमगढ़ के उपचुनाव में बेमन से उतरे थे। हार के बाद उनके सियासी कॅरिअर पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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सपा नेता धर्मेंद्र यादव
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
लोकसभा उपचुनाव में सपा को आजमगढ़ में मिली हार ने न सिर्फ पार्टी का रुतबा कम किया है, बल्कि धर्मेंद्र यादव के सियासी भविष्य को भी किसी न किसी रूप में प्रभावित किया है। बेमन से नामांकन के अंतिम दिन आजमगढ़ पहुंचे धर्मेंद्र उम्मीदों का गोता लगाते-लगाते गच्चा खा गए। उन्हें जिस विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक वोट मिलने की उम्मीद थी, वहीं सबसे कम वोट मिला। अब धर्मेंद्र को यह तय करना होगा कि उनकी सियासी कर्मभूमि बदायूं रहेगी या आजमगढ़।
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सपा में पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की पकड़ युवाओं और शैक्षिक पृष्ठभूमि वालों में ज्यादा मानी जाती है। इसकी बड़ी वजह उनकी इलाहाबाद विवि में हुई पढ़ाई है। पूर्वांचल के युवाओं में उनकी पकड़ का नतीजा रहा कि आजमगढ़ के आसपास के जिलों के युवा उनके चुनाव प्रचार में उतरे।
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आजमगढ़ सदर से उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें यहां से सबसे ज्यादा वोट मिलेंगे। क्योंकि यहां के विधायक दुर्गा प्रसाद यादव नौंवी बार जीते हैं। यहां करीब 75 हजार यादव और 60 हजार मुस्लिम वोटर हैं। इसके बाद भी यहां सपा भाजपा से छह हजार से ज्यादा वोट से पीछे रही। सगड़ी और मेहनगर में भी पीछे रही। हालांकि मुबारकपुर और गोपालपुर में सपा को भाजपा से बढ़त मिली।
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धर्मेंद्र की सियासी कर्मभूमि पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक धर्मेंद्र ने आजमगढ़ से चुनाव लड़ने से मना किया था। लेकिन अंतिम दिन वे शीर्ष नेतृत्व के दबाव में नामांकन करने पहुंचे। अहम बात यह है कि ब्लॉक प्रमुख से सियासी भविष्य की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र वर्ष 2004 में मैनपुरी और वर्ष 2009 और 2014 में बदायूं से लोकसभा पहुंचे। वर्ष 2019 में वे बदायूं में भाजपा की संघमित्रा से चुनाव हार गए।
सांसद संघमित्रा के पिता स्वामी प्रसाद मौर्य अब सपा एमएलसी हैं। ऐसे में धर्मेंद्र के सियासी कॅरिअर को लेकर तरह- तरह की चर्चा है। वे वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बदायूं से मैदान में उतरेंगे या किसी अन्य क्षेत्र से, यह बड़ा सवाल है।
आजमगढ़ उपचुनाव में जाने के बाद उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि यहां से जीतने के बाद वर्ष 2024 में उन्हें दोबारा मौका मिलना तय है, लेकिन इस हार से समीकरण बदल गए हैं। अब धर्मेंद्र के लिए लोकसभा की कौन सी सीट तय होगी, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।