आर्म्स एक्ट में संशोधन लागू होने के बाद बढ़ेगा सजा का प्रावधान, देखें क्या होंगे नए नियम
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अवैध असलहे बनाने, बेचने या रखने के आरोपियों को अब सात साल की जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा होगी। वहीं, हर्ष फायरिंग में कई बार निर्दोष की जान तक चली जाती है और कई पीड़ित आजीवन दिव्यांगता का दंश झेलते हैं। इसे देखते हुए हर्ष फायरिंग के आरोपी का शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जाने के साथ ही उस पर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा व दो साल तक जेल की सजा भुगतनी होगी।
गृह मंत्रालय की ओर से आर्म्स एक्ट 1959 में संशोधन के लिए संसद में प्रस्तुत होने वाले बिल में ये प्रावधान किए गए हैं। बिल पर सभी राज्यों की राय जानने के बाद इसे संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें शस्त्रों की ऑनलाइन ट्रैकिंग को अनिवार्यता के साथ लागू करने का भी प्रावधान किया गया है। इससे हथियार बनाने वालों से लेकर बेचने वालों तक की पहचान आसानी से हो सकेगी।
नए नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर एक व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ एक लाइसेंसी शस्त्र ही रख सकेगा। जिनके पास एक से अधिक असलहे और लाइसेंस हैं, उन्हें बाकी लाइसेंस व शस्त्र जमा कराने होंगे। शस्त्र जमा कराने के 90 दिन में लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई तय होगी।
आर्म्स एक्ट में संशोधन के लिए सार्वजनिक ड्राफ्ट पर प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन से भी सुझाव मांगे हैं। शस्त्र अनुभाग प्रभारी व एडीएम सिटी पश्चिम संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि प्रस्तावित संशोधन में शस्त्र लाइसेंस की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने का प्रावधान भी शामिल है। वहीं, सभी लाइसेंसधारियों के लिए सरकार की ओर से प्रमाणित किसी राइफल क्लब का सदस्य होना भी अनिवार्य होगा।
अभी है यह प्रावधान
सीओ क्राइम दीपक कुमार सिंह के मुताबिक हर्ष फायरिंग के मामले में अभी लाइसेंसी असलहा होने पर 3/30 आर्म्स एक्ट और अवैध असलहा होने पर 3/25 आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज होता है। लाइसेंसी असलहे से फायरिंग करने वाले को छह महीने और अवैध असलहे से फायरिंग करने वाले को एक साल की सजा का प्रावधान है।
यूपी में सबसे अधिक लाइसेंसी असलहे
पूरे देश में करीब 35 लाख लाइसेंसी शस्त्र हैं। इनमें सर्वाधिक 13 लाख लाइसेंसी असलहे अकेले उत्तर प्रदेश में हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में 3.7 लाख और पंजाब में 3.6 लाख लाइसेंसी हथियार हैं।