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मासूम की मौत के चार साल बाद अफसर-इंजीनियरों पर दर्ज हुआ केस, ये है पूरा मामला

Thu, 10 Jan 2019 12:50 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 10 Jan 2019 12:50 PM IST
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after four years case filed against officer and engineers in the  death of a  child
जांच में सामने आई जल निगम व नगर निगम की लापरवाही (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

लखनऊ हसनगंज के रूपपुर खदरा में चार साल पहले पानी से भरे गड्ढे में डूबकर आठ वर्षीय सौम्य की मौत के मामले में जल निगम और नगर निगम के तत्कालीन अफसरों-इंजीनियरों व ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज कर लिया गया। प्रभारी निरीक्षक अंबर सिंह ने बताया कि शासन के आदेश पर मामले की जांच सीबीसीआईडी की अपराध शाखा कर रही थी।

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जांच के बाद सीबीसीआईडी के उपाधीक्षक रविंद्र नाथ यादव ने छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि रूपपुर खदरा के आजानगर निवासी संजू बाल्मीकि के बेटे सोमिया उर्फ सौम्य की मौत चार जून 2014 की सुबह हुई थी।
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वह अपने तीन दोस्तों के साथ खेल रहा था तभी पैर फिसलने से वह मिट्टी खनन के लिए अवैध रूप से खोदे गए गहरे गड्ढे में गिर पड़ा था। गड्ढा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पटाई के लिए मिट्टी खोदने से हुआ था। आक्रोशित लोगों ने जल निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की थी।
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सौम्य की मां सन्नो ने जल निगम के अधिकारियों की लापरवाही से मौत का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने पुलिस को प्रार्थनापत्र दिया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सन्नो की तरफ से चिनहट निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अशोक शंकरम ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लिखित शिकायत की जिसके बाद शासन ने सीबीसीआईडी को जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए।

इन पर कसा शिकंजा

सीबीसीआईडी के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. कृष्ण गोपाल ने उक्त प्रकरण की जांच की, जिसमें जल निगम के तत्कालीन परियोजना प्रबंधक डीके गुप्ता, परियोजना अभियंता धर्मेंद्र, सहायक परियोजना अभियंता पीएस वर्मा, मेसर्स अंगराज के ठेकेदार अंगेश सिंह, तत्कालीन जिला खनन अधिकारी और नगर निगम के तत्कालीन नगर अभियंता को दोषी पाया गया। सभी के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि उक्त प्रकरण की विवेचना सीबीसीआईडी ही करेगी। डीके गुप्ता अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 

खनन विभाग से अनुमति लिए बगैर खोदा गया था गड्ढा
सीबीसीआईडी जांच में खुलासा हुआ कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पटाई के लिए जल निगम के अधिकारियों और प्लांट का निर्माण कार्य करा रही ठेकेदार कंपनी के लोगों ने करीब 15 मीटर का गड्ढा खोदा था। इसकी अनुमति जल निगम ने खनन विभाग से नहीं ली थी। खनन विभाग और नगर निगम ने भी इसकी ओर ध्यान नहीं दिया।
 

ठेकेदार ने मामला दबाने के लिए दिए थे एक लाख रुपये

प्लांट का काम मेसर्स अंगराज सिविल प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कर रही थी। हादसे में मासूम सौम्य की मौत के बाद ठेकेदार कंपनी ने मामला दबाने के लिए पीड़ित परिवारीजनों को एक लाख रुपये दिए थे। विवेचक का मानना है कि यह खुद में उनके द्वारा किए गए अपराध को प्रमाणित करता है।

गड्ढे में डूबे थे चार बच्चे, तीन की बचा ली गई थी जान
मौत के गड्ढे में सौम्य के साथ तीन और बच्चे 13 साल का सलमान, 10 वर्षीय विनय और 10 साल का बल्ला भी डूबे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि इलाके के मो. लतीफ उर्फ मुन्ना व उसके चचेरे भाई अंसार ने गड्ढे में छलांग लगा दी और चारों को बाहर निकाल लाए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने सौम्य को मृत घोषित कर दिया।
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