उत्तर प्रदेश : डायलिसिस कराने वाले मरीज हुए एचआईवी पॉजीटिव
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सूत्रों की मानें तो यहां एक डायलाइजर से 12 से 15 बार मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। जबकि अधिकतम पांच बार ही की जानी चाहिए। स्पेशल डायलाइजर से भी अधिकतम 10 बार ही डायलिसिस की जा सकती है। इतना ही नहीं एक बार डायलिसिस होने के बाद उसे विसंक्रमित करके रखना होता है। जिस डायलाइजर पर एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की डायलिसिस होती है उसे अलग ही रखा जाता है। यहां कुल 17 मशीनें हैं। इनमें से तीन मशीनें गंभीर बीमारियों के संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए हैं। चार मशीनें बंद पड़ी हैं। ऐसे में यहां औसतन 30 से 35 मरीजों की ही डायलिसिस हो पाती है।
लापरवाही पहले भी हुई
फेंकने पड़े थे 13 डायलाइजर, तीन दिन बंद रही थी यूनिट
केजीएमयू में जुलाई 2018 में जिस मशीन पर संक्रमण रहित मरीजों की डायलिसिस होती थी, उसपर संक्रमित मरीज की डायलिसिस कर दी गई थी। संयोग से एक कर्मचारी ने संबंधित मरीज को पहचान लिया था। इसके बाद 13 डायलाइजर फेंकने पड़े थे और तीन दिन तक यूनिट बंद करनी पड़ी थी। इस मामले में कंपनी के एक संविदा कर्मचारी को हटा दिया गया था।बलरामपुर अस्पताल में हेपेटाइटिस ‘बी’ की चपेट में आए थे मरीज
बलरामपुर अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर चल रही डायलिसिस यूनिट में पिछले साल 30 से अधिक मरीज हेपेटाइटिस बी संक्रमित हो गए थे। डायलिसिस कराने से पहले वे हेपेटाइटिस से ग्रसित नहीं थे।क्या कहते हैं जिम्मेदार
एचआईवी निगेटिव मरीज का कुछ दिन बाद पॉजिटिव होना गंभीर बात है। मामले की जांच कराई जाएगी। हालांकि पॉजिटिव होने के पीछे कई कारण होते हैं। खून चढ़वाने, सूई लगवाते वक्त लापरवाही आदि भी इसकी वजह हो सकती है। जो महिला पॉजिटिव हुई हैं, उनके बारे में जानकारी की जा रही है। डायलाइजर के रखरखाव और विसंक्रमित करने के तरीकेकी भी जांच कराई जाएगी।
- प्रो. एसएन शंखवार, प्रभारी डायलिसिस यूनिट