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पुनर्वास यूनिवर्सिटीः पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए बिना ही पा गए दाखिला, पकड़ी गई गड़बड़ी
Mon, 19 Oct 2020 01:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ
अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2020 01:27 AM IST
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पुनर्वास विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में पूर्व में हुए पीएचडी प्रवेश में गड़बड़ी सामने आने लगी है। लगातार हो रही डीआरसी व आरडीसी के गठन व बैठक में यह सामने आया है कि कई लोगों ने बिना प्रवेश परीक्षा के ही पीएचडी में प्रवेश ले लिया था। जब उनके रिकार्ड मांगे गए तो उनके इनरोलमेंट नंबर तक का रिकॉर्ड नहीं मिला है। इस पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।
विवि में पीएचडी का मामला काफी दिनों से विवादों में चल रहा है। पूर्व कुलपति प्रो. निशीथ राय को हटाए जाने के मामले में एक आरोप यह भी था। वर्तमान कुलपति प्रो. राणा कृष्ण पाल सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद पीएचडी को बढ़ावा देने और इसकी प्रक्रिया को पटरी पर लाने की बात कही थी।
इस दिशा में काम भी शुरू किया। पिछले दिनों जिन विभागों में डीआरसी नहीं थी, उसका गठन किया गया और बैठकें हुईं। इसी क्रम में आरडीसी की भी पहली बैठक हुई। लंबित मामले क्लियर हुए तो विवि के 12 साल के इतिहास में पहली पीएचडी भी पूरी हुई। लेकिन इसके साथ ही इसकी कमियां भी सामने आने लगी हैं।
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विवि में पीएचडी का मामला काफी दिनों से विवादों में चल रहा है। पूर्व कुलपति प्रो. निशीथ राय को हटाए जाने के मामले में एक आरोप यह भी था। वर्तमान कुलपति प्रो. राणा कृष्ण पाल सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद पीएचडी को बढ़ावा देने और इसकी प्रक्रिया को पटरी पर लाने की बात कही थी।
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इस दिशा में काम भी शुरू किया। पिछले दिनों जिन विभागों में डीआरसी नहीं थी, उसका गठन किया गया और बैठकें हुईं। इसी क्रम में आरडीसी की भी पहली बैठक हुई। लंबित मामले क्लियर हुए तो विवि के 12 साल के इतिहास में पहली पीएचडी भी पूरी हुई। लेकिन इसके साथ ही इसकी कमियां भी सामने आने लगी हैं।
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परीक्षा विभाग से मांगा गया कुछ का डेटा
हाल में हुई आरडीसी की बैठक की रिपोर्ट के अनुसार एक विभाग में कुछ विद्यार्थी ऐसे मिले जिन्होंने बिना प्रवेश परीक्षा पास किए ही प्रवेश लिया था। उनका इनरोलमेंट नंबर आदि नहीं मिला। उन्होंने विवि द्वारा दिए गए प्रारूप पर शपथ पत्र भी नहीं दिया। इसमें से कुछ का पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति की गई तो कुछ का डेटा परीक्षा विभाग से मांगा गया है।
इसी तरह अन्य विभाग में जो कमियां थीं उनको दूर करने को कहा गया है। इतना ही नहीं इन बैठकों में यह भी संज्ञान में आया कि पीएचडी पर्यवेक्षक भी नियमानुसार नहीं बने हैं। रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया जो गड़बड़ी मिली उसके आधार पर डीआरसी की संस्तुति को आरडीसी ने माना है।
इसमें कई अभ्यर्थियों के पंजीकरण निरस्त किए गए हैं। इसे आगे एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा। अभी कुछ ही विभागों में डीआरसी की बैठक हुई है। अन्य जगह भी इसके पूरे हो जाने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। विवि ने बिना पीएचडी वाले शिक्षकों को गाइड न बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति सामान्य होने के साथ ही अन्य प्रवेश पूरे होने पर नए पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसी तरह अन्य विभाग में जो कमियां थीं उनको दूर करने को कहा गया है। इतना ही नहीं इन बैठकों में यह भी संज्ञान में आया कि पीएचडी पर्यवेक्षक भी नियमानुसार नहीं बने हैं। रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया जो गड़बड़ी मिली उसके आधार पर डीआरसी की संस्तुति को आरडीसी ने माना है।
इसमें कई अभ्यर्थियों के पंजीकरण निरस्त किए गए हैं। इसे आगे एकेडमिक काउंसिल में रखा जाएगा। अभी कुछ ही विभागों में डीआरसी की बैठक हुई है। अन्य जगह भी इसके पूरे हो जाने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। विवि ने बिना पीएचडी वाले शिक्षकों को गाइड न बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति सामान्य होने के साथ ही अन्य प्रवेश पूरे होने पर नए पीएचडी प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी।