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कर्मचारियों को बढ़ा डीए देने के लिए शासन ने चुनाव आयोग से मांगी अनुमति
Mon, 18 Mar 2019 11:53 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Mon, 18 Mar 2019 11:53 AM IST
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शासन ने राज्य कर्मचारियों व शिक्षकों को जनवरी से बढ़े महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान की अनुमति का प्रस्ताव केंद्रीय निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। पूर्व में भी आयोग वचनबद्ध देयों के भुगतान की सहमति देता रहा है। इससे प्रस्ताव को जल्दी ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
दरअसल, शासन के अफसरों ने अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के डीए भुगतान का आदेश चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले ही कर दिया था। लेकिन शिक्षकों व कर्मचारियों का प्रस्ताव दबा दिया था। इससे कर्मचारी नाराज थे। ‘अमर उजाला’ ने अफसरों की इस कार्यशैली का खुलासा किया था जिसका संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वित्त विभाग के अफसरों को तलब कर नाराजगी जताई थी।
इसके तत्काल बाद प्रदेश के 18 लाख कर्मचारियों और शिक्षकों को जनवरी से तीन फीसदी (9 से 12 फीसदी करने) बढ़े महंगाई भत्ते के भुगतान के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। फिर यह प्रस्ताव मुख्य सचिव समिति को भेजा गया था। यही समिति देखती है कि संबंधित प्रस्ताव आचार संहिता से आच्छादित है या नहीं।
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आचार संहिता के दायरे में न आने वाले प्रस्तावों को समिति अपने स्तर से ही कार्यवाही का आदेश दे सकती है। समिति यदि किसी प्रस्ताव को चाहे आयोग को अनुमति के लिए भेज सकती है। आयोग उस पर अंतिम निर्णय लेता है।
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दरअसल, शासन के अफसरों ने अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के डीए भुगतान का आदेश चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले ही कर दिया था। लेकिन शिक्षकों व कर्मचारियों का प्रस्ताव दबा दिया था। इससे कर्मचारी नाराज थे। ‘अमर उजाला’ ने अफसरों की इस कार्यशैली का खुलासा किया था जिसका संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वित्त विभाग के अफसरों को तलब कर नाराजगी जताई थी।
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इसके तत्काल बाद प्रदेश के 18 लाख कर्मचारियों और शिक्षकों को जनवरी से तीन फीसदी (9 से 12 फीसदी करने) बढ़े महंगाई भत्ते के भुगतान के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। फिर यह प्रस्ताव मुख्य सचिव समिति को भेजा गया था। यही समिति देखती है कि संबंधित प्रस्ताव आचार संहिता से आच्छादित है या नहीं।
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आचार संहिता के दायरे में न आने वाले प्रस्तावों को समिति अपने स्तर से ही कार्यवाही का आदेश दे सकती है। समिति यदि किसी प्रस्ताव को चाहे आयोग को अनुमति के लिए भेज सकती है। आयोग उस पर अंतिम निर्णय लेता है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय की अध्यक्षता वाली समिति की रविवार को हुई बैठक में समिति ने डीए भुगतान संबंधी प्रस्ताव का परीक्षण कर अपनी संस्तुति केंद्रीय चुनाव आयोग को भेज दी है। समिति ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान डीए भुगतान के लिए प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर आयोग की सहमति का जिक्र करते हुए प्रकरण को आचार संहिता के दायरे से बाहर का बताया है और भुगतान की अनुमति की मांग की है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक-दो दिन में आयोग की सहमति मिल जाने की उम्मीद है। बढ़े डीए का भुगतान वचनबद्ध देयों में शामिल हैं और नियमित तौर पर किया जाने वाला कार्य है। ऐसे में इसकी मंजूरी में किसी तरह की अड़चन की संभावना नहीं है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक-दो दिन में आयोग की सहमति मिल जाने की उम्मीद है। बढ़े डीए का भुगतान वचनबद्ध देयों में शामिल हैं और नियमित तौर पर किया जाने वाला कार्य है। ऐसे में इसकी मंजूरी में किसी तरह की अड़चन की संभावना नहीं है।
2014 के चुनाव में 100 प्रतिशत डीए भुगतान को आयोग ने दी थी अनुमति
2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सपा शासनकाल में भी इसी तरह की नौबत आई थी। उस समय केंद्र सरकार ने 10 फीसदी डीए बढ़ाने का फैसला किया था। इससे कर्मचारियों का डीए 90 से बढ़कर 100 फीसदी हो गया था।
तत्कालीन सपा सरकार ने चुनाव आचार संहिता के बीच डीए के नकद भुगतान के लिए 10 अप्रैल को केंद्रीय निर्वाचन आयोग को अनुमति का प्रस्ताव भेजा था। आयोग ने 16 अप्रैल को भुगतान की अनुमति दे दी थी। 17 अप्रैल को वित्त विभाग ने नकद डीए भुगतान का आदेश जारी कर दिया था।
तत्कालीन सपा सरकार ने चुनाव आचार संहिता के बीच डीए के नकद भुगतान के लिए 10 अप्रैल को केंद्रीय निर्वाचन आयोग को अनुमति का प्रस्ताव भेजा था। आयोग ने 16 अप्रैल को भुगतान की अनुमति दे दी थी। 17 अप्रैल को वित्त विभाग ने नकद डीए भुगतान का आदेश जारी कर दिया था।