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और तीन दिन की छुट्टी पर एडीजी अरुण कुमार
अंकुर तिवारी/लखनऊ
Updated Thu, 19 Sep 2013 12:57 PM IST
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मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर चौतरफा घिरी सरकार की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं।
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अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अरुण कुमार आखिरकार तीन दिन की छुट्टी पर चले गए हैं।
प्रमुख सचिव गृह ने इसकी तस्दीक भी कर दी है। बताया जा रहा है कि अरुण रविवार को लखनऊ आएंगे।
इसके पहले, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अरुण कुमार ने यूपी छोड़कर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की इच्छा जताई थी। एडीजी अरुण कुमार के पत्र को मुजफ्फरनगर दंगों से जोड़कर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि उन्होंने यह पत्र करीब दो माह पहले भेज दिया था, लेकिन इसके लिए एक बार फिर परिपत्र देने से बुधवार को सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया। एडीजी अरुण कुमार को पिछले साल कानून एवं व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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अपनी कार्यशैली को लेकर पहचाने जाने वाले अरुण कुमार ने पदभार संभालने के बाद वैज्ञानिक तरीके से तफ्तीश को बढ़ावा देने समेत कई अहम कदम उठाए, लेकिन उनके कुछ फैसलों को दरकिनार कर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से वह असहज महसूस करने लगे।
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खासतौर से गोंडा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नवनीत राणा के मामले को लेकर। राणा ने उनके कहने पर प्रदेश सरकार के मंत्री के करीबी पशु तस्कर के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किया, लेकिन बाद में मंत्री के दबाव के चलते राणा को हटा दिया गया।
डीएसपी जियाउल हक की हत्या के बाद उनकी सख्ती भी सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं को नागवार गुजरी। कुछ ऐसा ही नोएडा के एसएसपी शलभ माथुर, आगरा के एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे के मामले में हुआ।
सूत्रों के मुताबिक रुकावटों के चलते काम करने में खुद को असहज महसूस कर रहे एडीजी अरुण कुमार ने करीब दो माह पहले ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की औपचारिकताएं शुरू कर दी थीं।
लेकिन, बुधवार को उनके प्रतिपत्र के चर्चा में आने के बाद मामले को मुजफ्फरनगर दंगों से जोड़कर सियासी रंग दे दिया गया।
जब इस संबंध में एडीजी से संपर्क का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ था। प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव का कहना है कि उन्हें ऐसा कोई भी प्रत्यावेदन अभी तक नहीं मिला है।