राजेश साहनी एटीएस में होने वाले 90 प्रतिशत गुडवर्क में सहायक की भूमिका में रहते थे। उनका शुमार तेज-तर्रार के साथ ठंडे दिमाग से काम करने वाले अफसरों में किया जाता था। ऐसे में उनके सुसाइड करने की बात लोगों के गले नहीं उतर रही। एफएसएल की टीम अंदर छानबीन कर रही थी तो बाहर एटीएस अफसर के सुसाइड के कारणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं। कहा जा रहा है कि आईएसआई एजेंट रमेश सिंह कान्याल की गिरफ्तारी भी उनकी सुसाइड की वजह हो सकती है। यूपी एटीएस ने पिछले मंगलवार को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से उसे गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन पिथौरागढ़ की अदालत में पेश कर उसका ट्रांजिट रिमांड लिया गया। शुक्रवार को उसे लखनऊ में अदालत में पेश किया गया।
आईएसआई एजेंट की गिरफ्तारी का मामला तो नहीं राजेश साहनी की सुसाइड की वजह?
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इसी दौरान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत राजेश साहनी ने 10 दिन का अवकाश ले रखा था, लेकिन रमेश सिंह के रिमांड को लेकर एटीएस के अफसरों में मतभेद हो गया। इस मामले का पूरा खुलासा राजेश साहनी की टीम ने किया था। ऐसे में कोशिश थी कि वे ही मुल्जिम का बयान दर्ज कराएं और उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करें। राजेश सोमवार से ही छुट्टी पर थे, लेकिन रमेश का बयान दर्ज कराने के लिए उन्हें बुला लिया गया। बयान दर्ज कराने के बाद वे अपने साथियों से दस दिन बाद मुलाकात की बात कहकर चले गए। कहा जा रहा है कि उन्हें मंगलवार को फिर ऑफिस बुलाया गया तो वह अंदर ही अंदर काफी खिन्न हो गए। उन्होंने ड्राइवर से अपनी सर्विस पिस्टल मंगाई। इसी दौरान एक अन्य मुलाजिम किसी फाइल पर दस्तखत कराने पहुंचा तो राजेश पिस्टल को एक हाथ से उछाल कर दूसरे हाथ में लेते हुए बोले-फाइल रख दो, आज सारा काम खत्म कर देंगे। ...और इसके कुछ ही क्षण बाद उन्होंने सुसाइड कर लिया।
भंडारे में जाने को कहकर निकले थे
यूपी एटीएस के अपर पुलिस अधीक्षक राजेश साहनी मंगलवार को घर से भंडारे के लिए जाने को कहकर निकले थे, लेकिन कुछ देर बाद उनकी खुदकुशी की खबर आई। बताते हैं कि चिनहट में एटीएस के पूर्व एसएसपी उमेश श्रीवास्तव के यहां भंडारे का आयोजन था। राजेश वहीं जाने की बात कहकर घर से निकले, लेकिन चिनहट के बजाय सीधे अपने ऑफिस पहुंचे और ड्राइवर से असलहा मंगाकर खुदकुशी कर ली।
गोली चलने की आवाज सुनते ही कार्यालय में हड़कंप मच गया। ऑफिस में मौजूद एटीएस एसएसपी जोगेंद्र कुमार उनके रूम के पास पहुंचे। दरवाजा अंदर से लॉक था। दूसरी ओर का दरवाजा खोला गया तो अंदर साहनी का लाश पड़ी थी। एसएसपी लखनऊ दीपक कुमार मौके पर पहुंचे। घटना के डेढ़ घंटे बाद एफएसएल के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। दो घंटे की फोरेंसिक जांच के बाद साहनी का शव सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
राजेश साहनी लखनऊ पुलिस लाइन में पत्नी के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी सोनी और बेटी श्रेया है। श्रेया ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में एमए में एडमिशन लिया है। राजेश मंगलवार को परिवार के साथ मुंबई जाने वाले थे। इसके लिए उन्होंने 10 दिन का अवकाश लिया था। वह 28 मई से अवकाश पर थे। बात मई 2006 की है। राजेश साहनी तब सीओ चौक हुआ करते थे। एक दिन कैसरबाग इलाके में हाता चौकी के पास वाहनों की चेकिंग हो रही थी। इसी दौरान हूटर, माइक, सायरन लगी एक जीप वहां से गुजरी। जीप पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समाजवादी पार्टी लिखा था। इसमें कई युवक सवार थे। राजेश साहनी ने जीप को रोकने की कोशिश की तो चालकरफ्तार बढ़ाकर भाग निकला। इस पर साहनी जीप के बोनट पर चढ़ गए, लेकिन युवक जीप लेकर परिवर्तन चौराहे से हजरतगंज होते हुए एसएसपी आवास पहुंच गए। साहनी तब तक जीप का बोनट पकड़ कर लटके रहे।