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अभिनेता पीयूष मिश्रा ने युवओं का दिया संदेश, नशा करना है तो काम का करें, इसी से ब्रह्म मिलेंगे
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नशा करना ही है तो काम का करें। कर्म करें, यही वो जरिया है जो हमें ब्रह्म से मिलवाने में मददगार होता है।
युवाओं में बढ़ती नशे की लत को लेकर यह संदेश दिया अभिनेता, गीतकार, संगीत निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर पीयूष मिश्रा ने।
वे बृहस्पतिवार को नवाबों की नगरी के खास मेहमान बने। मौका था उनके द्वारा तीस साल पहले लिखे नाटक ‘जब शहर हमारा सोता है’ के मंचन का।
इससे पहले उन्होंने अमर उजाला से हुई बातचीत में व्यक्तिगत आदतों, परियोजनाओं और लखनऊ आने के मकसद को साझा किया।
डिजिटल दुनिया में अपने अनुभव को अच्छा बताते हुए उन्होंने कहा कि वेब सीरीज लेखक का माध्यम है। यहां तसल्ली से किरदार को विकसित करने का मौका मिलता है।
इसमें आराम से छह से सात घंटे में पूरी कहानी आगे बढ़ती है। कहते हैं कि उनकी अभिनीत एक वेब सीरीज अनार्की सितंबर तक आएगी। इसकी पूरी कहानी छत्तीसगढ़ के ड्रग माफिया पर है।
इसके अलावा वेब सीरीज इलीगल का सीजन-3 भी जल्द आने वाला है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किताबें पढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए।
एक समय मुझे गुमान हो गया था कि मैं बहुत बड़ा एक्टर हो गया हूं। मैंने किताबें पढ़ना छोड़ दिया। बाद में समझ आई और अब हमेशा किताबें पढ़ता हूं।
अभिनेता बनना तो है खुद को निखारें
बीएम शाह सभागार में पीयूष मिश्रा ने एक तरफ भारतेंदु नाट्य अकादमी (बीएनए) के निदेशक दिनेश खन्ना संग पुराने दिनों को याद किया तो दूसरी तरफ रंगमंच व अभिनय की बारीकियों पर, अपने नाटकों पर और बॉलीवुड की शैली पर युवाओं के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि अभिनय करना है तो पढ़ाई करें। सीखें, कड़ी मेहनत करें। खुद को निखारे बिना अच्छा अभिनेता नहीं बन सकते हैं। किसी भी नाटक में स्क्रिप्ट मूल होती है। इसके अलावा कल्पना की दृष्टि से इसे और कितना बेहतर बना सकते हैं, ये हमारे नजरिए पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि कोई भी किरदार जीवंत तब होता है जब सोते-जागते, हर पल उसे हम जीते हैं।
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युवाओं में बढ़ती नशे की लत को लेकर यह संदेश दिया अभिनेता, गीतकार, संगीत निर्देशक, स्क्रिप्ट राइटर पीयूष मिश्रा ने।
वे बृहस्पतिवार को नवाबों की नगरी के खास मेहमान बने। मौका था उनके द्वारा तीस साल पहले लिखे नाटक ‘जब शहर हमारा सोता है’ के मंचन का।
इससे पहले उन्होंने अमर उजाला से हुई बातचीत में व्यक्तिगत आदतों, परियोजनाओं और लखनऊ आने के मकसद को साझा किया।
डिजिटल दुनिया में अपने अनुभव को अच्छा बताते हुए उन्होंने कहा कि वेब सीरीज लेखक का माध्यम है। यहां तसल्ली से किरदार को विकसित करने का मौका मिलता है।
इसमें आराम से छह से सात घंटे में पूरी कहानी आगे बढ़ती है। कहते हैं कि उनकी अभिनीत एक वेब सीरीज अनार्की सितंबर तक आएगी। इसकी पूरी कहानी छत्तीसगढ़ के ड्रग माफिया पर है।
इसके अलावा वेब सीरीज इलीगल का सीजन-3 भी जल्द आने वाला है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किताबें पढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए।
एक समय मुझे गुमान हो गया था कि मैं बहुत बड़ा एक्टर हो गया हूं। मैंने किताबें पढ़ना छोड़ दिया। बाद में समझ आई और अब हमेशा किताबें पढ़ता हूं।
अभिनेता बनना तो है खुद को निखारें
बीएम शाह सभागार में पीयूष मिश्रा ने एक तरफ भारतेंदु नाट्य अकादमी (बीएनए) के निदेशक दिनेश खन्ना संग पुराने दिनों को याद किया तो दूसरी तरफ रंगमंच व अभिनय की बारीकियों पर, अपने नाटकों पर और बॉलीवुड की शैली पर युवाओं के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि अभिनय करना है तो पढ़ाई करें। सीखें, कड़ी मेहनत करें। खुद को निखारे बिना अच्छा अभिनेता नहीं बन सकते हैं। किसी भी नाटक में स्क्रिप्ट मूल होती है। इसके अलावा कल्पना की दृष्टि से इसे और कितना बेहतर बना सकते हैं, ये हमारे नजरिए पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि कोई भी किरदार जीवंत तब होता है जब सोते-जागते, हर पल उसे हम जीते हैं।
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