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वक्फ संपत्तियों की कमाई का हिस्सा न देने वाले मुतवल्लियों पर होगी कार्रवाई
Wed, 07 Apr 2021 10:37 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ/मोहम्मद इरफान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ/मोहम्मद इरफान
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 07 Apr 2021 10:37 AM IST
सार
- सुन्नी वक्फ बोर्ड सर्वे कराकर चिह्नित करेगा अपनी संपत्तियां
- प्रदेश में 1.25 लाख संपत्तियां, आमदनी बढ़ाने की कवायद
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वक्फ बोर्ड - यूपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश भर में मौजूद वक्फ संपत्तियों की आमदनी छिपाना मुतवल्लियों के लिए आसान नहीं होगा। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अब ऐसे मुतवल्लियों पर कार्रवाई करने तैयारी कर रहा है, जो वक्फ संपत्तियों से होने वाली आमदनी का हिस्सा (मुतालबा) बोर्ड को नहीं दे रहे हैं। वर्तमान में बोर्ड का सारा ध्यान आमदनी बढ़ाने पर है। वक्फ बोर्ड के चैयरमैन जुफर फारूकी ने बताया कि वक्फ संपत्तियों को चिह्नित कराने के लिए स्थलीय सर्वे कराया जाएगा। बाद में इसके मुताबिक बोर्ड अपना मुतालबा वसूलेगा।
गौरतलब है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में प्रदेश भर में करीब 1,25,000 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह, दुकानें, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मकान आदि संपत्तियां शामिल है। वक्फ एक्ट के मुताबिक इन संपत्तियोें की सालाना आमदनी का सात फीसदी मुतालबा बोर्ड में जमा करना होता है। मगर, बोर्ड में वक्फ संपत्तियां का रिकॉर्ड काफी पुराना होने और संपत्ति की मौजूदा स्थिति की जानकारी न होने की वजह से मुतवल्ली अपनी कमाई छिपाकर मुतालबा कम जमा करते हैं या जमा ही नहीं करते हैं।
खर्च से आधी हो रही है बोर्ड की आमदनी
बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सैयद मोहम्मद शुऐब का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन व अन्य खर्चों पर बोर्ड को सालाना 6.5 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। जबकि सालाना आमदनी महज 3.5 करोड़ रुपये ही हो पा रही है। इसकी वजह पिछले 20 महीने से कर्मचारियों का वेतन बकाया हो चुका है।
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वक्फ संपत्तियों का रजिस्टर होगा ऑनलाइन
बोर्ड के रजिस्टर दफा 37 में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड दर्ज होता है। अब इस रजिस्टर को ऑनलाइन किया जा रहा है। यह बोर्ड के पोर्टल wamsi.nic.in पर उपलब्ध रहेगा। इससे वक्फ संपत्तियों के अवैध कब्जे पर रोक लगने के साथ ही लोगों को घर बैठे उसका रिकॉर्ड भी मिल सकेगा।
आज वक्फ बोर्ड की बैठक में होंगे कई फैसले
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के नवगठित बोर्ड की पहली बैठक बुधवार को होगी। इसमें कोरोना महामारी के चलते लंबित मामलों के निपटारे पर चर्चा होगी। इसके अलावा वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड और कामकाज ऑनलाइन करने को लेकर निर्णय होने की उम्मीद है। बैठक में बोर्ड की आमदनी बढ़ाने को लेकर वक्फ संपत्तियों को चिह्नित करने व स्थलीय सर्वे कराने पर भी मुहर लग सकती है।
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गौरतलब है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में प्रदेश भर में करीब 1,25,000 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह, दुकानें, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मकान आदि संपत्तियां शामिल है। वक्फ एक्ट के मुताबिक इन संपत्तियोें की सालाना आमदनी का सात फीसदी मुतालबा बोर्ड में जमा करना होता है। मगर, बोर्ड में वक्फ संपत्तियां का रिकॉर्ड काफी पुराना होने और संपत्ति की मौजूदा स्थिति की जानकारी न होने की वजह से मुतवल्ली अपनी कमाई छिपाकर मुतालबा कम जमा करते हैं या जमा ही नहीं करते हैं।
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खर्च से आधी हो रही है बोर्ड की आमदनी
बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सैयद मोहम्मद शुऐब का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन व अन्य खर्चों पर बोर्ड को सालाना 6.5 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। जबकि सालाना आमदनी महज 3.5 करोड़ रुपये ही हो पा रही है। इसकी वजह पिछले 20 महीने से कर्मचारियों का वेतन बकाया हो चुका है।
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वक्फ संपत्तियों का रजिस्टर होगा ऑनलाइन
बोर्ड के रजिस्टर दफा 37 में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड दर्ज होता है। अब इस रजिस्टर को ऑनलाइन किया जा रहा है। यह बोर्ड के पोर्टल wamsi.nic.in पर उपलब्ध रहेगा। इससे वक्फ संपत्तियों के अवैध कब्जे पर रोक लगने के साथ ही लोगों को घर बैठे उसका रिकॉर्ड भी मिल सकेगा।
आज वक्फ बोर्ड की बैठक में होंगे कई फैसले
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के नवगठित बोर्ड की पहली बैठक बुधवार को होगी। इसमें कोरोना महामारी के चलते लंबित मामलों के निपटारे पर चर्चा होगी। इसके अलावा वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड और कामकाज ऑनलाइन करने को लेकर निर्णय होने की उम्मीद है। बैठक में बोर्ड की आमदनी बढ़ाने को लेकर वक्फ संपत्तियों को चिह्नित करने व स्थलीय सर्वे कराने पर भी मुहर लग सकती है।