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पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत कार्रवाई अवैध : हाईकोर्ट

Sat, 04 Jul 2026 02:38 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 02:38 AM IST
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Action under old land acquisition law illegal: High Court
हाईकोर्ट लखनऊ पीठ। 
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2014 से पुराने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के निरस्त होने के बाद उसके तहत शुरू की गई अधिग्रहण प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जा सकती। न्यायालय ने ऐसी कार्रवाई को प्रारंभ से ही शून्य बताया है। खंडपीठ ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को निर्देश दिया कि याची को 2014 से पहले की दरों पर नहीं, बल्कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा निर्धारित कर तीन माह के भीतर भुगतान किया जाए।
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यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने लोहिया डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर पारित किया। याचिका में बताया गया था कि सरोजनीनगर तहसील के अहिमामऊ गांव स्थित 0.5020 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए धारा-4 की अधिसूचना पर 27 दिसंबर 2013 की तारीख अंकित थी। हालांकि, इसका राजपत्र में प्रकाशन 4 जनवरी 2014 को हुआ। इसके बाद की सभी वैधानिक औपचारिकताएं भी 1 जनवरी 2014 के बाद पूरी हुईं।
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खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि केवल अधिसूचना पर दर्ज तारीख के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। कानून के अनुसार, अधिग्रहण तभी प्रारंभ माना जाएगा, जब धारा-4 की अधिसूचना का विधिवत राजपत्र, समाचार पत्रों और स्थानीय स्तर पर प्रकाशन हो। चूंकि ये सभी औपचारिकताएं 1 जनवरी 2014 के बाद पूरी हुईं, इसलिए निरस्त हो चुके 1894 के अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई वैध नहीं है।
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