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Lucknow News: केजीएमयू से मरीज को निजी अस्पताल भेजने के मामले में कार्रवाई अटकी
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केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू से मरीज को निजी अस्पताल भेजकर इलाज कराने के मामले में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई 17 दिन बाद भी अटकी हुई है। परिजनों की शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद जांच में लीपापोती के आरोप लग रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि आरोपी डॉक्टर जरूरतमंद मरीजों को डायलिसिस और इलाज के लिए आए दिन निजी अस्पताल भेजता था। वहीं, केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद जल्द कार्रवाई की जाएगी।
बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि जांच के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर ने फेफड़े में संक्रमण बताया। मरीज की जान बचाने के लिए फेफड़े में पाइप डालने की जरूरत बताई। केजीएमयू में प्रक्रिया में देरी होने की बात कहते हुए आरोपी डॉक्टर ने मरीज को नौ सितंबर को दुबग्गा स्थित फाह हॉस्पिटल भेज दिया। परिजनों को आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का भरोसा भी दिया गया।
डॉक्टर की बात पर भरोसा कर परिजनों ने मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद वहां करीब एक लाख रुपये वसूले गए। मरीज के बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर पर इलाज के नाम पर वसूली कराने का आरोप लगाया। इलाज के दौरान पुष्पा की मौत हो गई।
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मामले की शिकायत के बाद विभागाध्यक्ष ने आरोपी डॉक्टर के बयान दर्ज किए। डॉक्टर ने निजी अस्पताल में मरीज का इलाज करने से इन्कार किया। विभागाध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है। परिजनों के पास रिकॉर्डिंग और शिकायती पत्र होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई है। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि सोमवार तक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
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बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि जांच के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर ने फेफड़े में संक्रमण बताया। मरीज की जान बचाने के लिए फेफड़े में पाइप डालने की जरूरत बताई। केजीएमयू में प्रक्रिया में देरी होने की बात कहते हुए आरोपी डॉक्टर ने मरीज को नौ सितंबर को दुबग्गा स्थित फाह हॉस्पिटल भेज दिया। परिजनों को आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का भरोसा भी दिया गया।
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डॉक्टर की बात पर भरोसा कर परिजनों ने मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद वहां करीब एक लाख रुपये वसूले गए। मरीज के बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर पर इलाज के नाम पर वसूली कराने का आरोप लगाया। इलाज के दौरान पुष्पा की मौत हो गई।
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मामले की शिकायत के बाद विभागाध्यक्ष ने आरोपी डॉक्टर के बयान दर्ज किए। डॉक्टर ने निजी अस्पताल में मरीज का इलाज करने से इन्कार किया। विभागाध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है। परिजनों के पास रिकॉर्डिंग और शिकायती पत्र होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई है। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि सोमवार तक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।