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यूपी में पुलिस पर कैसे ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर रहे हैं योगी, सबूत देखिए

Wed, 05 Jul 2017 04:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 05 Jul 2017 04:03 PM IST
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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
मंगलवार को पुलिस महकमे में बड़ा और सटीक फेरबदल किया गया। अफसरों की तैनाती में उनका अनुभव और पूर्व के कार्यकाल को भी आंकने के बाद उनको नई तैनाती दी गई है। कानून व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवालों पर योगी ने सबसे बड़ा कदम उठाया है। 
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सहारनपुर की घटना हो या रायबरेली में पांच लोगों की सामूहिक हत्या, सीतापुर में ट्रिपल मर्डर हो या इलाहाबाद में चार लोगों की हत्या यह सारी घटनाएं प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रही थीं। 
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ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्य ने एडीजी कानून व्यवस्था को हटाकर कड़ा संदेश देने की कोशिश की है। साथ ही बड़े जिलों में तैनात अफसरों को भी हटाकर उनके स्थान पर पुराने अफसरों को उनके अनुभव के आधार पर तैनाती दी है।
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एडीजी कानून व्यवस्था का जाना पहले से तय हो गया था। दरअसल जब जोन में एडीजी को कमान सौंपी गई तभी से आदित्य मिश्रा खुद असहज महसूस कर रहे थे। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने डीजीपी से दो टूक शब्दों में एडीजी एलओ के पद से हटाए जाने की बात कह दी थी। 

कहा जा रहा है कि सात में से तीन जोन में मौजूदा एडीजी कानून व्यवस्था से सीनियर अफसरों को तैनात कर दिया गया था। बताया यहां तक जा रहा है कि इनमें एक अफसर ऐसे थे जिनसे जोन में तैनाती के बाद से आज तक एडीजी कानून व्यवस्था की बातचीत भी नहीं हुई थी। 

वहीं आदित्य मिश्रा और डीजीपी सुलखान सिंह के बीच भी सब क ुछ इन दिनों ठीक नहीं चल रहा था। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों आदित्य मिश्रा के लंबी छुट्टी पर जाने से डीजीपी सुलखान सिंह नाराज थे।
 

अमित पाठक को हटवाने में पेट्रोल लॉबी कामयाब!

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अम‌ित पाठक
एसटीएफ में लंबे समय तक एसएसपी रहे अमित पाठक को गोरखपुर का एसएसपी बनाया गया है। अमित पाठक ने बड़े पैमाने पर हुए पेट्रोल घोटाले का खुलासा किया था जिससे प्रदेश भर में हड़कंप मच गया था। 

पेट्रोल पंप मालिकों की एक लॉबी अमित पाठक का स्थानांतरण कराने के लिए पीछे पड़ गई थी। एसटीएफ की कार्रवाई की तारीफ हाईकोर्ट ने की थी जबकि इस कार्रवाई से नाराज होकर पेट्रोल पंप मालिकों ने तेल की हड़ताल कर दी थी। 

पेट्रोल पंप संचालकों के दबाव में जांच में सीधे तौर पर काम कर रही एसटीएफ को सहयोगी की भूमिका में डाल दिया गया था। इसके बाद से ही अमित पाठक को हटाए जाने के लिए सरकार पर लगातार दबाव बन रहा था।

इसके अतिरिक्त नोएडा में 3700 करोड़ की पोंजी स्कीम में अमित की कार्रवाई की जमकर तारीफ हुई थी। इन घटनाओं के अलावा एसटीएफ ने अमित पाठक के नेतृत्व में कई अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा बल्कि कई घटनाओं को होने से भी बचाया।

...और नहीं हो पाई बड़े जिलों में डीआईजी की तैनाती

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डेमो - फोटो : डेमो ‌प‌िक
पिछले दिनों डीजीपी मुख्यालय की ओर से एक प्रस्ताव शासन को भेजकर बड़े जिलों में डीआईजी की तैनाती की बात कही गई थी। लेकिन डीआईजी की किल्लत इसके आड़े आ गई। कहा यह भी जा रहा है कि एडीजी जोन की व्यवस्था लागू होने के बाद कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आए। 

इस लिए इस व्यवस्था पर कुछ अधिकारियों ने एतराज जताया था। जिन बड़े जिलों में नए एसएसपी की तैनाती की गई है उसमें वरिष्ठता का भी ध्यान रखा गया है। 

1988 बैच के अजय कुमार को एडीजी कानून व्यवस्था बनाया गया है। जबकि आदित्य मिश्रा 1989 बैच के थे और लखनऊ, वाराणसी और बरेली जोन के एडीजी उनसे सीनियर थे। 2005 बैच की मंजिल सैनी को मेरठ भेजा गया है, इसी बैच के आरके भारद्वाज को वाराणसी भेजा गया है वहीं 2004 बैच के प्रीतिंदर सिंह को मुरादाबाद में एसएसपी बनाया गया है। 2007 बैच के आईपीएस अमित पाठक को गोरखपुर का एसएसपी बनाया गया है।
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