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दंगे की पोल खोलना पड़ा पुलिस अधिकारियों को महंगा
अनिल श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Thu, 19 Sep 2013 02:57 AM IST
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टीवी न्यूज चैनल के स्टिंग आपरेशन में मुजफ्फरनगर दंगों की वजह को लेकर बयान देने वाले पुलिस अधिकारियों के बयानों की जांच आईजी मेरठ करेंगे।
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आईजी कानून एवं व्यवस्था आरके विश्वकर्मा ने बुधवार को बताया कि आईजी मेरठ की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गृह विभाग की ब्रीफिंग के दौरान आईजी कानून एवं व्यवस्था से जब दंगो में सपा नेता की भूमिका संबंधी बयान के बारे में पूछा गया तो वह कुछ भी बोलने से बचते रहे।
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जिन नेताओं के खिलाफ वारंट जारी हुआ उनका नाम पूछे जाने पर भी उन्होंने चुप्पी साध ली। उन्होंने बताया कि स्टिंग आपरेशन में बयान देने वाले पुलिस अफसरों के बयानों की जांच आईजी मेरठ करेंगे।
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स्टिंग आपरेशन की कंट्रोल रूम में भी रिकार्डिंग की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिसवालों ने संसाधनों की कमियों को लेकर बात कही। यह बात सच है कि कुछ जगह संसाधन पर्याप्त मात्रा में नहीं थे।
उन कमियों को जल्द दूर किया जाएगा। स्टिंग आपरेशन टेलीकास्ट होने के बाद पुलिस अधिकारियों पर की गई कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि स्टिंग के चलते किसी पुलिस अधिकारी को नहीं हटाया गया।
जांच के दौरान जिन अधिकारियों की कमियां सामने आ रही हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर अबतक कुल 66 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और 224 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
13372 लोगों को 107/16 में पाबंद किया गया है और 1918 के खिलाफ शांतिभंग में कार्रवाई की गई है। 15 लोगों के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई होनी है।
इनमें से आठ के खिलाफ एनएसए तामील हो गया है। जल्द ही बाकी सात के खिलाफ भी यह कार्रवाई हो जाएगी।