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आवासीय भूखंड पर बना दिया चार मंजिला कांप्लेक्स, सील
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एलडीए ने रतनखंड में की कार्रवाई
शारदानगर योजना में एलडीए के इंजीनियरों की मिलीभगत से आवासीय भूखंड पर बेसमेंट सहित चार मंजिला कॉम्प्लेक्स खड़ा करा दिया। विहित प्राधिकारी ने जब जांच कराई तो इसकी फिनिशिंग का काम चल रहा था। बृहस्पतिवार को अवैध निर्माण कर बने कॉम्प्लेक्स को सील कर दिया गया।
संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया कि भूखंड 1/1 रतनखंड पर ऊषा पत्नी प्रमोद कुमार का निर्माण चल रहा था। प्रवर्तन की कार्रवाई शुरू होने के बाद अधिशासी अभियंता ने रिपोर्ट भेजी कि मौके पर काम बंद है। जब लेखपाल से मौके पर जांच कराई तो पता चला कि तेजी से निर्माण चालू है। वहीं फिनिशिंग कर व्यावसायिक उपयोग शुरू करने की तैयारी है। यह निर्माण प्रियम प्लाजा के पास किया जा रहा था। तीन सितंबर 2020 को इसे सील करने का आदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद भी प्रवर्तन के इंजीनियरों ने कार्रवाई नहीं की। बृहस्पतिवार को इसे सील किया जा सका है। निर्माण को सील कर अब पुलिस अभिरक्षा में दे दिया गया है।
...मगर बच निकलते हैं इंजीनियर
एलडीए में लगातार यह देखने में आ रहा है कि इंजीनियरों की मिलीभगत से अवैध निर्माण चालू रहते हैं। इसके बाद अवैध निर्माणों पर तो कार्रवाई कभी-कभार हो भी जाती है। लेकिन, इसके लिए जिम्मेदार इंजीनियरों को बचा लिया जाता है।
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शारदानगर योजना में एलडीए के इंजीनियरों की मिलीभगत से आवासीय भूखंड पर बेसमेंट सहित चार मंजिला कॉम्प्लेक्स खड़ा करा दिया। विहित प्राधिकारी ने जब जांच कराई तो इसकी फिनिशिंग का काम चल रहा था। बृहस्पतिवार को अवैध निर्माण कर बने कॉम्प्लेक्स को सील कर दिया गया।
संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया कि भूखंड 1/1 रतनखंड पर ऊषा पत्नी प्रमोद कुमार का निर्माण चल रहा था। प्रवर्तन की कार्रवाई शुरू होने के बाद अधिशासी अभियंता ने रिपोर्ट भेजी कि मौके पर काम बंद है। जब लेखपाल से मौके पर जांच कराई तो पता चला कि तेजी से निर्माण चालू है। वहीं फिनिशिंग कर व्यावसायिक उपयोग शुरू करने की तैयारी है। यह निर्माण प्रियम प्लाजा के पास किया जा रहा था। तीन सितंबर 2020 को इसे सील करने का आदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद भी प्रवर्तन के इंजीनियरों ने कार्रवाई नहीं की। बृहस्पतिवार को इसे सील किया जा सका है। निर्माण को सील कर अब पुलिस अभिरक्षा में दे दिया गया है।
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...मगर बच निकलते हैं इंजीनियर
एलडीए में लगातार यह देखने में आ रहा है कि इंजीनियरों की मिलीभगत से अवैध निर्माण चालू रहते हैं। इसके बाद अवैध निर्माणों पर तो कार्रवाई कभी-कभार हो भी जाती है। लेकिन, इसके लिए जिम्मेदार इंजीनियरों को बचा लिया जाता है।
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