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केजीएमयू: बिना आहार नाल पैदा हुई बच्ची को डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 07 Aug 2018 03:07 PM IST
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ऑपरेशन के वक्त बच्ची
- फोटो : amarujala
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केजीएमयू के डॉक्टरों ने जन्म से ही आहार नाल न होने की समस्या से जूझ रही एक मासूम को नई जिंदगी दी। मासूम की मुस्कान लौटाने के लिए डॉक्टरों ने 27 महीने तक उसे अस्पताल में भर्ती रखा, तीन सर्जरी की और पेट के हिस्से से नया आहार नाल बना दिया।
जब तीसरे ऑपरेशन के बाद बच्ची ने दूध पिया तो परिवार की खुशियां लौट आईं। उसे सोमवार को घर भेज दिया गया।जानकारी के मुताबिक, झांसी जिले के मानिक चौक थाना क्षेत्र के किसान मंडी निवासी अरविंद यादव की पत्नी ने 13 अप्रैल 2016 को बेटी को जन्म दिया। दूध पिलाते ही बच्ची की सांसें अटकने लगीं।
इस पर उसे केजीएमयू रेफर कर दिया गया। 17 अप्रैल को वे बच्ची को केजीएमयू पीडियाट्रिक विभाग ले गए। यहां जांच के दौरान पता चला कि उसकी आहार नाल विकसित नहीं है। दूध पिलाने पर कुछ हिस्सा फेफड़े में जा रहा है तो कुछ बाहर ही निकल जा रहा है।
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इससे उसे खांसी आने लगी और उसकी सासें रुक-रुक कर चल रही थीं। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. जेडी रावत ने एक ट्यूब के जरिये आहार नाल चेक किया तो शक सही निकला। वह इसोफेजियल अट्रेसिया (आहार नाल न होना) से पीड़ित थी। इसके बाद सर्जरी की योजना बनाई गई।
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जब तीसरे ऑपरेशन के बाद बच्ची ने दूध पिया तो परिवार की खुशियां लौट आईं। उसे सोमवार को घर भेज दिया गया।जानकारी के मुताबिक, झांसी जिले के मानिक चौक थाना क्षेत्र के किसान मंडी निवासी अरविंद यादव की पत्नी ने 13 अप्रैल 2016 को बेटी को जन्म दिया। दूध पिलाते ही बच्ची की सांसें अटकने लगीं।
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इस पर उसे केजीएमयू रेफर कर दिया गया। 17 अप्रैल को वे बच्ची को केजीएमयू पीडियाट्रिक विभाग ले गए। यहां जांच के दौरान पता चला कि उसकी आहार नाल विकसित नहीं है। दूध पिलाने पर कुछ हिस्सा फेफड़े में जा रहा है तो कुछ बाहर ही निकल जा रहा है।
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इससे उसे खांसी आने लगी और उसकी सासें रुक-रुक कर चल रही थीं। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. जेडी रावत ने एक ट्यूब के जरिये आहार नाल चेक किया तो शक सही निकला। वह इसोफेजियल अट्रेसिया (आहार नाल न होना) से पीड़ित थी। इसके बाद सर्जरी की योजना बनाई गई।
यहां देखें, कब-कब हुई सर्जरी
डिस्चार्ज के बाद पिया दूध
- फोटो : amarujala
बच्चों में आहार नाल का विकास नहीं होने की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। आहार नाम के विकसित नहीं होने की स्थिति में पहली बार स्तनपान कराते ही बच्चा उल्टी करता है। दूध मुंह से बाहर निकलने लगता है। उसे खांसी आएगी। शरीर नीला और फिर पीला पड़ जाता है। धड़कनें पहले बढ़ती हैं और फिर सांसें रुक-रुक कर लेता है।
17 अप्रैल को पहली सर्जरी :
पहली सर्जरी में खाने की ऊपरी नली को गर्दन से निकाला गया। इससे उसका थूक अंदर जाने के बजाय बाहर निकलने लगा। पेट का ऑपरेशन करके वहां एक नली लगाई गई। उस नली को आमाशय से जोड़ा गया ताकि उसे दूध पिलाया जा सके। इस बीच पेट के कुछ हिस्से को लेकर अलग आहार नली बनाई गई। यह प्रयोग सफल रहा। ऑपरेशन के सप्ताह भर बाद बच्ची की हालत में सुधार हुआ। धीरे-धीरे उसका वजन भी बढ़ने लगा। आहार नली में रक्त संचार होने से उसका भी विकास होेने लगा।
07 मार्च 2018 को दूसरी सर्जरी : इस ऑपरेशन में खाने के लिए विकसित की गई नली को आहार नली से जोड़ दिया गया। इस वक्त तक बच्ची का वजन करीब 10 किलो हो गया था।
27 जुलाई को तीसरी सर्जरी : इसमें आहार नली को मुंह से जोड़ दिया गया।
17 अप्रैल को पहली सर्जरी :
पहली सर्जरी में खाने की ऊपरी नली को गर्दन से निकाला गया। इससे उसका थूक अंदर जाने के बजाय बाहर निकलने लगा। पेट का ऑपरेशन करके वहां एक नली लगाई गई। उस नली को आमाशय से जोड़ा गया ताकि उसे दूध पिलाया जा सके। इस बीच पेट के कुछ हिस्से को लेकर अलग आहार नली बनाई गई। यह प्रयोग सफल रहा। ऑपरेशन के सप्ताह भर बाद बच्ची की हालत में सुधार हुआ। धीरे-धीरे उसका वजन भी बढ़ने लगा। आहार नली में रक्त संचार होने से उसका भी विकास होेने लगा।
07 मार्च 2018 को दूसरी सर्जरी : इस ऑपरेशन में खाने के लिए विकसित की गई नली को आहार नली से जोड़ दिया गया। इस वक्त तक बच्ची का वजन करीब 10 किलो हो गया था।
27 जुलाई को तीसरी सर्जरी : इसमें आहार नली को मुंह से जोड़ दिया गया।
कर्मचारियों ने नाम दिया गुनगुन
आॅपरेशन करने वाले डॉ जेडी रावत और उनकी टीम
- फोटो : amarujala
निजी अस्पताल में इस तरह के ऑपरेशन में करीब दो से तीन लाख रुपये खर्च होते हैं, लेकिन केजीएमयू में यह ऑपरेशन तीस हजार में हुआ। करीब 27 माह से अस्पताल में रहने वाली इस बच्ची का नाम अस्पताल कर्मियों ने गुनगुन रखा है। परिवारीजनों ने भी इसी नाम पर हामी भर दी।अंतिम आपरेशन के सप्ताह भर बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई।
इस पर उसे सोमवार को घर भेज दिया गया है। माहभर बाद जांच के लिए बुलाया गया है। आपरेशन करने वाली टीम में प्रो. जेडी रावत के साथ डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, एनेस्थीसिया के डॉ. सरिता सिंह, वंदना, संजय व पुष्पा शामिल थी।
इस पर उसे सोमवार को घर भेज दिया गया है। माहभर बाद जांच के लिए बुलाया गया है। आपरेशन करने वाली टीम में प्रो. जेडी रावत के साथ डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह, एनेस्थीसिया के डॉ. सरिता सिंह, वंदना, संजय व पुष्पा शामिल थी।