आठ साल जेल में रहने के बाद देशद्रोह के आरोपी बरी
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देशद्रोह और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के आरोप में आठ साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद पांच आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
एटीएस के विशेष न्यायाधीश एसएएच रिजवी ने शेख मुख्तार हुसैन, नौशाद उर्फ हाफिज उर्फ साबिर, नूर इस्लाम उर्फ मामा, मो. अली अकबर हुसैन व अजीजुर्रहमान उर्फ सरदार को रिहा करने का आदेश दिया।
नूर इस्लाम को छोड़कर सभी आरोपी देर शाम जेल से रिहा कर दिए गए। नूर इस्लाम को आतंक के एक अन्य मामले में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की हुई है।
पांचों को बरी करने का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने जो गवाह पेश किए, उनके बयानों में काफी भिन्नताएं हैं। यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि घटना किस प्रकार हुई। घटनास्थल के बारे में भी गवाहों के बयान अलग-अलग हैं।
यह था मामला
दरोगा रामनरायन सिंह ने वजीरगंज थाने में 12 अगस्त 2008 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह पुलिस बल के साथ देशद्रोह के आरोपियों को जिला जेल से लेकर एडीजे की कोर्ट में पेशी पर आए थे।
वह शेख मुख्तार हुसैन, अली अकबर हुसैन, अजीजुर्रहमान, नौशाद व नूर इस्लाम को लेकर कोर्ट के सामने पहुंचे। वहां आरोपियों के वकील एमएफ फरीदी व मो. शोएब दो अन्य वकीलों के साथ मिले।
फरीदी ने आरोपियों के कान में कुछ कहा। इस पर इन लोगों ने भारत विरोधी व पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने शुरू कर दिए।
सुरक्षा घेरा सख्त होने के बावजूद वकील फरीदी व उनके साथी आरोपियों को उकसाते रहे। इस बीच कोर्ट के आसपास तमाम लोग व वकील जुट गए तथा नारों का विरोध करने लगे। लोगों में अशांति फैलने की आशंका केचलते उनकी पेशी कराकर वापस जेल पहुंचाया गया।