कमलेश तिवारी के हत्यारोपी देर रात लाए गए लखनऊ, आज खुलेंगे कई राज
हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के आरोपी शेख अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन पठान को बुधवार देर रात लखनऊ ले आया गया। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि गुजरात गई पुलिस टीम ने कोर्ट से दोनों की 72 घंटे की ट्रांजिट रिमांड स्वीकृत कराई थी। लखनऊ पहुंचने के बाद दोनों को सुरक्षित ठिकाने पर ले जाया गया, जहां एसआईटी और खुफिया एजेंसियों के अफसरों ने उनसे पूछताछ शुरू की।
उधर, नागपुर से पकड़े गए आसिम अली को बुधवार दोपहर कोर्ट में पेश कर चार दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया है। एसएसपी ने बताया कि तीनों साजिशकर्ता रशीद अहमद पठान उर्फ राशिद, मौलाना मोहसिन शेख और फैजान यूनुस को भी पुलिस कस्टडी रिमांड पर जेल से बाहर लाकर पूछताछ की जा रही है।
एसएसपी ने बताया कि अशफाक और मोइनुद्दीन के सामने आने के बाद कई राज खुलेंगे। उनके लखनऊ आने से कमलेश तिवारी की हत्या करके राजधानी से भागने और फिर तीन दिन इधर-उधर भटककर गुजरात पहुंचने तक के घटनाक्रम की जानकारी मिलेगी।
इससे पुलिस को आगे की विवेचना में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि हत्याकांड से गिरफ्तारी होने तक उन्होंने किस-किस व्यक्ति से मदद ली? हत्यारों से इस बारे में जानकारी करके मददगारों की धरपकड़ की जाएगी।
साजिशकर्ताओं को रिमांड में लेकर की पूछताछ
इस बीच बुधवार सुबह जेल में बंद साजिशकर्ता राशिद, मोहसिन शेख और फैजान को पुलिस कस्टडी रिमांड पर बाहर लाकर पूछताछ का सिलसिला शुरू किया गया। हालांकि, तीनों ने एसआईटी और खुफिया एजेंसियों की टीम की संयुक्त पूछताछ में काफी कुछ जानकारियां दे दी थीं।
पुलिस तीनों से कुछ और जानकारियां हासिल करने के प्रयास में है। एसएसपी ने बताया कि नागपुर से गिरफ्तार आसिम की भी चार दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड स्वीकृत हो गई है। बृहस्पतिवार को सभी छह लोगों का आमना-सामना कराया जाएगा। पुलिस हत्यारों, साजिशकर्ताओं और मदद करने वाले की मुलाकात की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराएगी।
जेल में सारी रात जागते रहे साजिशकर्ता, नहीं खाया खाना
मंगलवार देर रात जेल में दाखिल हुए साजिशकर्ता राशिद, मोहसिन और फैजान सारी रात जागते रहे। तीनों को सघन तलाशी और मेडिकल परीक्षण के बाद जेल की सर्किल नंबर एक की बैरक में रखा गया था।
मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते तीनों साजिशकर्ताओं की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। दो जेलर और चार डिप्टी जेलर ने खुद तीनों की तलाशी ली। गले में पहनी माला, धागा, अंगूठी और बेल्ट समेत नुकसान पहुंचाने वाली सभी वस्तुओं को उतरवाकर तीनों को बैरक में भेजा गया।
रात को तीनों को भोजन दिया गया। हालांकि, उन्होंने भूख न होने की बात कहते हुए भोजन बैरक में ही रख लिया। तीनों रातभर दीवार से सटकर खामोश बैठे रहे। बुधवार सुबह करीब पौने 10 बजे पुलिस टीमें तीनों को जेल से ले गईं।