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...तो क्या विधानपरिषद में भी पहुंचेंगे दागी!

Tue, 18 Feb 2014 11:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 18 Feb 2014 11:31 AM IST
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accused candidates may contest for vidhan parisad

विधानसभा के लिए दागियों के चुनाव मैदान में उतरने की बात कोई नई नहीं है,

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लेकिन अब प्रदेश के उच्च सदन विधानपरिषद के लिए भी दागी चुनाव मैदान में ताल ठोंकने की तैयारी कर रहे हैं।

दिलचस्प यह है कि ‘माननीय’ बनने को आतुर दागी उच्च सदन में पहुंचने के लिए उस तबके के वोटों की जुगत में हैं जोे पढ़े-लिखे माने जाते हैं।

जेल में बंद उच्च सदन के एक ‘माननीय’ अपनी दाल गलती न देख अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतार दिया है। उनकी कोशिश है कि सीट उनके घर में ही रहे।

उत्तर प्रदेश स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव अप्रैल के आखिरी सप्ताह में संभावित है। लखनऊ मंडल में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अभी एसपी सिंह और शिक्षक निर्वाचन सीट से देवी दयाल शास्त्री विधान परिषद के सदस्य हैं।


स्नातक निर्वाचन सीट के लिए उम्मीदवार कोई भी हो सकता है, लेकिन वोट वही करेगा जो कम से कम स्नातक हो। शिक्षक निर्वाचन सीट के लिए शिक्षक उम्मीदवार होता है और वोट केवल शिक्षक ही करते हैं।

इन दोनों सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम भले जारी न हुए हों पर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। स्नातक निर्वाचन के लिए तो पार्टियों ने भी उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। कुछ निर्दलीय भी दम-खम दिखाने को बेताब हैं।


स्नातक निर्वाचन सीट पर काबिज एसपी सिंह एक प्राइवेट स्कूल के मालिक हैं। मौजूदा समय वह हत्या के आरोप में सलाखों के पीछे हैं।

जेल में होने की वजह से वह खुद तो मैदान में ताल नहीं ठोंक पा रहे हैं। जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से उनकी पत्नी कांति सिंह का मैदान में उतरना लगभग तय है। इसकी घोषणा वह कर चुकी हैं।

वह अपने पति द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को गिनवाकर लोगों से समर्थन मांग रही हैं। इसी तरह निर्दल प्रत्याशी के रूप में माध्यमिक शिक्षा के पूर्व निदेशक संजय मोहन भी ताल ठोंकने को बेताब हैं।

शहर के चारों तरफ होर्डिंग व बैनर लगे हैं। राजधानी के पार्क रोड स्थित शिक्षा निदेशालय पर भी उन्होंने होर्डिंग लगवा रखा है। उनके दामन पर टीईटी घोटाले का दाग है।

इस आरोप में वह साल भर से अधिक जेल में रह चुके हैं। वह अपनों के बीच कहते घूम रहे हैं टीईटी घोटाले के दाग धोने के लिए इससे बेहतर और कोई मौका नहीं हो सकता।


शिक्षक निर्वाचन के लिए अभी तक तो ऐसा कोई नाम नहीं आया है जो दागी हो। शिक्षक निर्वाचन के लिए अभी सभी गुटों ने उम्मीदवारों की घोषणा भी नहीं की है।

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