Lucknow News : एबीवीपी का आरोप, बिहार में भ्रष्टाचार कर आए राजेश सिंह को कैसे बनाया गोरखपुर विवि का कुलपति
परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि कुलपतियों के मनमाने तरीके पर अंकुश लगाने के लिए राज्यपाल और प्रदेश सरकार को जल्द छात्रसंघ चुनाव बहाल करना चाहिए। कैंपस में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम होगी तो मनमाने काम पर अंकुश लगेगा।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नैक मूल्यांकन के नाम पर विद्यार्थियों को लूटा जा रहा है। परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने रविवार को परिषद के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि यूपी में ऐसी कौनसी व्यवस्था और सर्च कमेटी है जो भ्रष्टाचारियों को कुलपति बना रही है। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो अभाविप भ्रष्ट कुलपतियों की रैंकिंग जारी करेगी और उनके खिलाफ आंदोलन करेगी।
याज्ञवल्क्य शुक्ल ने आरोप लगाया कि बिहार के पूर्णिया विश्वविद्यालय में कुलपति रहने के दौरान राजेश सिंह ने जमकर भ्रष्टाचार किया था। बिहार के लोकायुक्त और वहां के राज्यपाल ने उनके खिलाफ जांच करने के आदेश दिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में उनके खिलाफ विभिन्न स्तर से हुई जांच में वह दोषी भी पाए गए थे। उन्होंने सवाल किया कि यूपी में आखिर ऐसा क्या हुआ कि राजेश सिंह जैसे भ्रष्टाचार के आरोपी को गोरखपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय राज्य विश्वविद्यालय का कुलपति बना दिया गया। उन्होंने कुलपति की नियुक्ति से जुड़ी प्रत्येक संस्था और अधिकारी पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए कहा कि राजेश सिंह पर लगे दाग यूपी में किस डिटर्जेंट से धुल गए।
उन्होंने सवाल किया कि क्या यूपी ऐसे भ्रष्टाचारियों को कुलपति के रूप में स्वीकार करने वाला प्रदेश बनेगा? उन्होंने कहा कि कौनसी ऐसी मजबूरी है, सर्च कमेटी में ऐसे कौनसे लोग शामिल है जो संगीन आरोपियों को कुलपति बना रहे हैं। इस अवसर पर परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।
किसे खुश करने के लिए हटाए गए तीन कुलपति
याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि अवध विश्वविद्यालय के कुलपति रविशंकर सिंह, आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक मित्तल और एकेटीयू की कुलपति प्रदीप कुमार मिश्रा को दबाव की राजनीति के चलते कदाचार के आरोप में हटाया गया। उन्होंने कहा कि यदि उन तीनों पर कदाचार का आरोप सिद्ध हुआ तो एफआईआई क्यों नहीं दर्ज कराई गई? यदि कार्रवाई नहीं तो किसे खुश करने के लिए तीन कुलपतियों से इस्तीफा लिया गया।
छात्रों की प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं करेंगे
उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दे पर संवाद स्थापित करने का प्रयास हो रहा है, नैक मान्यता के नाम पर वसूली का धंधा शुरू हो गया है, छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिषद छात्रों को प्रताड़ित करना बर्दाश्त नहीं करेगी।
छात्रसंघ चुनाव बहाल किए जाएं
परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि कुलपतियों के मनमाने तरीके पर अंकुश लगाने के लिए राज्यपाल और प्रदेश सरकार को जल्द छात्रसंघ चुनाव बहाल करना चाहिए। कैंपस में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम होगी तो मनमाने काम पर अंकुश लगेगा।