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केजीएमयू और लोहिया संस्थान में मधुमेह व थायरॉयड का इलाज ठप, यहां बढ़ी जटिल सर्जरी की वेटिंग लिस्ट

Wed, 23 Sep 2020 02:55 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 23 Sep 2020 02:55 PM IST
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about 500 posts of senior doctors are vacant in PGI, KGMU and Lohia Institute
लोहिया संस्थान - फोटो : amar ujala

पीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान में वरिष्ठ डॉक्टरों के करीब 500 पद खाली हैं। कुछ इस्तीफा देकर निजी संस्थानों में जा रहे हैं तो कई सेवानिवृत्त हो गए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से केजीएमयू और लोहिया संस्थान में अब इंडोक्राइनोलॉजी विभाग बंद हो गया है। इसके चलते मधुमेह, थायरॉयड के मरीजों का इलाज ठप पड़ा है। 

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यही नहीं कोरोना काल खत्म होने के बाद जब मरीजों का लोड बढ़ेगा तो उन्हें निजी अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ेगा। संकाय सदस्यों के पद खाली रहने से मरीजों के इलाज से ज्यादा शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित होगा। संस्थानों में नौ माह से खाली पद भरने की कवायद नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने ओपीडी शुरू करने की रणनीति बनाने का निर्देश दिया है। ऐसी स्थिति में ओपीडी चलने के बाद भी कई विभागों में मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 
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लोहिया में संकाय सदस्यों के 131 पद खाली
लोहिया संस्थान में संकाय सदस्यों के 131 पद खाली चल रहे हैं। इंडोक्राइनोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष गुच्च के इस्तीफे के बाद से यह विभाग बंद है। इसी तरह क्रिटिकल केयर मेडिसिन भी बंद हो चुका है, जबकि जनवरी से अब तक कार्डियोलॉजी, मेडिसिन विभाग सहित चार विभागों के वरिष्ठ संकाय सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यहां एमबीबीएस का चौथा बैच चल रहा है। ऐसे में इलाज के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। मीडिया प्रभारी डॉ. श्रीकेश सिंह का कहना है कि मामला कोर्ट में होने की वजह से भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है।

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केजीएमयू में इंडोक्राइनोलॉजी विभाग बंद

about 500 posts of senior doctors are vacant in PGI, KGMU and Lohia Institute
प्रतीकात्मक तस्वीर

यहां इंडोक्राइनोलॉजी विभागाध्यक्ष के इस्तीफे के बाद से यह विभाग बंद है। वहीं, काफी समय तक बंद रहे नेफ्रोलॉजी विभाग की जिम्मेदारी अब यूरोलॉजी के प्रो. विश्वजीत सिंह को सौंपी गई है। इसी तरह प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एके सिंह के कुलपति बनने और प्रो. विजय कुमार के प्रधानाचार्य बनने के बाद यहां सिर्फ दो संकाय सदस्य बचे हैं।

सीटीवीएस, न्यूरो सर्जरी जैसे विभागों में मरीजों की संख्या ज्यादा है, लेकिन संकाय सदस्यों के पद खाली हैं। दंत संकाय में सृजित पीडियाट्रिक एवं प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग में पांच पदों पर भी नियुक्ति नहीं की जा सकी है। यहां संकाय सदस्यों के करीब 300 पद खाली हैं। मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि खाली पदों पर संविदा के आधार पर फरवरी में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन कोरोना की वजह से रुकावट आई है। इस प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी चल रही है।

पीजीआई में प्रभावित हाे रहा ओपीडी में इलाज 

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पीजीआई - फोटो : amar ujala

पीजीआई में क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. एके बरौनिया ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। उन्हें यूपी में क्रिटिकल केयर का जन्मदाता बताया जाता है। उनके जाने के बाद से विभाग में तीन संकाय सदस्य बचे हैं। वहीं, पिछले माह नियोनेटोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश गुप्ता और नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित गुप्ता भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

पीजीआई के पूर्व निदेशक डॉ. राकेश कपूर की स्वैच्छिक सेवानिवृत्त के बाद यहां के चार संकाय सदस्य इस्तीफा देकर जा चुके हैं। इन संकाय सदस्यों के जाने के बाद जटिल सर्जरी की वेटिंग लिस्ट बढ़ गई है। यहां करीब 20 संकाय सदस्यों के पद खाली हैं। पीजीआई में सामान्य दिनों में करीब दो हजार लोगों का ओपीडी में इलाज होता है। इस संबंध में निदेशक प्रो. आरके धीमान का कहना है कि जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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