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‘मुर्दे’ ने किया मुकदमा, गवाही दी और हुआ फैसला!

Thu, 18 Dec 2014 11:44 AM IST
आशुतोष मिश्र/ अमर उजाला, कानपुर
आशुतोष मिश्र/ अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 18 Dec 2014 11:44 AM IST
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A surprising case of property in Kanpur.

अजब मुकदमा और गजब न्याय। अविश्वसनीय लेकिन हकीकत। पहले मामले में सदर तहसीलदार न्यायिक प्रेम चंद्र की कोर्ट में एक ‘मुर्दे’ ने मुकदमा दाखिल किया और फैसला भी सुना दिया गया। दूसरे मामले में अपर आयुक्त और राजस्व परिषद कोर्ट से फैसला होने के बावजूद निचली कोर्ट सदर तहसीलदार न्यायिक की कोर्ट में मुकदमा दाखिल हो गया।

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इसमें एक ‘मुर्दा’ कोर्ट में हाजिर हुआ और गवाही भी दी। प्रमुख सचिव और राजस्व परिषद अध्यक्ष से शिकायत पर कमिश्नर मो. इफ्तिखारुद्दीन और जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने एडीएम फाइनेंस शत्रुघ्न सिंह से दोनों मामलों की जांच कराई तो मामले सही पाए गए। अब न्यायिक तहसीलदार को चार्जशीट थमाने की तैयारी हो गई है।
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इस पर न्यायिक तहसीलदार प्रेम चंद्र का कहना है कि सदर तहसीलदार न्यायिक की कोर्ट में अजब-गजब तमाशा कोर्ट की कार्यवाही विवेक से होती है। मृतक के नाम से मुकदमा दाखिल करने की बात संज्ञान में आने पर मुकदमा खारिज कर दिया था। यह एक्स पार्टी मुकदमा था। इसलिए कोर्ट को खारिज करने का अधिकार था।
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इस खारिज मुकदमे के खिलाफ अपर आयुक्त की कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया गया। वहां पर न्यायिक तहसीलदार कोर्ट में दाखिल सबूतों के आधार पर फैसला हो गया था। दूसरे मुकदमे के बारे में ज्यादा याद नहीं है। फाइल देखकर कुछ बता सकता हूं। लेकिन अब मेरे साथ अन्याय हो रहा है।

वहीं एडीएम शत्रुध्न सिंह का कहना है दोनों मुकदमों की जांच मिलने पर स्थलीय मुआयना किया गया। जांच रिपोर्ट पर्याप्त सुबूतों के आधार पर बनाई गई है। रिपोर्ट में सभी सुबूतों का हवाला दिया गया है। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई हैं। चार्जशीट तैयार करने की जानकारी नहीं है।

...तो ये है मामला

A surprising case of property in Kanpur.

ग्राम भरथापुर पोस्ट घनश्यामपुर तहसील बिल्हौर निवासी रामवती पत्नी स्व. मंगली प्रसाद ने राजस्व परिषद अध्यक्ष से 11 फरवरी 2014 को शिकायत की कि तहसीलदार न्यायिक प्रेमचंद्र और पटल सहायक गिरवर बाबू ने उच्च अदालतों में निर्णीत मुकदमा रामबेटी बनाम बाबूलाल में गलत ढंग से आदेश पारित कर खतौनी में अपने नाम चढ़वा लिए।

अपर आयुक्त कानपुर मंडल ने 10 सितंबर 2001 और राजस्व परिषद ने 14 अगस्त 2006 को इस मामले में निर्णय दिया था। इसके बाद भी तहसीलदार न्यायिक कोर्ट ने वाद संख्या 2640/2010-11, 397/2000-2001, 224/10-11 राम बेटी बनाम बाबूलाल में नया फैसला सुना दिया। कमिश्नर ने इसकी जांच एडीएम फाइनेंस से कराई। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट कमिश्नर को सौंप दी है।

इसमें कहा गया है कि रामवती के पिता स्व. बाबूलाल की फर्जी वसीयत के आधार पर ग्राम गंभीरपुर कछार की कई आराजी संख्या और ग्राम बगदौधी कछार की दो आराजी संख्या का नियम विरुद्ध फर्जी इंद्राज खतौनी में दाखिल करा लिया।

इस तरह दिखाई गई कोर्ट में उपस्थिति

A surprising case of property in Kanpur.

रामवती के पिता का नाम बाबूलाल था। उसके भाई अविवाहित राम आसरे का निधन हो गया था। इसलिए उसकी संपत्ति की हकदार वह बनी। गांव के ही हरिश्चंद्र वर्मा, रामबालक वर्मा और अतुल कुमार वर्मा के पिता का नाम भी बाबूलाल था।

इन लोगों ने इसका फायदा उठाते हुए फर्जी वसीयत बनवाई। इसमें राम आसरे का कोई जिक्र नहीं था। इसके बाद रामबेटी पत्नी अतुल कुमार वर्मा ने न्यायिक तहसीलदार की कोर्ट में राम आसरे वर्मा बनाम बाबूलाल मुकदमा प्रस्तुत किया।

राम आसरे की मौत पहले ही हो चुकी थी लेकिन उसके नाम से मुकदमा चला। न्यायिक तहसीलदार ने 11 जुलाई 2011 को राम आसरे का नाम खारिज कर रामबेटी का नाम अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया।

तहसीलदार न्यायिक द्वारा एक आर्डरशीट में लिखा भी है कि पक्ष उपस्थित आए। दिनांक 13 जून 2011 की आर्डरशीट में भी अंकित किया है कि आज पुकार में पक्ष मय अधिवक्ता उपस्थित आए। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि राम आसरे की हत्या दिनांक 29 अप्रैल 2011 को ही कर दी गई थी तो कोर्ट में राम आसरे को उपस्थित होना कैसे दर्शाया गया?

मरने के तीन साल बाद मुकदमा दाखिल किया

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ग्राम बैरी अकबरपुर कछार निवासी महेश कुमार पुत्र स्व. शिव प्रसाद ने आठ सितंबर 2014 को मुख्य सचिव से शिकायत की। इसमें कहा गया था कि मे. कनवार हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के सचिव उदयवीर सिंह पुत्र स्व. हरनाम सिंह और अध्यक्ष गरीब किसानों की जमीन की धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों से बिना स्टांप शुल्क दिए रजिस्ट्री करवा रहे हैं। मृतक किसानों के वारिसानों को पक्षकार बनाए बगैर मृतक काश्तकार के नाम वाद दाखिल कर जमीनों पर कब्जे कर रहे हैं।

कहा गया कि सदर तहसीलदार न्यायिक ने ग्राम बैरी अकबरपुर कछार के कई खाता संख्या और कई आराजी संख्या पर 19 अगस्त 2004 के पंजीकृत बैनामा के आधार पर मे. कनवार हाउसिंग सोसाइटी के सचिव वीके सिंह व उदय वीर सिंह के पक्ष में गलत ढंग से 10 नवंबर 2012 को नामांतरण आदेश पारित कर दिया। मुख्य सचिव के आदेश पर डीएम ने एडीएम फाइनेंस को जांच सौंपी।

एडीएम फाइनेंस ने 5 दिसबंर 2014 को डीएम को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया है कि शिव प्रसाद ने 1996 में इस भूमि के संबंध में मे. कनवार हाउसिंह सोसाइटी के पक्ष में बैनामा किया था लेकिन स्टांप में कुछ कमी पाए जाने पर यह बैनामे रोक दिए गए थे और मामला कलक्टर स्टांप की कोर्ट में भेजा गया था।

बिना अवलोकन कर दिया पारित

A surprising case of property in Kanpur.

इस कारण बैनामों के आधार पर नामांतरण क्रेता समिति के पक्ष में नहीं हो सका था। 18 अगस्त 2009 को शिव प्रसाद की मृत्यु हो गई। उनकी जमीन पर बरासतन उनके वारिस पुत्र महेश कुमार, सुदेश कुमार और पत्नी सावित्री देवी के नाम पूर्व में दर्ज हो चुके थे।

इसके बावजूद कनवार हाउसिंह सोसाइटी ने अनियमित तरीके से शिव प्रसाद की मौत के बाद भी उन्हें पक्षकार बनाते हुए तहसीलदार न्यायिक की कोर्ट में वाद संख्या 1398/11-12 प्रस्तुत किया।

मरे हुए व्यक्ति शिव प्रसाद के नाम दाखिल इस इस नामातंरण वाद में अनियमित तामीला और लेखपाल के गलत बयानों के आधार पर बिना अभिलेखों का अवलोकन किए कनवार हाउसिंग सोसाइटी के पक्ष में 10 नवंबर 2012 को नामातंरण आदेश पारित कर दिया।

इस तरह हुआ था पूरा खेल

A surprising case of property in Kanpur.

मामले में डीएम ने लेखपाल रमेश चंद्र कमल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अकील को निलंबित कर दिया है। लेखपाल ने अपने बयान में पक्षकार (वादी) के मरे होने की बात छुपाई थी वहीं अकील ने मृतक वादी का झूठा तामीला कराया था। इसके साथ ही राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव को पत्र भेजकर न्यायिक तहसीलदार प्रेमचंद्र को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की है। पत्र के साथ जिलाधिकारी ने आरोपपत्र भी भेजा है।

जिलाधिकारी ने नर्वल में तैनात लेखपाल रमेश चंद्र कमल को निलंबित कर दिया है। लेखपाल रमेश चंद्र कमल ने मे. कनवार हाउससिंग सोसाइटी को फायदा पहुंचाने के लिए अपने बयान में पक्षकार (वादी) शिव प्रसाद की मृत्यु की बात छिपाई थी। जांच में यह खुलासा होने पर डीएम ने लेखपाल को निलंबित कर दिया है।

उधर, आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद को भेजे पत्र में कहा है कि सदर तहसीलदार न्यायिक प्रेमचंद्र के खिलाफ नामातंरण मुकदमों में नियमों के विपरीत आदेश पारित किए जाने की शिकायतें परिषद के आयुक्त से मिली थीं। इसकी जांच कराने में स्पष्ट हुआ कि न्यायिक तहसीलदार ने गंभीरपुर कछार, बगदौधी कछार के नामातंरण मुकदमे में आयुक्त और राजस्व परिषद से अंतिम निर्णय हो जाने के बाद पत्रावली में तिथियां और कटिंग करके तथा पिछली तिथियों में शपथपत्र लेते हुए नामातंरण आदेश पारित कर दिया गया।

इसी तरह ग्राम बैरी अकबरपुर कछार के एक नामातंरण मुकदमे में वादी की मौत 2009 में हो जाने के बावजूद भी वर्ष 2012 में मृतक व्यक्ति को पक्षकार (वादी) बनाकर दाखिल किए गए मुकदमें में बिना अभिलेख देखे लेखपाल द्वारा दर्ज कराए अनियमित बयान और चपरासी द्वारा की गई फर्जी तामीला के आधार पर नामातंरण आदेश पारित किया गया है। न्यायिक तहसीलदार का यह आचरण निन्दनीय है। इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर कठोर विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की जाती है। प्रस्तावित आरोपपत्र और निलंबन आदेश का प्रारूप भी प्रेषित किया जा रहा है।

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