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भाई को कंधे पर लेकर दौड़ा, नहीं मिला इलाज, डॉक्टरों के सामने छह घंटे तड़पकर मौत

Tue, 01 Aug 2017 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 01 Aug 2017 01:51 AM IST
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A patient died in lohia institute because of carelessness of doctors.
भाई को कंधे पर लेकर दौड़े पर नहीं बची जान - फोटो : amar ujala

लखनऊ के लोहिया संस्थान में डॉक्टरों की मनमानी और संवेदनहीनता के चलते सोमवार को एक मरीज की जान चली गई। गले में दर्द के चलते घरवाले सुबह आठ बजे मरीज को ओपीडी लेकर पहुंचे थे। मरीज करीब छह घंटे तक तड़पता रहा, लेकिन उसे इलाज नहीं मिला।

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दोपहर करीब डेढ़ बजे मुंह से झाग आने लगा तो पल्ला झाड़ते हुए डॉक्टरों ने उसे लोहिया अस्पताल भेज दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अस्पताल पहुंचते ही मरीज ने दम तोड़ दिया।
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बिहार निवासी जाएदा खान ने बताया कि कुछ महीने पहले उनके पति नुरूल इस्लाम को अचानक नाक और मुंह से खून आने लगा था। बेतिया जिले के स्थानीय अस्पताल में इलाज से राहत मिली, लेकिन एक माह बाद फिर बुखार और गले में दर्द ने परेशान कर दिया। डॉक्टरों ने गोरखपुर रेफर कर दिया।
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वहां कोई राहत नहीं मिल रही थी। गले में गांठ बन रही थी और दर्द हो रहा था। रविवार रात में डॉक्टरों ने लोहिया संस्थान रेफर कर दिया। यहां सुबह लेकर आए तो डॉक्टरों ने ओपीडी खुलने का इंतजार करने को कहा।

ओपीडी में आने के बाद डॉक्टरों ने मरीज को देखने से साफ मना कर दिया

A patient died in lohia institute because of carelessness of doctors.

सुबह आठ बजे ओपीडी में गए तो डॉक्टरों ने कुछ देर इंतजार करने को कहा। मरीज की स्थिति बिगड़ती जा रही थी। इस बीच ओपीडी के बाहर मरीज को जमीन पर लिटाकर डॉक्टर के बुलाने का इंतजार करती रहीं। इस बीच तबीयत खराब होने लगी तो डॉक्टरों ने इमरजेंसी में भेज दिया। स्ट्रेचर मांगा तो नहीं दिया गया।

मजबूरी में भाई ने कंधे पर लादकर उसे इमरजेंसी तक पहुंचाया। वहां से एक इंजेक्शन लगाकर वापस ओपीडी भेज दिया। जाएदा खान ने बताया कि ओपीडी में आने के बाद फिर से डॉक्टरों ने देखने से साफ मना कर दिया।

इस करीब डेढ़ बजे मरीज के मुंह से झाग निकलने लगा तो डॉक्टरों ने लोहिया अस्पताल भेज दिया। मरीज को कंधे पर लादकर जब तक परिवारीजन लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचते उसकी मौत हो गई।

डॉक्टर खाली नहीं हैं, 11 अगस्त को आओ...

A patient died in lohia institute because of carelessness of doctors.

नुरूल के साथी रामनाथ ने बताया कि ओपीडी से पर्चा बनवाने के बाद कमरा नंबर चार में दिखाने को भेजा गया था। वहां से डॉक्टर ने कमरा नंबर नौ में भेज दिया।

वहां जाने के बाद काउंटर पर बैठी महिला ने कहा कि 11 अगस्त को आइए डॉक्टर खाली नहीं हैं। रामनाथ ने बताया कि जाएदा उस महिला के पैरों पर गिर गई, लेकिन उसने साफ मना कर दिया।

डॉक्टरों से बात करूंगा
मामले पर डॉ. लोहिया संस्‍थान के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय का कहना है कि घटना की जानकारी नहीं है। मरीज अगर रेफर था तो उसे सीधे इमरजेंसी जाना चाहिए था। वैसे यह बड़ी लापरवाही है। मैं इस बारे में डॉक्टरों से बात करके जानकारी लूंगा। इस प्रकार की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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