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मरीज के मरने के तीन दिन बाद तक पैसे वसूलते रहे डॉक्टर

Sun, 24 Jan 2016 03:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 24 Jan 2016 03:03 AM IST
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A patient died after operation.

तेलीबाग रोड स्थित जावित्री अस्पताल में केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर के ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही मरीज शिव विलास ब्रेन डेड हो गया। पर, इसके बावजूद अस्पताल ने तीन दिन में इलाज के नाम पर परिवारीजनों से डेढ़ लाख वसूल लिए।

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मामला खुल न जाए इसलिए उसे दूसरे अस्पताल ले जाने का दबाव बनाने लगे। परिवारीजन तैयार नहीं हुए तो अस्पताल प्रशासन ने चार लाख रुपये देने का लालच दिया।

शक होने पर परिवारीजन ने पुलिस को सूचना दी तो पता चला कि उसकी मौत तो 21 जनवरी को ऑपरेशन के ही दिन ही हो चुकी थी। पर, अस्पताल प्रशासन उसे वेंटिलेटर पर रखे रखा। गुस्साए परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। देर रात तक हंगामा चलता रहा।
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रायबरेली के लालगंज स्थित कुमेदान का पुरवा के रहने वाले शमशेर के पिता शिव विलास सिंह (55) को प्रोस्टेट की समस्या थी। शमशेर ने बताया कि 18 जनवरी को जावित्री अस्पताल में शाम को साढ़े पांच बजे भर्ती कराया गया।
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बताया गया कि ऑपरेशन केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर से करवाया जाएगा। शमशेर ने बताया कि तमाम जांच के बाद डॉक्टर ने 21 जनवरी को ऑपरेशन की डेट दी।

इस तरह डॉक्टरों ने बनाया बहाना

A patient died after operation.

बृहस्पतिवार शाम छह बजे ऑपरेशन शुरू हुआ। रात करीब 12 बजे मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर पहुंच गया। 22 जनवरी को अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की हालत नाजुक है और हायर सेंटर शिफ्ट करना पड़ेगा।

23 जनवरी को सुबह दस बजे से ही डॉक्टर मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का दबाव बनाने लगे। भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन और वेंटिलेटर यूनिट की फीस के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये वसूल लिए गए।

शिकायत मिली है जांच होगी

मामले पर उत्तर प्रदेश के स्वास्‍थ्य राज्यमंत्री डॉ एसपी यादव का कहना है कि जावित्री अस्पताल में मरीज की मौत की शिकायत फोन पर मिली थी। इस मामले की जांच के लिए सीएमओ को निर्देशित किया गया है।

केजीएमयू के डॉक्टर ने नियम के खिलाफ जाकर निजी अस्पताल मे ऑपरेशन किया है तो ये गलत है और शासन से बात कर हर स्तर पर कड़ी कार्रवाई होगी।

इस तरह हुआ था खेल

A patient died after operation.

शमशेर सिंह के मुताबिक ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने अपना नाम मनमीत अरोड़ा बताते हुए मोबाइल नंबर 9792957585 दिया। कहा कि मरीज को कोई दिक्कत हो तो फोन करना। छानबीन में पता चला कि जो नंबर डॉक्टर ने दिया था वो केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. मनमीत सिंह का है।

जावित्री अस्पताल के संचालक डॉ. ईश त्यागी से ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर का नंबर मांगा गया तो उन्होंने भी जो नंबर 9792957585 मैसेज किया वो केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. मनमीत सिंह का ही था। इससे साफ है कि ऑपरेशन डॉ. मनमीत सिंह ने किया और नाम मनमीत अरोड़ा बताया।

अस्पताल ने माना-ऑपरेशन के चार घंटे बाद ही ब्रेन डेड था मरीज

A patient died after operation.

बड़ा सवाल : फिर क्यों भर्ती कर रखा था, जवाब नहीं
जावित्री अस्पताल में केजीएमयू के डॉक्टर के ऑपरेशन करने के महज चार घंटे बाद ही मरीज ब्रेन डेड हो गया था। यही नहीं अस्पताल प्रशासन ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर का जो नंबर बताता है वह केजीएमयू के डॉक्टर मनमीत सिंह का है जबकि नाम डॉ. मनमीत अरोड़ा बताता है।

पर, इस सब गोलमाल में अस्पताल प्रशासन यह नहीं बताता कि अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. ईश त्यागी बताते हैं कि शिव विलास सिंह को 18 जनवरी को भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि प्रोस्टेट ग्लैंड में मवाद भर गया है। 21 को सरदार पटेल कॉलेज के डॉ. मनमीत अरोड़ा ने ऑपरेशन किया था।

ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया और उसकी हालत सामान्य थी। रात 12 बजे के बाद मरीज की सांस बंद हो गई तो उसे वेंटिलेटर यूनिट में शिफ्ट किया गया। सुबह परिवारीजनों को इस बारे में बताया गया लेकिन वो यहीं पर इलाज कराने को तैयार थे।

मरीज की पल्स और हार्ट रेट मिल रही है और यूरिन भी बन रहा है लेकिन वो ब्रेन डेड हो गया है। परिवारीजनों से मरीज को घर ले जाने के लिए कहा गया। ऑपरेशन के लिए सिर्फ 30 हजार रुपये लिए गए। आईसीयू और वेंटिलेटर की फीस नहीं जमा हुई है। डेढ़ लाख की बात गलत है। मरीज को अस्पताल में बेहतर उपचार दिया गया।

बाद में 4 लाख का दिया लालच

A patient died after operation.

परिवारीजनों का आरोप है कि हंगामे के बाद अस्पताल संचालक ने उन्हें इलाज में खर्च डेढ़ लाख रुपये वापस करने का लालच दिया। जब वे नहीं माने तो कहा कि मरीज को यहां से ले जाओ इसके बदले चार लाख रुपये दिए जाएंगे।

परिवारीजनों को माजरा समझ में आ गया। परिवारीजन मरीज को देखने पर अड़ गए तो अस्पताल प्रशासन उनपर इस बात का दबाव बनाने लगा कि पहले लिखित में दो कि मरीज को अपनी इच्छा से घर ले जा रहे हैं।

स्वास्थ्य राज्यमंत्री से शिकायत
जावित्री अस्पताल में ऑपरेशन के बाद मरीज के ब्रेन डेड होने के बाद परिवारीजन विजय सिंह ने मामले की शिकायत स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. एसपी यादव से फोन पर की। विजय सिंह ने स्वास्थ्य राज्यमंत्री को बताया कि मरीज के ऑपरेशन में लापरवाही बरती गई।

मृत अवस्था में इलाज के नाम पर बिल बनाने के लिए वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया और परिवारीजनों को इस जानकारी से दूर रखा गया। डॉ. एसपी यादव ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच सीएमओ से कराई जाएगी और गलती पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गलती पर अनुशासनात्मक कार्रवाई

A patient died after operation.

वहीं, केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत का कहना है कि जावित्री अस्पताल में मरीज का ऑपरेशन किसने किया ये नंबर से स्पष्ट करना मुश्किल होता है। प्राइवेट अस्पताल में केजीएमयू के डॉक्टर ने नियम के खिलाफ जाकर सर्जरी की है तो इसकी छानबीन कराई जाएगी।

डॉ. मनमीत सिंह से भी पूछताछ होगी। गलती पाई गई तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज मंगाया जाएगा जिससे ये स्पष्ट हो सके कि उन्होंने ही ऑपरेशन किया है।

मामला गंभीर, लिया जाएगा संज्ञान

सीएमओ एसएनएस यादव ने कहा, जावित्री अस्पताल में मरीज की मौत के मामले की जानकारी नहीं मिली है। परिवारीजनों से पूरे मामले की जानकारी और शिकायत लेने के बाद जांच कराई जाएगी। ऑपरेशन केजीएमयू के सर्जन ने किया है तो कुलपति से भी मामले की जांच करा संबंधित डॉक्टर से पूछताछ होगी। जावित्री अस्पताल के संचालकों से भी जवाब तलब किया जाएगा।

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