{"_id":"697bc5b078a5880e4f06b52c","slug":"a-new-tradition-of-melody-and-rhythm-begins-in-bhatkhande-from-today-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1582190-2026-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: भातखंडे में सुर-ताल के साथ नई परंपरा का आगाज आज से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: भातखंडे में सुर-ताल के साथ नई परंपरा का आगाज आज से
Fri, 30 Jan 2026 02:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:10 AM IST
विज्ञापन
जानकारी देतीं कुलपति प्रो. मांडवी सिंह और महागामी गुरूकुल आर्ट्स रिसर्च की फाउंडर डायरेक्टर पार
लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय एवं महागामी गुरुकुल आट्र्स रिसर्च फाउंडेशन की ओर से शुक्रवार से तीन दिवसीय 19वां शारंगदेव समारोह शुरू हो रहा है। विवि के राय उमानाथ बली सभागार में व्याख्यान के साथ इसका शुभारंभ होगा। इस संबंध में बृहस्पतिवार को विवि के जयशंकर प्रसाद सभागार में प्रेसवार्ता की गई।
फाउंडेशन की निदेशक पार्वती दत्ता ने बताया कि विवि के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत यह आयोजन किया जाएगा। इसमें नृत्यांगना एवं शोधकर्ता पद्मश्री दर्शना झावेरी और उस्ताद वसीफुद्दीन अपनी कलाओं से लोगों को रूबरू कराएंगे। साथ ही, विभिन्न राज्यों के शोधार्थी अपने-अपने शोध प्रस्तुत करेंगे। तीन दिवसीय समारोह में सुर-ताल की मनमोहक प्रस्तुतियां भी पेश की जाएंगी। सेमिनार, शोध प्रस्तुति, सांस्कृतिक महोत्सव और कार्यशाला का खूबसूरत संगम देखने को मिलेगा।
विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि यह भातखंडे में एक नई परंपरा की शुरुआत जैसा है। हर वर्ष समारोह कराने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को काफी लाभ मिलेगा। यह आयोजन संगीत रत्नाकर ग्रंथ के रचयिता शारंगदेव के योगदान को समर्पित है। शाम को कला मंडपम सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसमें ओडीसी नृत्य और ध्रुपद गायन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। रात नौ बजे तक ये प्रस्तुतियां होंगी। शनिवार को सुबह के सत्रों में ध्रुपद, कथक और मणिपुरी परंपराओं पर विद्वानों के बीच चर्चा व छात्रों के साथ संवाद होगा और शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। एक फरवरी को समापन पर शारंगदेव स्पंदन कार्यशाला होगी। पार्वती दत्ता ''ध्रुपदांगी कथक'' के बारे में जानकारी देंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
फाउंडेशन की निदेशक पार्वती दत्ता ने बताया कि विवि के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत यह आयोजन किया जाएगा। इसमें नृत्यांगना एवं शोधकर्ता पद्मश्री दर्शना झावेरी और उस्ताद वसीफुद्दीन अपनी कलाओं से लोगों को रूबरू कराएंगे। साथ ही, विभिन्न राज्यों के शोधार्थी अपने-अपने शोध प्रस्तुत करेंगे। तीन दिवसीय समारोह में सुर-ताल की मनमोहक प्रस्तुतियां भी पेश की जाएंगी। सेमिनार, शोध प्रस्तुति, सांस्कृतिक महोत्सव और कार्यशाला का खूबसूरत संगम देखने को मिलेगा।
विज्ञापन
विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने बताया कि यह भातखंडे में एक नई परंपरा की शुरुआत जैसा है। हर वर्ष समारोह कराने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को काफी लाभ मिलेगा। यह आयोजन संगीत रत्नाकर ग्रंथ के रचयिता शारंगदेव के योगदान को समर्पित है। शाम को कला मंडपम सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसमें ओडीसी नृत्य और ध्रुपद गायन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। रात नौ बजे तक ये प्रस्तुतियां होंगी। शनिवार को सुबह के सत्रों में ध्रुपद, कथक और मणिपुरी परंपराओं पर विद्वानों के बीच चर्चा व छात्रों के साथ संवाद होगा और शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। एक फरवरी को समापन पर शारंगदेव स्पंदन कार्यशाला होगी। पार्वती दत्ता ''ध्रुपदांगी कथक'' के बारे में जानकारी देंगी।
विज्ञापन