शौहर की ज्यादती से तंग रेशमा ने पढ़कर सुनाया 'खुलानामा', रिश्ता खत्म करने पर ये बोले मौलाना
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शौहर की ज्यादती पर घुट-घुट कर जीने के बजाय लखनऊ की रेशमा सिद्दीकी ने खुलानामा भेजकर 12 साल पुराना रिश्ता खत्म कर दिया। रेशमा ने शनिवार को सार्वजनिक तौर पर इसका एलान किया। यही नहीं, उन्होंने शौहर को भेजे खुलानामा को पढ़कर सुनाया।
लालकुआं स्थित कम्युनिस्ट पार्टी के दफ्तर में पत्रकारों से मुखातिब रेशमा ने कहा, मेरा निकाह 24 फरवरी 2006 में शारिक सिद्दीकी से हुआ था। निकाह के बाद से ही शारिक की ज्यादती से परेशान थी। 2017 से पति से अलग मायके में रहकर गुजारा कर रही हूं।
2018 में पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट से सुलह की कोशिशें भी हुईं, पर शारिक ने मध्यस्थता की शर्तें नहीं मानीं। आजिज आकर 28 अगस्त को अपना खुलानामा रजिस्टर्ड पोस्ट से शारिक को भेज दिया।
खुलानामा में बताई वजहें
रेशमा ने खुला देने की वजहें भी बताई हैं। उन्होंने खुलानामा में लिखा है- ‘हमारी 9 साल की बेटी है। उसकी खातिर मैंने हमेशा रिश्ता बनाए रखने की कोशिश की। परेशान होने के बाद ससुराल से मायके आ गई। आपकी नशे की लत व बुरी आदतों पर ससुराल वालों ने कोई दखल नहीं दिया। इन दो सालों में आपने सिर्फ तीन महीने की बच्ची के स्कूल की फीस दी। आपने (शौहर शारिक) बेल्ट, लात-घूसों से मारा। यहां तक कि आपने माथे पर बंदूक रखकर जान से मारने की धमकी भी दी।’
मौलाना खालिद रशीद बोले- शरीयत में महिला को खुला लेने का हक
ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि शरीयत में जिस तरह से मर्द को तलाक देने का अधिकार है, उसी तरह से महिलाओं को तलाक लेने का भी हक है। तलाक लेने को ही खुला कहा जाता है।
किन्हीं वजहों से औरत अगर पति के साथ नहीं रहना चाहती तो वह निकाह खत्म कर सकती है। इसके लिए महिला को उलमा या दारुलकजा से संपर्क करना होता है। जिस तरह से निकाह का शरई तरीका है, उसी तरह से खुला व तलाक का भी शरई तरीका है।
मेहर की रकम छोड़ी
रेशमा ने शादी के वक्त शौहर की ओर से बीवी को दी जाने वाली मेहर की रकम के 50 हजार रुपये भी छोड़ने की घोषणा की है। शरीयत के कानून में खुला लेने वाली महिला को मेहर की रकम छोड़नी होती है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा- नबी के जमाने से महिलाओं को खुला का मिला है हक
सामाजिक कार्यकर्ता नाईश हसन ने कहा कि खुला महिलाओं को कुरान से मिला अधिकार है। कुरान की सूरत सूरह अल बकरह में इसका जिक्र है। वहीं कई हदीसों से भी ये साबित है। इसके अलावा ऐतिहासिक दस्तावेज से साबित है कि भारत में खुला का चलन काफी समय से है।
1946 में सीतापुर जिले की शफीकुन अंसारी ने यूनाइटेड प्रॉविंस द्वारा विक्टोरिया की तस्वीर वाले आठ आने के स्टैम्प पेपर पर पति मो. इसहाक को मेहर की रकम 526 रुपये साढ़े चार आना छोड़ते हुए 17 मार्च 1946 को खुलानामा भेज कर शादी खत्म कर दी थी। तलाक और खुला की बुनियाद एक ही है- शादी को बर्खास्त करना। इसके लिए न तो किसी मौलवी की जरूरत है और न ही पति की सहमति की जरूरत।