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यूपी का रण : पूर्वांचल के सियासी एजेंडे की अग्निपरीक्षा, यहां मतदान का रुझान तय करता है लड़ाई का रुख

Sat, 15 Jan 2022 04:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 15 Jan 2022 04:54 AM IST
सार

आजकल बड़ा शोर है। यह गया...। वह गया...। अब तो मिलते ही लोग पूछते हैं-भइया कौन-कौन गया? इधर गया या उधर गया...? क्या-क्या कहा...? बड़े दिनों से जो बेचारे हंसे नहीं थे, उनके पेट की गुड़गुड़ी अब जाकर खत्म हुई। बड़े दिनों से परेशान थे। कुछ ऐसी-वैसी, इधर-उधर की सुनने के लिए। अब खिलखिला रहे हैं। अरे भाई! बड़ा धांसू हमला बोला। एकदम बिंदास बोला है। अरे भाई! वो सांप-नेवले वाला तो और जोरदार था! सियासत का आजकल यही अंदाज है। नाटक चल रहा है। जनता मजे ले रही है। उनपर हंस रही है, जिन्होंने हर घर के लिए चिराग का वादा किया था। पर, आज अपने लिए चिराग खोजते फिर रहे हैं। ज्यादा परेशान अपने चिरागों के लिए ठिकाना तलाशने वाले हैं। एजेंडा जो भी हो, जनता अग्निपरीक्षा लेगी। गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर के सियासी हाल बता रहे हैं महेंद्र तिवारी...

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A litmus test of the political agenda of Purvanchal
यूपी के सियासी संग्राम के सबसे बड़े योद्धा योगी आदित्यनाथ... - फोटो : amar ujala

विस्तार

पूर्वांचल का गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज व कुशीनगर का इलाका प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों से थोड़ा अलग है। इसलिए यहां के सियासी समीकरण भी थोड़ा हटकर है। यह क्षेत्र नेपाल से सटा हुआ है। नेपाल में चीन का दखल बढ़ा है, लिहाजा सामरिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र अलग मायने रखता है। यहां के कई विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 30 से 40 हजार तक है। इसलिए ध्रुवीकरण के नजरिए से भी यह क्षेत्र संवेदनशील है। लोग बताते हैं कि कई सीटों पर मतदान के दिन ट्रेंड देखकर लड़ाई हिंदू बनाम मुस्लिम में बदल जाती है।

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यहां भी महंगाई, बेरोजगारी, छुट्टा जानवरों से फसलों को नुकसान व कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। विपक्ष इन सबको पूरी ताकत से मुद्दा बना रहा है। तो सत्ता पक्ष से मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि का भुगतान, वृद्धों व दिव्यांगों की पेंशन में वृद्धि के साथ संविदा फील्ड कर्मियों व पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में बढ़ोतरी, प्रोत्साहन भत्ते जैसे तमाम लाभार्थीपरक नकद भुगतान वाले काम गिनाए जा रहे हैं। हालांकि, गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री नीरज शाही एक अलग तस्वीर दिखाते हैं। वे कहते हैं, इस अंचल में वर्षों से बंद खाद कारखाना और चीनी मिल का संचालन शुरू हुआ है। एम्स व कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का शुभारंभ हो चुका है। सबसे बड़ी बात, योगी को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने का एलान हुआ है। यह मौका कोई पूर्वांचली हाथ से नहीं जाने देगा। चारों जिलों की ज्यादातर सीटों पर लड़ाई भाजपा-सपा के बीच है। पर, कमजोर होने के बावजूद बसपा जीत-हार में फर्क डालेगी। कुछेक जगह तो छुपा रुस्तम भी साबित हो सकती है।
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इस तरह बदल रहा है चुनावी परिदृश्य
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 4 जिलों की 28 विधानसभा क्षेत्रों में से रिकॉर्ड 23 सीटें जीती थीं। तब भाजपा की सहयोगी रही सुभासपा के अलावा सपा, बसपा, कांग्रेस व निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी। इस चुनाव से पहले सुभासपा सपा के साथ जा चुकी है, तो लोकसभा चुनाव में साथ आई निषाद पार्टी भाजपा के साथ है। इधर, चुनाव नजदीक आया तो कई नेताओं ने दल बदल लिए हैं। गोरखपुर क्षेत्र में मंदिर (गोरक्षनाथ मंदिर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) और हाता (पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी का परिवार) सियासी नजरिए से उत्तर और दक्षिण ध्रुव के तौर पर देखे जाते हैं। पिछले महीने तिवारी का कुनबा बसपा छोड़कर साइकिल पर सवार हो गया। इनमें तिवारी के बेटे चिल्लूपार से बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी व पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी के साथ विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय शामिल हैं। वहीं, पूर्व मंत्री व कद्दावर नेता रहे मार्कण्डेय चंद के एमएलसी पुत्र सीपी चंद सपा छोड़ और पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री रहे देव नारायण सिंह उर्फ जीएम सिंह बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं। टिकट की आस और जीत की उम्मीद में और भी कई नेताओं का दलबदल जारी है।
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कई मौजूदा विधायकों के खिलाफ आक्रोश
कई मौजूदा विधायकों के खिलाफ जनता में गहरी नाराजगी है। गोरखपुर से महराजगंज और देवरिया से कुशीनगर तक के भ्रमण के दौरान जगह-जगह मतदाता कई माननीयों का नाम ले-लेकर आक्रोश जताते मिले। किसी के खिलाफ गुस्सा जातिवादी मानसिकता से काम करने को लेकर है, तो किसी के खिलाफ नाराजगी जीत के बाद क्षेत्र में नजर नहीं आने से है। कई के खिलाफ नाराजगी अपने ही नाते-रिश्ते के लोगों को प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य व अध्यक्ष बनवाने से उभरी है। मतदाता यह भी खुलकर कह रहे हैं कि उसकी नाराजगी पार्टी से न होकर विधायक से है।

इलाकेवार ये है गणित...

गोरखपुर  : विधायकों के खिलाफ आक्रोश, मगर प्रदेश सरकार की नीतियों के साथ
गोरखपुर की नौ विधानसभा सीटों में से कैम्पियरगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, खजनी, चौरी-चौरा व बांसगांव में भाजपा जीती थी। चिल्लूपार सीट बसपा के पास है। चिल्लूपार विस क्षेत्र के गोरखपुर रुस्तम ढाले पर मिले संतोष गुप्ता कहते हैं, योगी  ने काम खूब किया है। मुख्यमंत्री का जिला जैसा होना चाहिए, वैसा नजर आने लगा है। पर, कई विधायकों से लोग बहुत नाराज हैं। भाजपा ने 4 सीटों पर चेहरे बदले तो ठीक, नहीं तो सपा के साथ सीटों का बंटवारा पक्का है। यहां लड़ाई तिवारी परिवार से ही होगी। लेकिन, विधायक विनय शंकर तिवारी के बसपा छोड़ सपा में जाने से यह लड़ाई और दिलचस्प हो गई है।

जैतपुर सहजनवां में मिले सुभाष चंद्र यादव कहते हैं, लड़ाई तो सपा-भाजपा में ही होगी। पर, बसपा के मतदाताओं में जो जितना सेंध लगा लेगा, वही भारी पड़ेगा। खजनी बाजार में मिले मुकेश गुप्ता कहते हैं कि बसपा के मतदाता बंट रहे हंै। राधेश्याम चौरसिया कहते हैं, गरीब सरकार से खुश हैं। ज्यादातर ब्राह्मण भाजपा के साथ हैं। लेकिन, योगी-मोदी के नाम पर कब तक हम वोट देंगे? जीतने के बाद जो चेहरा नहीं दिखाने आया, उसे लोग वोट देने को तैयार नहीं हैं। चेहरा न बदला तो सपा को फायदा होगा। चौरी में धनेश यादव, विकास यादव, कृष्ण मोहन व आकाश यादव मिल गए। धनेश कहते हैं, लड़ाई भाजपा व सपा के बीच है। बसपा की स्थिति पहले जैसी नहीं है। गरीब खुश है कि उसे राशन और दो-दो हजार रुपये खर्चा मिल रहा है। महंगाई तो सिर्फ बुद्धिजीवियों के लिए मुद्दा है। वही गणित लगाते हैं कि 400 में जो गैस सिलिंडर लाते थे, अब 990 में भरा रहे हैं।  गरीब को दो जून की रोटी चाहिए, वह राशन और दो हजार रुपये से खुश है।

महराजगंज : भाजपा-सपा में टक्कर बसपा भी है मैदान में
नेपाल सीमा से सटे इस जिले की 5 सीटों में से फरेंदा, सिसवा, महराजगंज और पनियरा में भाजपा जीती थी। जबकि नौतनवा में सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी के बेटे अमन मणि त्रिपाठी जीते थे। नौतनवा के जोगिराबारी चौराहे पर मिले औरंगजेब खान कहते हैं, इस बार सपा तगड़ी टक्कर दे रही है। जहां तक नौतनवा की बात है, तो यहां विधायक की पत्नी की रहस्यमय मौत का मुद्दा लोगों के जेहन में है। इस सीट पर अमन, कौशल किशोर सिंह मुन्ना व भाजपा की त्रिकोणीय लड़ाई में कोई भी बाजी मार सकता है। हालांकि, कौन भारी पड़ेगा, प्रत्याशियों के सामने आते ही इसका पता चल जाएगा। पेंडारी चौराहे पर मिले सूर्य नारायण चौधरी कहते हैं, यहां के सांसद पंकज चौधरी के केंद्र में बनने से पिछड़ा वोट बैंक लामबंद हुआ है। पर, पनियरा में मिले मनोज तिवारी कहते हैं कि जिले के कई विधायकों से उनके समर्थक ही खुश नहीं हैं। दो सीटों पर  नाराजगी ज्यादा है। लेकिन, मोदी व योगी के काम से लोग संतुष्ट हैं। कानून-व्यवस्था में सुधार दिख रहा है। सुविधाएं ऑनलाइन होने से भ्रष्टाचार में भी गिरावट आई है।

देवरिया  : मुद्दों पर भी परख रहे
देवरिया में विधानसभा की सात सीटें हैं। यह जिला बिहार से जुड़ा है। 2017 में भाटपाररानी को छोड़कर अन्य सभी सीटें (रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, सलेमपुर व बरहज) भाजपा ने जीती थीं। पूरे मंडल में मौजूदा विधायकों के खिलाफ सर्वाधिक नाराजगी इसी जिले में है। इसलिए यहां सपा से भाजपा तक टिकट के लिए जोड़-तोड़ कुछ ज्यादा ही है। देवरिया में मिले फल विक्रेता रामजस मौर्या कहते हैं, सदर के मौजूदा विधायक उप चुनाव में जीते थे। दिनभर सक्रिय रहते हैं। उपचुनाव में सभी पार्टियां पंडित प्रत्याशी उतारकर देख चुकी हैं कि जनता किसके साथ है। इस सीट पर दो बड़े नेता नजर गड़ाए हैं। एक तो वह हैं जो अपने पिता के नाम पर वर्षों बाद यहां कार्यक्रम करने आए थे। दूसरे ने भी चक्कर काटना तेज कर दिया है। पर, मौजूदा विधायक को हटाकर किसी दूसरे को लाया गया तो समीकरण गड़बड़ाएगा। पथरदेवा में धूस चौराहा पर सत्य प्रकाश यादव, अनिल जायसवाल व विवेक सिंह से मुलाकात हुई। यहां लोग एक स्वर से कहते हैं कि बीते पांच साल में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं आई। कोई उद्योग-धंधा नहीं आ पाया। पथरदेवा को तहसील बनाने की मांग भी पूरी नहीं हुई। नगर पालिका बनाने की मांग पर कुछ नहीं हुआ। सपा के संभावित उम्मीदवार का नाम लेते हुए लोग कहते हैं कि इस बार लड़ाई जोरदार होगी। रामपुर कारखाना के पटनवा पुल पर मिले राजनाथ यादव कहते हैं, बेरोजगारी व महंगाई से लोग त्रस्त हैं। ऐसे में लोग विकल्प तलाश रहे हैं।

कुशीनगर  :  चेहरा बदलें तो बनेगी बात
कुशीनगर में विधानसभा की 7 सीटें हैं। इनमें खड्डा, पडरौना, फाजिलनगर, कुशीनगर, हाटा सीट भाजपा ने जीती थीं। तमकुहीराज कांग्रेस ने व रामकोला सुभासपा ने जीती थी। अब सुभासपा सपा के साथ है। जिले के तीन विधायकों के खिलाफ काफी नाराजगी है। खड्डा के किसान जितेंद्र चौबे कहते हैं, गन्ना किसानों की स्थिति बहुत ही तकलीफदेह है। एक वर्ष उनका गन्ना गड़ौरा चीनी मिल को आवंटित होता है तो दूसरे वर्ष कप्तानगंज। तीसरे साल रामकोला भेज देते हैं। साल भर किसान बकाया भुगतान के लिए भटकता रहता है। पिछले साल जिस मिल को गन्ना दिया, उसने आज तक भुगतान नहीं किया। इस वर्ष दूसरे मिल को गन्ना आवंटित कर दिया गया। हालांकि, बाढ़ प्रभावित इलाके में नारायणी नदी पर पीपे का पुल बनवाकर विधायक ने राहत दी है। कई परिवार कोरोना की तीसरी लहर में लोगों के परदेस से लौटने की आशंका को लेकर चिंतित हैं कि काम कैसे मिलेगा। हालांकि, गरीब राशन व अन्य सरकारी योजनाओं से राहत महसूस कर रहा है। इसके बावजूद लड़ाई भाजपा और सपा में ही होगी। कसया के गोपालगढ़ में अंकित सिंह, युवराज, शुभ प्रताप व उत्कर्ष सिंह कहते हैं कि यहां लड़ाई सपा व भाजपा के बीच होगी।  हाटा में फल विक्रेता शिव शंकर गोंड व रवींद्र गुप्ता कहते हैं कि राशन, पेंशन, शौचालय, आवास व आयुष्मान योजना पर सरकार का जोर रहा। चेहरा बदल कर कई बिगड़ी सीट फिर बनाई जा सकती है।

मतदाताओं की कथनी...

मतदाताओं ने ये बातें भी कहीं

  • चौरी चौरा विधानसभा क्षेत्र में गोरखपुर-देवरिया रोड पर देवीपुर दुबियारी है। यहां दलित परिवार की कबूतरी देवी व सुनीता देवी मिल गईं। वे कहती हैं, सड़क का विस्तार हुआ तो हम लोगों को पीछे धकेल दिया गया। पीछे यादव लोग हैं, उधर बढ़ नहीं सकते। शौचालय मिला, लेकिन जमीन न होने से नहीं बनवा पाए। काम नहीं मिल रहा है। मनरेगा के काम का पैसा पहले खाते में आता था। अब नकद देने लगे हैं। हालांकि दो-दो हजार रुपये मोदी सरकार से मिलता है। अभी तो मोदी ही मन में हैं। चुनाव आएगा, तब देखेंगे।
  • देवरिया सदर व रुद्रपुर के बॉर्डर पर इंदुपुर में दुग्ध उत्पाद व्यवसायी सत्येंद्र प्रताप सिंह कई लोगों के साथ मिल गए। वे कहते हैं कि देवरिया सदर के मौजूदा विधायक के पक्ष में माहौल अच्छा है। रुद्रपुर निषाद प्रभाव वाली सीट है। यहां कोई अच्छा निषाद आएगा तो भाजपा फिर जीत सकती है। वरना, यहां कांग्रेस भारी पड़ सकती है।
  • बरहज के परसिया भंडारी में मिले बाल किशुन कहते हैं, हम विधायक को नहीं पहचानते। लेकिन हम गरीब हैं। पहले कहा जाता था कि क्या सरकार मुंह में निवाला डालने आएगी? आज सरकार नोन, तेल, राशन, पेंशन, खेती के लिए छह हजार रुपये दे रही है। गरीब नमक खाकर नमकहरामी नहीं कर सकते।
  • रामपुर कारखाना के खुखुंदू चौराहे पर अभिषेक यादव व जगदीश भारती से मुलाकात हुई। अभिषेक कहते हैं, सपा-भाजपा में लड़ाई है। महंगाई काफी है। काम-धंधा ठप पड़ा है। लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। सिर्फ जाति-धर्म की बात से लोग नाराज हैं। इसका फायदा सपा को मिल रहा है।
  • विजय प्रताप, शफीक व हनीफ अंसारी से सलेमपुर में मुलाकात हुई। शफीक कहते हैं, महंगाई बड़ा मुद्दा है। कमजोरों के लिए दिक्कत है। परेशान लोग सपा के साथ जाएंगे। इसी क्षेत्र के परसिया भंडारी में हरेराम मिश्र कहते हैं कि विधायक से लोग जरूर बहुत संतुष्ट नहीं हैं, पर मोदी व योगी का काम आम लोग देख रहे हैं। लाभ पा रहे हैं। जनता सरकार को फिर मौका देने का मन बनाए हुए है।
  • महराजगंज के धनेवा-धनेई में मिले अरुण कौशल कहते हैं कि ईवीएम लोचा न हुआ तो तस्वीर बदल जाएगी। महराजगंज सदर में मिले प्रदीप तिवारी कहते हैं कि पिछला चुनाव लोग मोदी के नाम पर जीते थे। अब भी उन्हीं के नाम का सहारा ले रहे हैं।
  • फाजिलनगर के नरायनपुर में मिले विनय यादव, गोविंद शर्मा व मुरारी शर्मा कहते हैं कि यहां विकास ही मुद्दा है। आसपास कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। 12 किमी. दूर जाना पड़ता है। यहां से चुनाव में दो कुशवाहा आने की चर्चा है। ऐसा हुआ तो कोई तीसरा दांव लगा सकता है।

ये है पांच वीवीआईपी सीटों का हाल
गोरखपुर सदर : भाजपा के डॉ. आरएमडी अग्रवाल यहां से विधायक हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने के एलान के बाद से यह हॉट सीट बन गई थी। अब योगी के अयोध्या से चुनाव लड़ने के संकेत हैं। हालांकि, इसकी घोषणा नहीं होने से लगातार चार बार से विधायक डॉ. अग्रवाल की स्थिति अभी मझधार में है।

पथरदेवा : देवरिया की इस सीट से कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही विधायक हैं। मतदाता कह रहे हैं कि अगर शाही फिर लड़े और ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी सपा से आ गए तो लड़ाई जोरदार हो जाएगी। इन नेताओं के बीच लड़ाई रहती आई है।

रुद्रपुर : देवरिया की इस सीट पर राज्यमंत्री जय प्रकाश निषाद विधायक हैं। तमाम मतदाता कांग्रेस प्रवक्ता व पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह के पुराने कार्यकाल के काम गिना रहे हैं। सत्ताधारी दल से ठीक प्रत्याशी न आया तो भाजपा के कई समर्थक उनके साथ जाने का एलान करते घूम रहे हैं।

तमकुहीराज : कुशीनगर जिले की इस सीट से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू लगातार दूसरी बार विधायक हैं। लोग कहते हैं कि लल्लू की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में व्यस्तता से क्षेत्र में पकड़ ढीली हुई है। यह उनकी चुनौती बढ़ाए हुए है।

पडरौना : कुशीनगर की इस सीट से श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य विधायक हैं। अब वे भाजपा छोड़कर सपा में जा चुके हैं। भरवलिया निवासी विराट मिश्रा कहते हैं कि भाजपा के लोगों में महंगाई से उतनी नाराजगी नहीं है, जितनी मौर्या से थी। यहां लड़ाई भाजपा व सपा में होगी।

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