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फाइलों में कैद पानी संकट दूर करने का उपाय
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 06 Feb 2014 01:00 AM IST
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शहर के लोगों को पानी का संकट न झेलना पड़े, इसके लिए एक योजना करीब 28 वर्ष पहले बनाई गई थी। यह योजना भी लापरवाही पूर्ण सरकारी कार्यप्रणाली के चलते फाइलों में कैद हो कर रह गई है।
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यही वजह है कि इसके लिए जितने सतही जल की जरूरत थी, वह अब तक नहीं मिल पा रहा है। लंबे इंतजार के बाद करीब तीन साल पहले तीसरा जलकल तो शुरू हो गया, लेकिन उसे पानी अब तक सिंचाई विभाग से नहीं मिल रहा।
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पानी के संकट को कम करने के लिए तीसरे जलकल को हर रोज 100 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। तीन दशक पहले जब तीसरे जलकल की योजना बनी थी, तब इतने पानी की जरूरत महसूस की गई थी।
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इसके विपरीत सिंचाई विभाग महज 30 क्यूसेक पानी ही तीसरे जलकल को उपलब्ध करा पा रहा है। वह भी तब जब सिंचाई विभाग को इसका पूरा भुगतान भी किया जा चुका है।
पानी न मिल पाने के पीछे एक अहम वजह यह भी है कि शासन ने भी जलकल को 100 क्यूसेक पानी मिले, इसके लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है, जबकि इसकी मांग लगातार की जा रही।
28 मार्च 1986 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस संबंध में हुई बैठक में 100 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने और 9 अप्रैल 1985 को 30क्यूसेक पानी देने के शासनादेश को संशोधित करने करने पर सहमति बनी थी।
इसके बाद जल निगम द्वारा सिंचाई विभाग को 100 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने के लिए 19.60 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
पानी उपलब्ध कराने से पहले सिंचाई विभाग ने आठ बिंदुओं पर जो जानकारी मांगी थी, वह भी जल निगम द्वारा सिंचाई विभाग को उपलब्ध कराई जा चुकी है।
वहीं जल निगम के परियोजना प्रबंधक एके गुप्ता कहते हैं कि भविष्य को देखते हुए योजना बनाई जाती है। जब तीसरे जलकल का प्रस्ताव बना था, तब 100 क्यूसेक पानी की आवश्यकता आंकी गई थी। पीने का पानी सिंचाई विभाग को उपलब्ध कराना है।
इसके लिए उसे पैसा भी दिया जा चुका है लेकिन शासनादेश जारी न हो पाने के कारण अब तक सिंचाई विभाग से पानी नहीं मिल पा रहा है।