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Lucknow News: हालात से लड़कर फल-फूल रही हॉकी की पौध

Tue, 01 Sep 2026 02:12 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 02:12 AM IST
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A crop of hockey talent is flourishing despite the odds.
घास के मैदान में हॉकी खेलते खिलाड़ी 
सौरभ मिश्रलखनऊ। एक तरफ जिंदगी की मुश्किलें हैं... दूसरी तरफ आंखों में टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना। नेशनल कॉलेज के घास के मैदान पर हॉकी की स्टिक थामे ये बच्चे सिर्फ खेल नहीं सीख रहे, बल्कि हालात से आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं। किसी के सिर से पिता का साया बचपन में उठ गया तो किसी के पिता ऑटो चलाते हैं कोई स्कूल वैन चलाने वाले पिता की मेहनत देख बड़ा हो रहा है।
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किसी की मां घर संभाल रही हैं, तो कोई घर चलाने के साथ छोटे-मोटे काम कर बच्चों के सपनों को सहारा दे रही है। केडी सिंह बाबू मेमोरियल सोसाइटी की ओर से नेशनल कॉलेज के घास मैदान पर मुफ्त प्रशिक्षण इन बच्चों को उम्मीद दे रहा है लेकिन बेहतर अभ्यास के लिए इन्हें अब एस्ट्रोटर्फ का इंतजार है।
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इसी मैदान से शारदा नंदन तिवारी, आमिर अली और मुमताज खान जैसे खिलाड़ी निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर हॉकी की नई पौध आगे बढ़ रही है। आशिका को बचपन से मोबाइल पर स्पोर्ट्स देखने में रुचि रही। ओलंपियन हरमनप्रीत सिंह, ललित उपाध्याय, भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी मुमताज खान की हॉकी ने उनका ध्यान खींचा। केडी सिंह बाबू मेमोरियल सोसाइटी से मुफ्त प्रशिक्षण मिलने लगा। तीन वर्षों से यहां हॉकी की बारीकियां सीख रहीं आशिका अब भारतीय हॉकी खिलाड़ी बनने का सपना पूरा करना चाहती हैं। वह अब तक चार स्कूल स्टेट के रजत पदक जीत चुकी हैं।
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मुमताज की तरह इंडिया के लिए खेलूंगी
Iपिता पवन पांडेय पैथोलॉजी में काम करते हैं और मां क्षमा पांडेय गृहिणी हैं। स्कूल स्टेट में रजत पदक जीत चुकी हूं। सोसाइटी की खिलाड़ी रहीं मुमताज खान को आदर्श मानकर उन्हीं की तरह भारतीय टीम की जर्सी पहनना सपना है। -अंशिका पांडेयI
गोलकीपर स्वाति को एस्ट्रोटर्फ का इंतजार
Iमेरे पापा सोनू स्कूल वैन चलाते हैं और मां शिवानी शर्मा गृहिणी हैं। सितंबर 2025 में झांसी में हुए स्कूल स्टेट में रजत पदक मिला। भारतीय टीम के लिए खेलना चाहती हूं। बेहतर अभ्यास के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान जरूरी है। -स्वाति शर्मा, गोलकीपरI
Iकुछ नहीं आता था, अब दो बार नेशनल में रजतI
Iमेरे पापा रामदास ऑटो चालक और मां पूनम गृहिणी हैं। वर्ष 2021 में हॉकी शुरू किया तब अधिक जानकारी नहीं थी। इसके बाद बारीकियां सीख नेशनल चैंपियनशिप में दो बार रजत पदक जीता। अब भारतीय टीम में जगह बनाना लक्ष्य है। -वरुणI

Iमनप्रीत से सीखा थ्रीडी स्किल, ओलंपिक लक्ष्यI
Iमेरे पिता राम कृपाल शुक्ला कार चलाते हैं। भारतीय मिडफील्डर मनप्रीत सिंह को देखकर उनसे थ्रीडी स्किल सीखी। स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर चुका हूं। आगे देश के लिए ओलंपिक पदक जीतना चाहता हूं। -शुभांशु शुक्लाI

घास के मैदान में हॉकी खेलते खिलाड़ी 

घास के मैदान में हॉकी खेलते खिलाड़ी 

घास के मैदान में हॉकी खेलते खिलाड़ी 

घास के मैदान में हॉकी खेलते खिलाड़ी 

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